खातेगांव थाना प्रभारी दिलीप पुरी की मौत ने कानून-व्यवस्था और अवैध शराब के कारोबार पर खड़े किए गंभीर सवाल; आखिर कब तक जान जोखिम में डालकर ड्यूटी करेंगे पुलिसकर्मी? भोपाल/इंदौर। मध्यप्रदेश में कानून-व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। देवास जिले के खातेगांव में अवैध शराब से भरे वाहन को रोकने की कार्रवाई के दौरान थाना प्रभारी दिलीप पुरी की जान चली गई। पुलिस कार्रवाई के दौरान वाहन चालक के वाहन आगे बढ़ाने से टीआई उसके पहिए की चपेट में आ गए। यह घटना केवल एक पुलिस अधिकारी की मौत नहीं, बल्कि प्रदेश में अवैध कारोबार और कानून के सामने खड़ी होती आपराधिक चुनौती का गंभीर संकेत है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के पास गृह विभाग की जिम्मेदारी भी है। ऐसे में सवाल सीधे सरकार और गृह विभाग की जवाबदेही पर उठेंगे। प्रदेश में लगातार सामने आ रही आपराधिक घटनाओं के बीच केवल दौरे, बैठकें और समीक्षा पर्याप्त नहीं हैं। जनता को जमीन पर कानून का प्रभाव दिखाई देना चाहिए। आखिर वह व्यवस्था कब बनेगी, जिसमें अपराधी कानून से डरें और कर्तव्य निभाने वाला पुलिसकर्मी खुद को सुरक्षित महसूस करे? शराब माफिया के हौसले इतने बुलंद कैसे? सबसे बड़ा सवाल यह है कि अवैध शराब का कारोबार आखिर किसके संरक्षण में फल-फूल रहा है? जिस कारोबार को रोकने के लिए पुलिस को रात में सड़कों पर उतरना पड़ रहा है, उसी कारोबार से जुड़े वाहन को रोकने की कोशिश में एक थाना प्रभारी को अपनी जान गंवानी पड़ी। यह स्थिति बताती है कि समस्या केवल कुछ तस्करों को पकड़ने तक सीमित नहीं है। जरूरत उस पूरे नेटवर्क को तोड़ने की है, जो अवैध शराब के निर्माण, भंडारण, परिवहन और बिक्री से जुड़ा है। मुख्यमंत्री जी, अगर हर घटना के बाद कुछ गिरफ्तारियां, कुछ निलंबन और जांच के आदेश ही समाधान हैं, तो फिर इस अवैध कारोबार की जड़ें खत्म कब होंगी? यह पता लगाना जरूरी है कि शराब कहां से आ रही है, किसके गोदामों में रखी जा रही है, किन रास्तों से पहुंचाई जा रही है और इस पूरे नेटवर्क को आर्थिक मदद कौन कर रहा है। किसी भी स्तर पर मिलीभगत सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदारों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए। दिलीप पुरी की जान वापस नहीं आएगी, लेकिन दूसरे पुलिसकर्मियों को बचाया जा सकता है थाना प्रभारी दिलीप पुरी अपनी ड्यूटी निभाने के लिए मैदान में थे। उनकी जान की कीमत कोई मुआवजा या सरकारी घोषणा पूरी नहीं कर सकती। लेकिन उनकी मौत के बाद सरकार के पास यह सुनिश्चित करने का अवसर और जिम्मेदारी दोनों हैं कि भविष्य में किसी दूसरे पुलिस अधिकारी या जवान को ऐसी परिस्थिति में अपनी जान न गंवानी पड़े। रात्रिकालीन गश्त और हाईवे चेकिंग के दौरान पुलिसकर्मियों को पर्याप्त सुरक्षा उपकरण, मजबूत बैरिकेडिंग, आधुनिक संचार व्यवस्था, सुरक्षित वाहन और आवश्यकतानुसार अतिरिक्त बल उपलब्ध कराया जाना चाहिए। संदिग्ध भारी वाहनों को रोकने के लिए ऐसी रणनीति होनी चाहिए, जिसमें पुलिसकर्मियों की जान जोखिम में न पड़े। मुख्यमंत्री जी, अब कठोर फैसले लेने होंगे डॉ. मोहन यादव जी, प्रदेश की जनता आपसे केवल बयान नहीं, जवाब और परिणाम चाहती है। गृह विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे मुख्यमंत्री को यह समझना होगा कि कानून-व्यवस्था केवल अपराध दर्ज करने और आरोपियों को गिरफ्तार करने से नहीं चलती। अपराध होने से रोकना भी सरकार की जिम्मेदारी है। अवैध शराब के कारोबार में शामिल लोगों की संपत्तियों, आर्थिक लेनदेन और नेटवर्क की कानूनी तरीके से जांच होनी चाहिए। दोष सिद्ध होने पर कानून के तहत संपत्ति जब्ती और अवैध निर्माणों पर कार्रवाई की जाए। साथ ही आबकारी विभाग, पुलिस और प्रशासन की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। एक और बात सरकार को समझनी होगी—पुलिस केवल आदेशों से मजबूत नहीं होती, उसे संसाधन, सुरक्षा और निष्पक्ष कार्रवाई का भरोसा भी चाहिए। अगर ईमानदारी से ड्यूटी करने वाले अधिकारी ही सुरक्षित नहीं रहेंगे तो अपराधियों के मन से कानून का डर कैसे पैदा होगा? मुख्यमंत्री जी, अब सवाल सिर्फ दिलीप पुरी की मौत का नहीं है। सवाल मध्यप्रदेश की कानून-व्यवस्था, पुलिस के मनोबल और आम जनता की सुरक्षा का है। दौरे जारी रह सकते हैं, बैठकें भी होती रहेंगी, लेकिन जनता को नतीजे चाहिए। शराब माफिया के नेटवर्क पर निर्णायक चोट कब होगी? जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही कब तय होगी? और सबसे बड़ा सवाल—क्या मध्यप्रदेश में कानून का राज अपराधियों से ऊपर स्थापित हो पाएगा? अब सरकार को जवाब देना होगा, क्योंकि हर बार किसी दिलीप पुरी की कुर्बानी के बाद जागना बहुत देर हो सकती है। — संपादकीय डेस्कNEWS NATIONAL WORLD Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन मिट्टी के दीयों से रोशन होंगे 50 से अधिक परिवारों के सपने, जरूरतमंद बच्चों की खुशियों से सजेगी दिवाली सेंट एंजेल्स स्कूल में टेबल टेनिस प्रतियोगिता का हुआ शुभारंभ