इंदौर सेंट्रल कोतवाली पुलिस पर गंभीर सवाल, आरोपी जेल में बताकर टालती रही कार्रवाई; वही चोर राजवाड़ा में फिर चोरी करते पकड़ा गया इंदौर। शहर की स्मार्ट पुलिसिंग और त्वरित कार्रवाई के दावों के बीच इंदौर के सेंट्रल कोतवाली थाना पुलिस पर गंभीर लापरवाही, भ्रामक जानकारी देने और आरोपी को संरक्षण देने जैसे सवाल खड़े हो गए हैं। FIR क्रमांक 0049/2026 में पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया है कि 11 मार्च से लगातार उन्हें गुमराह किया जाता रहा, जबकि आरोपी का नाम-पता पुलिस के पास होने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।पीड़ित के अनुसार उनकी पत्नी का मंगलसूत्र और नकदी चोरी होने के बाद उन्होंने सेंट्रल कोतवाली थाने में शिकायत की थी। शुरुआत में पुलिसकर्मी पंकज सिंह द्वारा यह कहकर FIR दर्ज नहीं की गई कि “आवेदन दे दीजिए, FIR करेंगे तो लंबी प्रक्रिया होगी, आरोपी को दो दिन में पकड़ लेंगे।”लेकिन बाद में 16 मार्च को TI के सामने कहा गया कि आरोपी उज्जैन जेल में बंद है और उसे “प्रोडक्शन वारंट” पर लाने के लिए FIR दर्ज करनी पड़ेगी। इसके बाद करीब एक महीने तक पीड़ित परिवार को यही कहकर आश्वासन दिया जाता रहा कि कार्रवाई जारी है और आरोपी को जल्द पेश किया जाएगा। “IO फोन तक नहीं उठाती थीं”पीड़ित परिवार का आरोप है कि तत्कालीन जांच अधिकारी (EX IO) अभिरुचि कनोजिया से संपर्क करने की कई बार कोशिश की गई, लेकिन न तो वे थाने में मिलीं और न ही फोन उठाया। इतना ही नहीं, पीड़ित का आरोप है कि CM हेल्पलाइन की शिकायत भी बिना समाधान के बंद करवा दी गई। जब 22 अप्रैल को परिवार थाने पहुंचा तो पता चला कि जांच अधिकारी दो दिन पहले ही ट्रांसफर ले चुकी हैं।नई जांच अधिकारी गरिमा शाक्यवार से जब मामले की प्रगति पूछी गई तो उन्होंने कथित तौर पर कहा कि “मैं तो कल ही आई हूं” और आरोपी के अब तक रिहा हो जाने की बात कही। पुलिस का दावा झूठा साबित?मामले ने उस समय नया मोड़ ले लिया जब 26 अप्रैल को इंदौर पुलिस के आधिकारिक इंस्टाग्राम पेज @dcpzone4indore पर डाली गई एक रील में वही आरोपी राजवाड़ा क्षेत्र में एक और चोरी करते हुए पकड़ा गया दिखाई दिया। यानी जिस आरोपी को सेंट्रल कोतवाली पुलिस लगातार “उज्जैन जेल में बंद” बताती रही, वह इंदौर में खुलेआम वारदात कर रहा था। इससे पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं। CP, DGP, PMO और महिला आयोग तक पहुंची शिकायतपीड़ित परिवार ने मामले की शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय (CPGRAMS), मुख्यमंत्री हेल्पलाइन, महिला आयोग, DGP और पुलिस कमिश्नर कार्यालय तक की है। 5 मई को पुलिस कमिश्नर को लिखित विधिक प्रतिवेदन भी सौंपा गया, जिसकी प्राप्ति रसीद भी परिवार के पास मौजूद है। इसके बावजूद आरोप है कि सेंट्रल कोतवाली थाना और जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई असर नहीं पड़ा और आरोपी FIR दर्ज होने के बाद भी दो और चोरी की घटनाओं में शामिल पाया गया। मिलीभगत या घोर लापरवाही?अब सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि आखिर आरोपी की जानकारी होने, गिरफ्तारी की संभावना होने और बार-बार शिकायतों के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या यह केवल प्रशासनिक लापरवाही है या फिर आरोपी को बचाने की कोशिश? पीड़ित परिवार ने पूरे मामले की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच कर जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है। Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन मामला रतलाम फूलमाल सडक निर्माणबेहतर सुविधा मिलेगी आदिवासियों की जमीन कब्जाने की कोशिशों के खिलाफ किसान सभा ने किया जबरदस्त प्रदर्शन, प्रशासन ने दिया जांच का निर्देश
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