नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा फ्यूल बचाने और देश पर बढ़ते इम्पोर्ट खर्च को कम करने के लिए ‘वर्क फ्रॉम होम’ अपनाने की अपील के बाद देशभर में आईटी कर्मचारियों के बीच एक बार फिर WFH मॉडल को लागू करने की मांग तेज हो गई है। IT कर्मचारियों के संगठन न्यू इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एम्प्लॉइज सीनेट (NITES) ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर वर्क फ्रॉम होम और फ्लेक्सिबल वर्किंग मॉडल को कानूनी मान्यता देने की मांग की है।NITES ने केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मंडाविया को भेजे गए पत्र में कहा है कि IT और ITES सेक्टर में जहां संभव हो, वहां वर्क फ्रॉम होम लागू किया जाना चाहिए। संगठन ने कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान कंपनियों ने क्लाउड टेक्नोलॉजी, साइबर सिक्योरिटी टूल्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए सफलतापूर्वक वर्क फ्रॉम होम मॉडल अपनाया था और इससे उत्पादकता पर भी बड़ा असर नहीं पड़ा।संगठन का कहना है कि रोजाना लाखों कर्मचारी ऑफिस आने-जाने में घंटों ट्रैफिक में फंसते हैं, जिससे ईंधन की खपत, प्रदूषण और मानसिक तनाव बढ़ता है। NITES के अनुसार हाइब्रिड और फ्लेक्सिबल वर्क मॉडल अपनाने से पेट्रोल-डीजल की बचत, ट्रैफिक नियंत्रण और कर्मचारियों के स्वास्थ्य में सुधार संभव है।हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपने संबोधन में लोगों से सार्वजनिक परिवहन, कारपूलिंग और जहां संभव हो वहां वर्क फ्रॉम होम अपनाने की अपील की थी। उनका कहना था कि इससे देश पर फ्यूल इम्पोर्ट का दबाव कम होगा और विदेशी मुद्रा की बचत होगी।NITES ने सरकार से मांग की है कि फ्लेक्सिबल वर्किंग को अस्थायी व्यवस्था के बजाय स्थायी और कानूनी मान्यता दी जाए, ताकि भविष्य में इसे ऊर्जा संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा और कर्मचारियों के हित में प्रभावी रूप से लागू किया जा सके। Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन साइबर अपराध रोकने गृह मंत्रालय का नया कदम, शुरू हुआ TELL I4C WhatsApp Chatbot मेमू ट्रेन उद्घाटन समारोह में भिड़े सपा सांसद और ऊर्जा मंत्री, मंच पर तीखी बहस