भोपाल। मध्यप्रदेश में बच्चों और गर्भवती महिलाओं के पोषण को लेकर चिंता बढ़ाने वाली तस्वीर सामने आई है। प्रदेश की करीब 97 हजार आंगनवाड़ियों में साल में 300 दिन पोषण आहार उपलब्ध कराया जाना निर्धारित है, लेकिन सामने आई रिपोर्ट के अनुसार जुलाई तक करीब 170 दिन ही नियमित रूप से पोषण आहार मिल पाया। इससे तय लक्ष्य की तुलना में पोषण आहार वितरण काफी कम रहने की बात सामने आई है।सबसे बड़ी चिंता प्रदेश में पोषण आहार तैयार करने वाले सभी सात प्लांटों के बंद होने को लेकर है। रीवा, सागर, देवास, शिवपुरी और होशंगाबाद समेत विभिन्न स्थानों पर संचालित इन प्लांटों के बंद होने के बाद नई व्यवस्था के लिए अब तक टेंडर जारी नहीं होने की बात सामने आई है। ऐसे में आंगनवाड़ी केंद्रों तक नियमित पोषण आहार पहुंचाने की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।रिपोर्ट में NFHS-6 के आंकड़ों का हवाला देते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में कम वजन वाले बच्चों की स्थिति को लेकर भी चिंता जताई गई है। आंकड़ों के मुताबिक कम वजन वाले बच्चों का आंकड़ा 33 प्रतिशत से बढ़कर 42 प्रतिशत से अधिक हो गया है। वहीं करीब 33.3 प्रतिशत बच्चे स्टंटिंग यानी उम्र के हिसाब से कम लंबाई की समस्या से प्रभावित बताए गए हैं।इसी बीच दतिया में 16 माह की अतिकुपोषित बच्ची की मौत का मामला भी सामने आया है। इस घटना ने प्रदेश में कुपोषण की स्थिति और बच्चों को मिलने वाली पोषण एवं स्वास्थ्य सेवाओं की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।अब सरकार के सामने आंगनवाड़ियों में पोषण आहार की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने के साथ बच्चों और गर्भवती महिलाओं की स्वास्थ्य निगरानी मजबूत करना बड़ी चुनौती है। हालांकि, रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों और दावों की आधिकारिक पुष्टि संबंधित विभाग से होना बाकी है। Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन 10वीं के छात्रों पर प्रिंसिपल की हत्या की साजिश का आरोप, ‘बाबू’ शब्द से खुला राज तीन लूट की वारदातों में फरार आरोपियों पर 30-30 हजार का इनाम घोषित