ग्वालियर। घरेलू रसोई गैस सिलेंडर की बढ़ती कालाबाजारी ने आम उपभोक्ताओं की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। करीब 900 रुपए में मिलने वाला घरेलू गैस सिलेंडर खुले बाजार में 2,000 से 2,500 रुपए तक बेचा जा रहा है, जिससे आम परिवारों का बजट बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।शहर सहित कई क्षेत्रों में अधिकृत गैस एजेंसियों पर उपभोक्ताओं को सिलेंडर के लिए एक से डेढ़ महीने तक इंतजार करना पड़ रहा है, जबकि दूसरी ओर अनौपचारिक नेटवर्क के जरिए यही सिलेंडर ऊंचे दामों पर आसानी से उपलब्ध हो रहा है। इससे गैस वितरण व्यवस्था की पारदर्शिता और निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।सहलग सीजन और व्यावसायिक गतिविधियों के दौरान घरेलू सिलेंडरों का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग सामने आ रहा है। हलवाई, होटल और छोटे व्यवसायों में घरेलू लाल सिलेंडरों का इस्तेमाल नियमों के विपरीत किया जा रहा है, जबकि इनके लिए कमर्शियल सिलेंडर अनिवार्य हैं। कमर्शियल सिलेंडर की अधिक कीमतों के कारण घरेलू गैस की खपत व्यावसायिक उपयोग में बढ़ रही है, जिसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं की उपलब्धता पर पड़ रहा है।खाद्य एवं आपूर्ति विभाग द्वारा समय-समय पर छापेमारी और कार्रवाई की जाती है, लेकिन इन प्रयासों का जमीनी असर सीमित दिखाई देता है। बाजार में कालाबाजारी लगातार जारी रहने से प्रशासनिक तंत्र की प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं।सरकार द्वारा लागू OTP आधारित डिलीवरी सिस्टम (DAC) को गैस वितरण में पारदर्शिता लाने की पहल माना गया, लेकिन जमीनी स्तर पर इसकी सफलता अभी अधूरी नजर आ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक वितरण नेटवर्क पर कड़ी निगरानी, जवाबदेही और निरंतर कार्रवाई सुनिश्चित नहीं होगी, तब तक कालाबाजारी पर प्रभावी रोक संभव नहीं है।रसोई गैस की कालाबाजारी अब केवल आर्थिक बोझ नहीं, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था की गंभीर चुनौती बन चुकी है। यदि समय रहते कठोर कदम नहीं उठाए गए, तो इसका सबसे बड़ा नुकसान आम नागरिकों को ही उठाना पड़ेगा। Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन मई दिवस 2026 : तय करो किस ओर हो तुम!! 100 करोड़ के ऑनलाइन सट्टा कांड में भाजपा नेता आशीष उपाध्याय गिरफ्तार, दिल्ली से झांसी पुलिस की बड़ी कार्रवाई