भोपाल। प्रदीप चौधरी। मध्यप्रदेश को यूं ही अजब-गजब प्रदेश नहीं कहा जाता। यहां सरकारी व्यवस्थाओं में ऐसी-ऐसी खामियां सामने आती रहती हैं, जो जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर देती हैं। ताजा मामला नर्सिंग रजिस्ट्रेशन से जुड़ा है, जहां कथित तौर पर गधे की फोटो और उसके नाम से नर्सिंग रजिस्ट्रेशन प्रमाणपत्र जारी होने का मामला सामने आया है। मामले ने नर्सिंग रजिस्ट्रेशन व्यवस्था की जांच और दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि आखिर आवेदन की जांच किस स्तर पर की गई? फोटो और नाम का मिलान किए बिना प्रमाणपत्र कैसे जारी हो गया? क्या जिम्मेदार अधिकारियों ने दस्तावेजों का सत्यापन करना भी जरूरी नहीं समझा?इस मामले को लेकर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल से भी जिम्मेदारों की जवाबदेही को लेकर सवाल पूछा गया है। अब देखना होगा कि इस कथित लापरवाही पर विभाग क्या कार्रवाई करता है और रजिस्ट्रेशन जारी करने की पूरी प्रक्रिया की जांच कब तक होती है।एक तरफ नर्सिंग व्यवस्था में पारदर्शिता और गुणवत्ता की बात होती है, वहीं दूसरी ओर गधे के नाम और फोटो से रजिस्ट्रेशन जारी होने का मामला सामने आना पूरी व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा रहा है।मध्यप्रदेश में अजब-गजब व्यवस्था का यह मामला अब जिम्मेदारों से जवाब मांग रहा है। Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन इंदौर पुलिस का नशे के खिलाफ बड़ा प्रहार: 117 मामलों में जब्त ₹4.84 करोड़ के मादक पदार्थों का किया विनिष्टीकरण नवरात्र से पहले इंदौर में बड़ी कार्रवाई: ₹92 लाख की 19 हजार अवैध अबॉर्शन किट जब्त, विधायक ऊषा ठाकुर के बयान के बाद मामला चर्चा में