जबलपुर/मंडला। मध्यप्रदेश के प्रसिद्ध में बाघों की लगातार हो रही मौतों का मामला अब हाईकोर्ट पहुंच गया है। बाघों की मौत से चिंतित एक वन्यजीव प्रेमी द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार, नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (NTCA), मध्यप्रदेश सरकार और वन विभाग सहित छह पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।मुंबई के चेंबूर निवासी वन्यजीव प्रेमी एवं अधिवक्ता ने जनहित याचिका दायर कर आरोप लगाया है कि कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघों की मौतें पार्क प्रबंधन की लापरवाही और संक्रमण नियंत्रण में विफलता का परिणाम हैं। मामले की सुनवाई और की वेकेशन बेंच ने की।याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अंशुमान सिंह ने अदालत को बताया कि 2 अप्रैल 2026 से अब तक कान्हा टाइगर रिजर्व में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV) के संक्रमण के कारण 10 बाघों की मौत हो चुकी है। इसके बावजूद संक्रमण को रोकने के लिए पर्याप्त और प्रभावी कदम नहीं उठाए गए।याचिका में मांग की गई है कि NTCA की गाइडलाइन के अनुसार एक स्वतंत्र उच्चस्तरीय जांच समिति गठित की जाए, जो बाघों की मौत के वास्तविक कारणों और संभावित प्रशासनिक चूक की जांच करे। याचिकाकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि वन विभाग ने अब तक यह सार्वजनिक नहीं किया कि वायरस के प्रसार को रोकने के लिए कौन-कौन से कदम उठाए गए हैं और बफर क्षेत्र व आसपास के गांवों में आवारा कुत्तों के टीकाकरण की क्या स्थिति है।याचिका में जिन मामलों का उल्लेख किया गया है, उनमें बाघिन टी-122 (सुनैना) की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत, बाघिन टी-141 (अमाही) और उसके चार शावकों की मौत तथा बाघ टी-220 (महावीर) की 19 मई 2026 को हुई मृत्यु शामिल है। प्रारंभिक जांच में इन मामलों में वायरस संक्रमण की आशंका जताई गई है।विशेषज्ञों के अनुसार कैनाइन डिस्टेंपर वायरस एक अत्यंत संक्रामक और घातक बीमारी है, जो आमतौर पर संक्रमित आवारा कुत्तों से वन्यजीवों में फैलती है। यह बाघों और तेंदुओं के श्वसन, तंत्रिका एवं पाचन तंत्र को गंभीर रूप से प्रभावित करती है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते संक्रमण पर नियंत्रण नहीं पाया गया तो इसका असर पूरे टाइगर लैंडस्केप पर पड़ सकता है।देश के सबसे महत्वपूर्ण टाइगर रिजर्वों में शामिल कान्हा में कम समय में बड़ी संख्या में बाघों की मौत ने वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था और रोग निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई जून के अंतिम सप्ताह में होगी, जिस पर वन्यजीव प्रेमियों और संरक्षण विशेषज्ञों की निगाहें टिकी हुई हैं। Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन सरकारी बंगले पर सियासी घमासान, राबड़ी देवी ने आवास खाली करने से किया इनकार प्रदेशभर के बूथों पर सुनी जाएगी प्रधानमंत्री की ‘मन की बात’, मुख्यमंत्री सहित भाजपा के वरिष्ठ नेता रहेंगे शामिल