पूर्व में अष्ठभुजा हॉस्पिटल पथरौड़ा से एक महिला की गई थी जान शिकायत पर अभी तक नही पूरी हुई जांच, न ही जवा थाने में एफआईआर हुई दर्ज। News National World/जवा/ जिला स्वास्थ्य विभाग रीवा के लापरवाही एवं मनमानी से पूरे रीवा जिला सहित तराई अंचल के जवा और त्योंथर में कुकुरमुत्ते की तरह अवैध क्लीनिक,नर्सिंग होम,हॉस्पिटल और पैथलॉजी देखने को मिलेंगे जो इलाज और जांच के नाम पर भोलीभाली जनता के साथ लूट कर रहे है यहा तक कि कई झोलाछाप डाक्टर मेडिकल स्टोर खोलकर उसके नाम पर क्लीनिक चला रहे है तो कई बिना डिग्री के डाक्टर दूसरे डाक्टर के नाम पर क्लीनिक चला रहे है जिन पर कोई कार्यवाही नही की जा रही है। इसी तरह के मामले में 07/11/2024 को जवा तहसील मुख्यालय से 1 किलोमीटर की दूरी पर भखरवार गांव में बिना रजिस्ट्रेशन के जवा बीएमओ के सह पर संचालित मां गंगा हॉस्पिटल के झोलाछाप डाक्टर ने अकौरी निवासी श्रीमती अरुणा सेन पति संतोष सेन की गर्भवती पत्नी की जान ले ली।बताया जाता है कि अष्ठभुजा हॉस्पिटल की तरह वहा भी कोई योग्य डाक्टर नही था फिर भी उसने सर्जरी की और पैसे के लालच में महिला की जान ले ली। वही अक्सर देखा जाता है कि सभी अस्पतालों में लोगो को आकर्षित करने के लिए बकायदे पम्पलेट,बैनर और होल्डिंग में नामी डाक्टरो का नाम लिखकर प्रचार किया गया है और वो नाम देखकर लोग हॉस्पिटल आते है और अपनी जान जोखिम में डालते है जिसकी जानकारी CMHO अधिकारी एवं कार्यालय के निरीक्षण टीम रीवा सहित सभी बीएमओ को भी होती थी परन्तु कार्यवाही नही। वही अभी हाल ही में 28/10/2024 को रीवा से जांच टीम जवा आयी हुई थी जिसमे 2 अस्पतालों और एक क्लीनिक पर कार्यवाही की गयी थी लेकिन जांच टीम को मालूम था कि मां गंगा हॉस्पिटल का कोई रजिस्ट्रेशन नही है फिर भी कोई कार्यवाही नही की गयी और फ़ारमल्टी अदा कर चले गए। जबकि बाकायदे मां गंगा हॉस्पिटल का बोर्ड लगा हुआ था। जिसका नतीजा है कि अष्ठभुजा हॉस्पिटल रिसर्च सेंटर पथरौड़ा के बाद मां गंगा हॉस्पिटल के डाक्टर ने एक मासूम महिला की जान ले ली। यदि समय समय पर जिला चिकित्सालय रीवा एवं जवा बीएमओ के द्वारा जांच एवं निरीक्षण किया जाता तो शायद ऐसे फर्जी चला रहे हॉस्पिटल और क्लीनिक वालो से मासूमो की जान बचाई जा सकती है। लेकिन उन्हें दूसरों की जान से क्या मतलब है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार मां गंगा हॉस्पिटल भखरवार के डॉक्टर सचिन कुशवाहा (गोलू) ने 07/11/2024 अकौरी निवासी संतोष सेन की गर्भवती महिला को डिलेवरी कराने के लिए पहले मां गंगा हॉस्पिटल में भर्ती कराया था कुछ टीटमेन्ट किया लेकिन यहा पर व्यवस्था नही होने पर उसे चाकघाट बार्डर में संचालित श्री विजय हॉस्पिटल ले गया और परिजन को सर्जन आने की बात करता रहा कभी देर बाद फिर वहा से सरदार पटेल अस्पताल नारीबारी ले जाया गया। जहा पर महिला का ऑपरेशन किया लेकिन महिला की हालत खराब हो गयी तो कुछ देर में उसे नैनी के एक अस्पताल ले जाया गया जहा पर वहा के डाक्टर ने मना कर दिया तो फिर उसे आनन फानन में जेपी मिमोरिअल अस्पताल प्रयागराज में भर्ती कराया गया और इलाज चलता। लेकिन वहाँ के डाक्टर भी उसे बचा नही सके और 08/11/2024 को24 घंटे बाद गर्भवती महिला की मौत हो गयी।मौत के बाद मां गंगा हॉस्पिटल के डाक्टर एवं मैनेजमेंट ने रातों रात लगे बोर्ड को हटा कर फरार हो गए। सवाल यही की आखिर इन मौतों का जिम्मेदार कौन? बिना डिग्रीधारी डाक्टर या स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारी। आपको बता दे कि इसी तरह से दिनांक 17 मार्च 2024 को निकिता सिंह पति राबेन्द्र सिंह को अष्टभुजा हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर चिल्ला रोड जवा में डिलेवरी हेतु भर्ती किया गया थाजिसमे बिना योग्य डाक्टर के ऑपरेशन किया गया था जिसमे निकिता सिंह एवं नवजात शिशु की मौत ही गयी थी। और उसे छिपाने के लिए ऑक्सीजन लगाकर सतगुरु हॉस्पिटल शंकरगढ़ भेजा गया था। जिसकी शिकायत पर आज तक न ही विभाग द्वारा जांच पूरी हुई, न ही जवा थाने में एफआईआर दर्ज हुई। अब एक बार पुनः स्वास्थ्य विभाग रीवा एवं जवा बीएमओ के निष्क्रियता के चलते एक महिला की जान चली गयी।अब देखना यही होगा कि इस बार सही जांच एवं जवा थाने में शिकायत दर्ज होगी या यूं ही फरियादी अधिकारियों और जवा थाने का चक्कर लगाते रहेंगे। Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन अपने वाहनों से महाकुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं को नही लगेगा टोल टैक्स। रीवा सहकारी बैंक के महाप्रबंधक ज्ञानेन्द्र पांडेय को पृथक करने में शासन के छूट रहे पसीने
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