नई दिल्ली। दुनिया के कई देशों में हाल के वर्षों में युवाओं, विशेषकर Gen-Z (जेनरेशन Z) की सक्रिय भागीदारी वाले आंदोलनों ने राजनीतिक और प्रशासनिक फैसलों पर गहरा असर डाला है। सोशल मीडिया के माध्यम से तेजी से संगठित होने वाली यह पीढ़ी कई देशों में बड़े बदलावों का कारण बनी है।भारत में वर्ष 2026 में NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं के विरोध में छात्रों ने व्यापक आंदोलन किया। वहीं नेपाल में 2025–26 के दौरान भ्रष्टाचार और राजनीतिक व्यवस्था के खिलाफ युवाओं के प्रदर्शन ने सत्ता परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त किया।बांग्लादेश में 2024 में सरकारी नौकरियों में आरक्षण व्यवस्था के विरोध से शुरू हुआ छात्र आंदोलन राष्ट्रीय स्तर पर फैल गया, जिसके बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना को पद छोड़ना पड़ा। श्रीलंका में 2022 के आर्थिक संकट और महंगाई के खिलाफ हुए युवा प्रदर्शनों के बाद राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे ने इस्तीफा दिया। केन्या में 2024 में टैक्स बढ़ाने वाले वित्त विधेयक के विरोध में Gen-Z के नेतृत्व वाले प्रदर्शनों के बाद सरकार को विवादित प्रस्ताव वापस लेना पड़ा और बाद में कैबिनेट में भी बड़े बदलाव किए गए।Gen-Z क्या है?Gen-Z या Generation Z उन लोगों की पीढ़ी को कहा जाता है जिनका जन्म सामान्यतः 1997 से 2012 के बीच हुआ माना जाता है। यह पीढ़ी इंटरनेट, स्मार्टफोन और सोशल मीडिया के दौर में बड़ी हुई है, इसलिए इसे Digital Generation भी कहा जाता है। Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन इंदौर में अवैध शराब तस्करी पर बड़ा प्रहार, 927 पेटी शराब सहित ₹1.10 करोड़ का माल जब्त केरल में पटरी-फेरी वालों पर हमले और धमकियां