बिना कोर्स के मिल गई डिग्री, पदोन्नति की ओर अब प्रमोशन की तैयारी ग्रेड-3 कर्मचारी बनेंगे सरकारी वकील रीवा। एमपी अजब है, एमपी गजब है…… जो यहां हो सकता है वो शायद ही देश की किसी और स्टेट में हो सकता हो। यहां बिना कोर्स के डिग्री मिल जाती है और उसके बाद प्रमोशन भी। यकीन ना हो तो रीवा आकर देख लीजिए और फिर मप्र सरकार की प्रमोशन लिस्ट। ये मामला है विधि स्नातक कोर्स से डिग्री और फिर सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी के पद पर पदोन्नति का। बताया जाता है कि मध्यप्रदेश में लगभग वर्ष 2000-2002 के बाद से डे नाईट या दूरवर्ती विधि स्नातक कोर्स संचालित नहीं है। जब महाविद्यालय बंद है तो ग्रेड-3 वाले कर्मचारी विभागीय डे-नाइट पढ़ाई कैसे कर सकते हैं। सूत्रों की मानें तो कई कर्मचारियों ने वर्ष 2015 से विभाग से अनुमति लेकर डे नाईट विधि स्नातक की डिग्री हासिल कर ली और अब इसी के आधार पर पदोन्नति की जानी है। डे-नाईट या दूरवर्ती विधि स्नातक कोर्स संचालित ही नहीं है तो कब पढ़ाई हो गई, कब परीक्षा हुई और कैसे डिग्री मिल गई ये सब जांच का विषय है। इसके साथ ही ये जांच की जानी चाहिए कि आखिर दूरवर्ती कोर्स वालों को कैसे पदोन्नति दी जा रही है। ये पीएससी अभ्यर्थियों के साथ ये कुठाराघात भी है। लोक अभियोजन संचालनालय भोपाल द्वारा जारी 53 सहायक ग्रेड-3 पदों की पदोन्नति को लेकर विवाद की स्थिति बनती दिख रही है। सहायक ग्रेड-3 को विधि स्नातक डिग्री से डायरेक्ट (एडीपीओ) सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी (राजपत्रित) पद पर पदोन्नति की जा रही है। अभियोजन विभाग सहायक जिला लोक अभियान अधिकारी के पद पर ऐसे कर्मचारियों को पदोन्नत कर रहा है जो सहायक ग्रेड-3 है और विधि स्नातक हैं। अब जो लोग इस पद पर पीएससी की तैयारी कर रहे हैं उनके साथ ये पक्षपात है। यहां बता दें कि मध्यप्रदेश में कुछ विभाग ऐसे है जहां विधि ग्रेजुएट ही सर्विस का पात्रता रखता है। बताया जाता है कि विधि विधायी विभाग, विधि विभाग, अभियोजन विभाग, स्कूल शिक्षा में भी विधि स्नातक शिक्षक को प्रतिनियुक्ति के आधार पर विधि अधिकारी का पद दिया जाता है। इसी तरह से अभियोजन विभाग में सहायक ग्रेड 3 को बिना विभागीय परीक्षा कराए मात्र विधि की डिग्री के आधार पर राजपत्रित अधिकारी जैसे उच्च पद पर पदोन्नति करना हास्यास्पद है। अभियोजन विभाग में सहायक ग्रेड-3 का कार्य मात्र आपराधिक आंकड़े को संकलन कर जिला अभियोजन अधिकारी के निर्देश पर मुख्यालय पर भेजना होता है।गौरतलब है कि सहायक ग्रेड-3 का कार्य विभाग के अंदर किसी भी तरह से विधि अनुभव जैसे सोपानो से होकर नहीं गुजरता है अगर इसी तरह से अनुभवहीन व्यकि को अभियोजन के संचालन जैसे महत्वपूर्ण कार्य को सौंपा जाता है तो समाज मे विधि व्यवस्था और अपराधिक न्याय व्यवस्था को मुंह चिढ़ाने जैसा है। जब वर्ष 2000-2002 से डे नाईट विधि स्नातक कोर्स देश के सभी महाविद्यालयो से बंद कर दिया गया तो विभाग द्वारा किस आदेश के तहत सेवा में रहते हुए अध्ययन हेतु विधि संकाय में प्रवेश की अनुमति दी गई। ये विभाग की घोर लापरवाही के साथ ही जांच का विषय भी है। यदि कोई कर्मचारी कहता है कि मैंने विभागीय अनुमति से विधि की डिग्री नही ली है बल्कि पढ़ाई की है तो फिर वो अवैतनिक हो सकता है। यदि वेतन लेते हुए और नौकरी करते हुए विभागीय कार्यालय से अनुपस्थित रहकर पढ़ाई की है तो ये कदाचरण की श्रेणी में आता है। विधि स्नातक कोर्स परीक्षा में बैठने हेतु 3 वर्षीय पाठ्यक्रम में प्रत्येक वर्ष 75 प्रतिशत की उपस्थिति जरूरी है। यदि 3 साल के विधि स्नातक के दौरान जिन कर्मचारियों ने वेतन लिया है तो विभाग और शासन के साथ धोखा दिया है। ऐसे कर्मचारियों के रिकॉर्ड की जांच की जाना जरूरी है। सूत्र बताते हैं कि इसी तरह से वर्ष 2016 में भी पदोन्नत का लाभ देने की तैयारी की जा रही थी लेकिन हाई कोर्ट में पिटीशन दायर होने से पदोन्नति रुक गई थी। बहरहाल, क्या शासन प्रशासन इस स्कैम को संज्ञान में लेगा और पदोन्नति पर रोक पर रोक लगाई जाएगी ये देखने वाली बात होगी। इधर, पीएससी की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों में भी इस पदोन्नति को लेकर रोष है। Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन मप्र सरकार ने नगरीय निकायों में एल्डरमैन नियुक्त किए, नगर पालिकाओं और नगर परिषदों के लिए आदेश जारी रीवा में विस्थापित परिवारों के पुनर्वास और जलभराव की समस्या को लेकर निकले प्रदर्शनकारियो को पुलिस ने रोका।