बॉम्बे हाई कोर्ट / बुजुर्गों के संपत्ति अधिकारदेखभाल के वादे पर मिली संपत्ति की उपेक्षा होने पर गिफ्ट डीड रद्द की जा सकती हैमुंबई। प्रदीप चौधरी। बॉम्बे हाई कोर्ट ने बुजुर्ग माता-पिता के अधिकारों को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि यदि संतान अपने माता-पिता की देखभाल नहीं करती, तो उसे उपहार (गिफ्ट) के रूप में दी गई संपत्ति वापस ली जा सकती है। अदालत ने बुजुर्ग दंपती द्वारा अपने बेटे के नाम की गई संपत्ति के गिफ्ट को रद्द करने के फैसले को सही ठहराया।अदालत ने अपने फैसले में कहा कि जब माता-पिता इस भरोसे पर अपनी संपत्ति बच्चों के नाम करते हैं कि वे उनकी देखभाल और सेवा करेंगे, तो यह एक नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी भी बन जाती है। यदि संतान इस जिम्मेदारी का पालन नहीं करती और माता-पिता की उपेक्षा करती है, तो ऐसे मामलों में संपत्ति का हस्तांतरण रद्द किया जा सकता है।हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बुजुर्गों के संरक्षण और उनके अधिकारों की रक्षा के उद्देश्य से बनाए गए कानूनों के तहत ऐसे मामलों में सक्षम प्राधिकारी संपत्ति का हस्तांतरण निरस्त करने का अधिकार रखता है। अदालत का यह फैसला वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों को मजबूती देने वाला माना जा रहा है। Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन इंदौर पुलिस की स्पेशल चेकिंग मप्र पुलिस महकमे में बड़ा फेरबदल: 168 सूबेदार और कार्यवाहक रक्षित निरीक्षक बने ‘रक्षित निरीक्षक’