नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सहमति से बने लंबे समय के रिश्तों और शादी के झूठे वादे पर दुष्कर्म के मामलों को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि यदि दो बालिग व्यक्ति 4-5 वर्षों तक आपसी सहमति से संबंध में रहे हों, तो केवल रिश्ता टूटने या शादी नहीं होने के आधार पर उसे शारीरिक शोषण या बलात्कार कहना उचित नहीं होगा।सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि दुष्कर्म का मामला तभी बनता है, जब यह साबित हो कि आरोपी ने शुरुआत से ही शादी का झूठा वादा केवल शारीरिक संबंध बनाने के उद्देश्य से किया था। यदि दोनों के बीच लंबे समय तक सामान्य और स्वैच्छिक संबंध रहे हों, तो यह मानना कठिन है कि महिला की सहमति केवल विवाह के वादे पर आधारित थी।अदालत ने यह भी कहा कि लिव-इन रिलेशनशिप दो वयस्कों का निजी निर्णय होता है। यदि बाद में किसी कारणवश रिश्ता समाप्त हो जाता है, तो मात्र इस आधार पर उसे आपराधिक मामला नहीं माना जा सकता।विभिन्न हाईकोर्ट्स ने भी ऐसे मामलों में समान दृष्टिकोण अपनाया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट सहित कई उच्च न्यायालयों ने लंबे समय तक सहमति से चले संबंधों में बाद में दर्ज हुई एफआईआर और आरोपपत्रों को निरस्त करते हुए कहा है कि हर असफल प्रेम संबंध या लिव-इन रिलेशनशिप को दुष्कर्म का मामला नहीं बनाया जा सकता। अदालतों ने यह भी आगाह किया है कि ऐसे मामलों में कानून का दुरुपयोग नहीं होना चाहिए।हालांकि अदालतों ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि जांच में यह साबित हो जाए कि शुरुआत से ही शादी का वादा धोखाधड़ी और छल की नीयत से किया गया था, तो ऐसे मामलों में दुष्कर्म के प्रावधान लागू हो सकते हैं। प्रत्येक मामले का निर्णय उसके तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर किया जाएगा। Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर में चढ़ावे की चोरी, समिति अध्यक्ष ने की पुष्टि कुएं में गिरे बैल को बचाने उतरे 4 ग्रामीण, जहरीली गैस से 3 की मौत, एक की हालत गंभीर