कोलकाता | कंपनी अधिनियम के तहत याचिका नई दिल्ली/ नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्युनल, कोलकाता बेंच के समक्ष स्वर्गीय फिल्मकार स्वपन सरकार की कंपनी के शेयरों के स्वामित्व को लेकर एक जटिल मामला विचाराधीन है। यह मामला कंपनी कानून के साथ-साथ व्यक्तिगत कानून के पहलुओं को भी छूता है। मामले की पृष्ठभूमि:स्वर्गीय स्वपन सरकार, जिन्होंने प्रसिद्ध फिल्म ‘पार’ बनाई थी, अपनी कंपनी में 77% शेयर के मालिक थे। उनके निधन अगस्त 2022 के बाद उनके शेयरों के ट्रांसमिशन को लेकर विवाद शुरू हुआ। श्री उदयन सरकार, जो कंपनी में 8% शेयरधारक हैं, ने NCLT में याचिका दायर कर आरोप लगाया कि स्वपन सरकार की पत्नी श्रीमती नसरीन को किया गया शेयर ट्रांसफर वैध नहीं है।वहीं श्रीमती नसरीन का पक्ष है कि स्वपन सरकार ने जीवनकाल में ही शेयर सर्टिफिकेट पर एंडोर्समेंट करके शेयर उन्हें सौंप दिए थे। इसकी सूचना ROC को भी दी गई थी और उन्हें कंपनी का डायरेक्टर भी बनाया गया था। विवाह स्पेशल मैरिज एक्ट, 1954 के तहत हुआ था। NCLT के अंतरिम आदेश में क्या कहा गया:ट्रिब्युनल ने अपने आदेश में मुख्य रूप से 5 बिंदुओं पर टिप्पणी की: वैवाहिक स्थिति: आदेश में कहा गया कि रिकॉर्ड पर यह नहीं दिखाया गया कि स्वपन सरकार ने अपनी पहली पत्नी से तलाक लिया था। हिंदू विवाह अधिनियम 1955 की धारा 5(i) का हवाला देते हुए बेंच ने दूसरी शादी की वैधता पर सवाल उठाया। शेयर ट्रांसमिशन: बेंच ने कहा कि चूंकि वैवाहिक स्थिति स्पष्ट नहीं है, इसलिए शेयरों का ट्रांसमिशन भी संदिग्ध है। AOA का उल्लंघन: कंपनी के AOA के आर्टिकल 15 के अनुसार शेयर सिर्फ “फैमिली मेंबर” को ट्रांसफर हो सकते हैं। दस्तावेज: SH-4 फॉर्म रिकॉर्ड पर न होने का जिक्र किया गया। कंपनी के फंड: कंपनी के बैंक खाते से 16.52 लाख रुपये निकालने के मामले का भी उल्लेख किया गया। प्रतिवादी पक्ष के कानूनी सवाल:श्रीमती नसरीन के वकील ने आदेश पर कई कानूनी सवाल उठाए हैं: क्षेत्राधिकार का सवाल: क्या NCLT, जो कंपनी कानून की अदालत है, विवाह की वैधता पर फैसला दे सकती है? विवाह रद्द करने का अधिकार फैमिली कोर्ट के पास है। सबूत का भार: क्या बिना किसी पक्ष द्वारा विवाह को चुनौती दिए और बिना रजिस्ट्रार को पक्ष बनाए विवाह को “अमान्य” घोषित किया जा सकता है? स्पेशल मैरिज एक्ट का मैरिज सर्टिफिकेट रिकॉर्ड पर है। जीवनकाल का ट्रांसफर: क्या एक वयस्क व्यक्ति अपने जीवनकाल में अपने स्व-अर्जित शेयर किसी अन्य वयस्क को असाइन नहीं कर सकता? इसके लिए SH-4 मरने के बाद जरूरी है, जीवनकाल में नहीं। पिछले आचरण: याचिकाकर्ता उदयन सरकार ने खुद स्वपन सरकार और नसरीन के साथ ऑडिटेड बैलेंस शीट पर हस्ताक्षर किए थे और नसरीन के डायरेक्टर बनने के बाद बोर्ड मीटिंग में भी शामिल हुए थे। वकील का कहना है कि कंपनी कानून के कई NCLAT और सुप्रीम कोर्ट के फैसले इस मामले में लागू होते हैं, जिन्हें आदेश में संबोधित नहीं किया गया। फिलहाल ट्रिब्युनल ने मामले को “ऑप्रेशन एंड मिसमैनेजमेंट” के एंगल से देखने के लिए प्रशासक को निर्देश दिया है। प्रतिवादी पक्ष ने कहा है कि वे इस आदेश के खिलाफ NCLAT में अपील करेंगे। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला कंपनी कानून और व्यक्तिगत कानून के बीच “क्षेत्राधिकार” के टकराव का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है। Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन केरलम् बजट : खोखले दावे और भ्रष्टाचार की कहानियाँ इंदौर के कारोबारी की संदिग्ध मौत में हनी ट्रैप एंगल, जांच तेज