मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 10-11 मई को कूनो नेशनल पार्क दौरे पर, वन्यजीव संरक्षण को पर्यटन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ने पर जोरभोपाल। प्रदीप चौधरी। मध्यप्रदेश अब केवल “टाइगर स्टेट” की पहचान तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि समग्र वन्यजीव संरक्षण के राष्ट्रीय मॉडल के रूप में तेजी से उभर रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में वन्यजीव संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन और इको-टूरिज्म को नई दिशा मिल रही है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री 10 और 11 मई को श्योपुर स्थित कूनो नेशनल पार्क के दौरे पर रहेंगे, जहां वे बोत्सवाना से लाई गई दो मादा चीतों को उनके बाड़े से खुले जंगल में मुक्त करेंगे।प्रदेश सरकार वन्यजीव संरक्षण को केवल पर्यावरणीय विषय नहीं, बल्कि सांस्कृतिक विरासत, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पर्यटन विकास से जोड़कर देख रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के कार्यकाल में लिए गए फैसलों ने मध्यप्रदेश को देश में संरक्षण आधारित विकास मॉडल के रूप में नई पहचान दिलाई है।मुख्यमंत्री बनने के बाद डॉ. यादव ने लंबे समय से लंबित रातापानी टाइगर रिजर्व को मंजूरी दिलाई। यह प्रदेश का नया और देश का 8वां टाइगर रिजर्व बना है। इसकी खासियत यह है कि यह किसी राज्य की राजधानी के सबसे नजदीक स्थित टाइगर रिजर्व है। साथ ही इसका नाम प्रसिद्ध पुरातत्वविद् विष्णु श्रीधर वाकणकर के नाम पर रखकर संरक्षण को सांस्कृतिक गौरव से भी जोड़ा गया।मार्च 2025 में माधव टाइगर रिजर्व को प्रदेश का 9वां टाइगर रिजर्व घोषित किया गया। यहां मानव और वन्यजीव संघर्ष कम करने के उद्देश्य से 13 किलोमीटर लंबी सुरक्षा दीवार बनाई जा रही है। विशेषज्ञ इसे भविष्य की जरूरतों के अनुरूप संरक्षण रणनीति मान रहे हैं।गिद्ध संरक्षण के क्षेत्र में भी मध्यप्रदेश देश का अग्रणी राज्य बन चुका है। प्रदेश में 14 हजार से अधिक गिद्ध मौजूद हैं। भोपाल के केरवा क्षेत्र में घायल गिद्धों के लिए विशेष रेस्क्यू सेंटर संचालित किया जा रहा है। हाल ही में छोड़ा गया एक गिद्ध उज्बेकिस्तान तक की उड़ान भर चुका है, जिसे संरक्षण अभियान की बड़ी सफलता माना जा रहा है।कूनो नेशनल पार्क अब केवल “प्रोजेक्ट चीता” तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वैश्विक संरक्षण प्रयोगशाला के रूप में उभर रहा है। यहां चीतों की संख्या बढ़कर 57 तक पहुंच चुकी है। इसके साथ गांधी सागर वाइल्डलाइफ सेंचुरी और नौरादेही को भी चीता लैंडस्केप के रूप में विकसित किया जा रहा है।प्रदेश सरकार ने वन क्षेत्रों के विस्तार की दिशा में भी महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। सागर जिले में बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर वाइल्डलाइफ सेंचुरी घोषित की गई, जबकि ओंकारेश्वर और जहानगढ़ में नए अभ्यारण्यों को मंजूरी दी गई है।ताप्ती क्षेत्र को प्रदेश का पहला कंजर्वेशन रिजर्व घोषित किया गया है, जहां टाइगर, तेंदुआ, बायसन और जंगली कुत्तों जैसी दुर्लभ प्रजातियां पाई जाती हैं। वहीं, चंबल सेंचुरी में घड़ियाल, कछुए और मगरमच्छ संरक्षण पर विशेष फोकस किया जा रहा है।कान्हा टाइगर रिजर्व में जंगली भैंसों की वापसी और हाथी संरक्षण के लिए 47 करोड़ रुपये की योजना भी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। हाथी-मानव संघर्ष कम करने के लिए ‘हाथी मित्र’, रेडियो टैगिंग और सोलर फेंसिंग जैसे कदम उठाए जा रहे हैं।वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही के लिए प्रदेश में 5500 करोड़ रुपये से अधिक की टाइगर कॉरिडोर परियोजना पर भी कार्य जारी है। इसके तहत अंडरपास, ओवरपास और साउंडप्रूफ कॉरिडोर जैसे आधुनिक प्रयोग किए जा रहे हैं ताकि विकास और वन्यजीव संरक्षण के बीच संतुलन बनाया जा सके।वन्यजीव संरक्षण के इन प्रयासों का सकारात्मक असर स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई दे रहा है। चीता परियोजना, टाइगर रिजर्व और इको-टूरिज्म गतिविधियों के चलते ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और पर्यटन को नई गति मिली है। विशेषज्ञ मानते हैं कि मध्यप्रदेश अब देश में वन्यजीव संरक्षण के सबसे बड़े मॉडल के रूप में उभर रहा है। Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन नशामुक्त भारत अभियान के तहत विद्यार्थियों को किया सम्मानित, नशे के दुष्प्रभावों से कराया अवगत जनगणना 2027 के अंतर्गत शत प्रतिशत कार्य करने वाले प्रगणकों एवं पर्यवेक्षकों का कलेक्टर ने किया सम्मान