1. ज्योतिष के फेर में हुआ बंटाधार : विष्णु नागरविद्वानों की बात विद्वान जानें, मगर मुझे लगता है कि नरेन्द्र मोदी ने जिद करके पश्चिम बंगाल तथा तमिलनाडु के विधानसभा चुनावों के बीचों-बीच संसद का विशेष अधिवेशन बुलाने की जो गफलत की, उसके पीछे कोई बड़ी चाल नहीं रही होगी, बल्कि मूर्खता पर इनका दिनों-दिन गहरा होता विश्वास रहा होगा। मूर्खता और क्रूरता के बगैर ये चार कदम भी चल नहीं सकते! दो कदम के बाद ही हांपने लगते हैं!तो किसी ज्योतिषी को इन्होंने बुलाया होगा कि महाराज ये बताएं कि लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक के बहाने हिंदी प्रदेशों पर स्थायी कब्जा करने की जो कूट चाल हम चलना चाहते हैं, वह किस शुभ मुहूर्त में सफल होगी! सच्चा ज्योतिषी वही होता है, जो अपने मोटे- तगड़े जजमान के सामने उसके मन की बात कहे। तो उस ज्योतिषी ने तत्काल अमित शाह की उपस्थिति में मोदी जी के सामने कुछ फर्जी जोड़-बाकी-गुणा-भाग करके बताया होगा कि राजाधिराज, यह शुभ काम आप 16 से 18 अप्रैल के बीच करें, तो दुनिया की कोई ताकत आपके इस विजय अभियान को रोक नहीं पाएगी। विपक्ष आपके चरणों में शीश रख देगा और संसद में वह आपकी जय-जयकार इतनी जोर से करेगा कि एनडीए गठबंधन के दल के नेता भी देखते रह जाएंगे! यह मुहूर्त हुजूर इतना अधिक लाभकर है कि आप प्रधानमंत्री पद पर बने रहने की ऐसी अनोखी मिसाल कायम कर जाएंगे, जो दुनिया में आज तक किसी ने न की होगी। आप 2049 तक तो देश के प्रधानमंत्री रहेंगे ही रहेंगे और हुजूर, गणना तो यह भी बताती है कि आप उसके बाद भी प्रधानमंत्री बने रहेंगे। अगर आपकी इच्छा इस बीच राष्ट्रपति बनने की हुई, तो वह इच्छा भी आप जिस दिन चाहेंगे, ठीक उसी दिन पूरी हो जाएगी। आपकी जन्मकुंडली और आपके हाथ की रेखाएं बताती हैं कि आप सौ वर्ष की उम्र के बाद भी आज की तरह स्वस्थ रहेंगे और प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति पद पर रहेंगे और हुजूर योग तो इतने तगड़े हैं कि ऐसा समय भी आ सकता है कि दोनों पदों को आप ही शोभायमान करें। इस जीवन में कोई आपसे ये पद छीन नहीं सकता। आप बुरा न मानें, तो इसके आगे की भविष्यवाणी भी कर दूं कि जब भी आप इस दुनिया से स्वेच्छा से प्रयाण करने का विचार करेंगे, आप पद और उसकी कुर्सी समेत स्वर्ग की ओर प्रस्थान करेंगे। इंद्र आदि देवता आप पर वहां पुष्प वर्षा करेंगे। वहां आपके लिए रेड कार्पेट बिछेगा और देवतागण आपके इतने पीछे चलेंगे कि कैमरे में केवल आप ही आप दिखेंगे!भारत देश में चमचों का इतने बड़ा प्रेमी न इसके पहले कभी हुआ है और न इसके बाद होने की संभावना है।उसने आगा देखा, न पीछा और विशेष अधिवेशन बुला लिया। आप ही सोचिए कि न तो संसद भागी जा रही थी, न संसद सदस्य और न ये तीनों विधेयक भागे जा रहे थे और न इन्हें और अमित शाह के पद को कोई खतरा था। चुनाव के बाद अधिवेशन बुलाने से न तो अडानी का कोई आर्थिक नुक़सान होनेवाला था, न ट्रंप इस अधिवेशन को बुलाने की अनुमति देने से इंकार करता! ट्रंप से इनकी जो बातचीत पिछले दिनों चालीस मिनट तक हुई है, सूत्रों के अनुसार उसमें भी विशेष अधिवेशन का विषय आया था, तो उस भले आदमी ने उदारता दिखाते हुए कहा था कि माई डियर फ्रेंड मोडी, टुमको हम इसकी अनुमटि देता है।टुम जब चाहो, इसे बुलाने को सकटा।इसके अलावा और क्या कारण रहा होगा कि माननीय प्रधानमंत्री जी ने ऐन चुनाव के बीचों-बीच अपनी नाक कटवाई का यह शुभ आयोजन रखवाया। यह आयोजन बाद में भी तो हो सकता था! ज्योतिषी जी से अगर मोदी जी कहते कि नहीं ज्योतिषी जी महाराज, चुनाव के बाद की कोई तिथि बताइए, तो उसमें इतनी हिम्मत नहीं थी कि ‘नहीं’ कह पाता! वह फौरन पोथी पत्रा फिर से निकालता, फिर से फर्जी गुणा-भाग का खेल खेलता और दूसरी तिथि बता देता और उस तिथि को अप्रैल वाली तिथि से भी उत्तम बताता! उसके पिताजी का न पहले कुछ जा रहा था, न अब जानेवाला था, बल्कि वह तो तीसरी और चौथी तिथि भी बता देता! वह जरूर पहुंचा हुआ ज्योतिषी रहा होगा, तो नौ तिथियां अस्वीकार हो जातीं, तो दसवीं तिथि भी बता देता। दक्षिणा में वह केवल राज्यसभा की फकत एक सीट मांगता और जिला परिषद की सदस्यता पर राजी हो जाता!पिछले लगभग बारह साल से पूरे देश को झांसा देने वाला यह महापुरुष इस ज्योतिषी के झांसे में आ गया और यह कांड कर बैठा। पहली बार इतनी तगड़ी मात खा गया। बरसों तक लोग इस पर हंसेंगे।अच्छा चलो एक मिनट के लिए मान लेते हैं कि यह गड़बड़ ज्योतिषी के कारण नहीं हुई, बल्कि काफी राजनीतिक गुणा-भाग के बाद हुई। ये विधेयक अगर पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु चुनाव के बाद लाए जाते, तो भी इतनी ही आसानी से गिर जाते! जब सरकार को बारह साल से हर दिन गिरने में कोई समस्या नहीं, तो इन विधेयकों को तो केवल एक दिन में एक साथ गिरना था! इन्हें क्या दिक्कत थी?अगर ये दोनों गुजराती भाई सोच रहे थे कि ये विधेयक लाकर और ‘विपक्ष ने महिला आरक्षण विधेयक गिरा दिया’ का हल्ला मचा कर ये ममता बनर्जी या स्टालिन को हरा देंगे, तो ये बहुत ही दूर की कौड़ी ला रहे थे। स्टालिन का तो ये कुछ भी करके कुछ भी बिगाड़ नहीं सकते हैं, इतना ये पहले भी जानते थे। स्टालिन ने तो पहले ही परिसीमन के सवाल पर इनके खिलाफ युद्ध छेड़ रखा था और इनकी हवा टाइट कर दी थी। रही ममता बनर्जी, तो उन्हें किसी और तरकीब से तो हराने की सोचा जा सकता था, मगर इस मुद्दे पर उन्हें हराया नहीं जा सकता। एक तो वह खुद महिला मुख्यमंत्री हैं और दूसरे उन्होंने पहले ही महिलाओं को चुनाव में तैंतीस प्रतिशत आरक्षण दे रखा है। ममता के विरुद्ध यह हथियार कारगर नहीं होगा, इतनी अक्ल इनके पास रही होगी, यह मानना चाहिए। हां, इस बार खरीद फरोख्त ये नहीं कर पाए, इसका अफसोस इन्हें जरूर रहा होगा!तो सवाल यह है कि जल्दबाजी में ये ड्रामा करने से इन्हें क्या मिला, जिसका सेट तैयार नहीं था। प्रापर्टी पूरी नहीं थी और प्रकाश व्यवस्था में भी कमी थी! अभिनेता डायलॉग तक रट नहीं पाए थे।बात फिर ज्योतिषी पर आकर अटक जाती है।(कई पुरस्कारों से सम्मानित विष्णु नागर साहित्यकार और स्वतंत्र पत्रकार हैं। जनवादी लेखक संघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं।)**********2. बोलेंगे तो बोलोगे कि बोलते हैं! : राजेंद्र शर्माथैंक यू मोदी जी। ऐसा-वैसा नहीं, बड्डा वाला थैंक यू। आप रात आठ बजे के बाद टीवी पर प्रकट भी हुए, आधा घंटा बोले भी, पर वही विरोधियों के पाप गिनाने और उन्हें श्राप देने पर ही भाषण खत्म हो गया। सच पूछिए तो हम तो सांसें रोककर आखिर-आखिर तक इंतजार करते ही रह गए कि अब आयी नोटबंदी की घोषणा, अब आया लॉकडॉउन का एलान, पर कुछ भी नहीं आया। यूं ही विपक्ष को गरियाने में आपका बोल-बचन का सारा कोटा खाली हो गया। और तो और, आपने तो इस बार ताली-थाली बजाने या दीया-बाती करने का टॉस्क तक नहीं दिया। सच पूछिए तो पहले तो हमें यकीन ही नहीं हुआ कि रात आठ बजे के बाद आप टीवी पर प्रकट भी हो गए और फिर भी अगली सुबह से हमें न तो किसी नयी लाइन में लगना है और न शहरों से जान बचाकर गांवों की ओर भागना है। यहां हम रसोई गैस की लाइनों और रसोई गैस की किल्लत के मारे मजदूरों-वजदूरों के गांवों की ओर भागने की बात नहीं कर रहे हैं। और दिल्ली-एनसीआर में मजदूरों के आंदोलन-वांदोलन करने पर उतर आने की बात तो हम हर्गिज-हर्गिज नहीं कर रहे हैं। आप तो पहले ही कह चुके थे कि वह सब तो चंगा सी! दिक्कत देखे, सो शहरी नक्सल या पाकिस्तानी। सो बहुत-बहुत थैंक यू मोदी जी, रात आठ बजे के बाद टीवी पर आकर भी, सिर्फ चुनावी भाषण सुनाकर जान बख्शी कर देने के लिए। वर्ना जब से रात आठ बजे के बाद राष्ट्र के नाम आपके संबोधन के एलान की खबर सुनी थी, तब से दिल में कैसे-कैसे ख्याल आ रहे थे कि पूछो ही मत। खैर! हरेक कार्यकाल में एक का औसत मानें, तब भी प्रधानमंत्री के आपके चालू तीसरे कार्यकाल का नोटबंदी-लॉकडॉउन टाइप का एलान, इस पब्लिक पर उधार रहा!पर रात साढ़े आठ बजे टीवी पर आकर भी पब्लिक की इस जान-बख्शी के लिए मोदी जी का धन्यवाद करने की जगह, विपक्षी इसमें भी बाल की खाल निकालने में लगे हैं। और कुछ नहीं मिला, तो विरोध करने का यही बहाना पकड़कर बैठ गए हैं कि यह तो राष्ट्र के नाम प्रधानमंत्री का संबोधन था ही नहीं। माना टीवी पर प्रधानमंत्री की ही तस्वीर थी और विपक्ष के खिलाफ जो भी बक-झक की, प्रधानमंत्री ने ही की थी। लेकिन, यह राष्ट्र के नाम संबोधन तो था ही नहीं। यह तो एक और चुनावी भाषण था और वह भी ऐन चुनावी सीजन में। भाषण भी प्रधानमंत्री का नहीं, आरएसएस के स्वयंसेवक का था, जो प्रधानमंत्री का भेष धरकर टीवी पर आया था। यह तो विपक्ष के खिलाफ प्रचार के लिए, सरकारी पद से लेकर सरकारी टीवी तक के दुरुपयोग का मामला था। यानी विपक्षी, पब्लिक की जान बख्शी को ही मोदी जी का जुर्म बनाने की कोशिश कर रहे हैं। उसके ऊपर से इसे चुनावी आचार संहिता का उल्लंघन बताकर, इसके खिलाफ चुनाव आयोग से कार्रवाई की मांग और कर रहे हैं। शुक्र है कि मोदी जी ने ज्ञानेश कुमार के जरिए चुनाव आयोग की ऐसी सैटिंग की है कि उनका और उनकी पार्टी का नाम आते ही, आयोग बापू के तीन बंदरों का पक्का अनुयाई बन जाता है — न कुछ गलत देखता है, न कुछ गलत सुनता है और गलत के बारे में कुछ बोलने का तो खैर सवाल ही नहीं उठता है। वर्ना आदर्श आचार संहिता के चक्कर में मोदी जी का राष्ट्र के नाम तो क्या, चुनावी सभाओं में संबोधन भी मुश्किल हो जाता!और मोदी जी ने साढ़े आठ बजे टीवी पर आकर जो बोला, उसको भी तो देखिए! नारी शक्ति की उड़ान रोकने का विपक्ष ने जो पाप किया है, उसका क्या? महिला आरक्षण की भ्रूण हत्या का पाप! हमें पता है कि विपक्ष वाले इसमें भी कोई न कोई टेक्निकल पेंच डालकर, इस पाप का दोष भी उल्टे मोदी जी पर ही डालने की कोशिश करेंगे। बल्कि उन्होंने तो कहना भी शुरू कर दिया है कि लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई सीटों के आरक्षण का कानून तो 2023 में ही बन चुका था और करीब-करीब एक राय से बन चुका था। बल्कि उसी समय विपक्ष ने, इस आरक्षण को तुरंत लागू कराने की मांग भी की थी और इसके लिए, इस आरक्षण के लागू होने से पहले 2026 के बाद की जनगणना और उसके बाद परिसीमन के पूरे होने की शर्त जोड़े जाने का विरोध किया था। विपक्ष की मानी जाती तो, 2024 के आम चुनाव से ही एक-तिहाई महिला आरक्षण लागू हो सकता था। पर तब मोदी जी-शाह जी की जोड़ी राजी नहीं हुई। अब तीन साल बाद उनको इस कानून की याद आयी है और नारी वंदन अधिनियम के लागू होने में देरी के नाम पर आंसू बहा रहे हैं!एक सेकुलरवादी लेखिका ने तो मोदी जी के मामले में यह जानते हुए बॉयोलॉजी घुसा दी कि मोदी जी ठहरे नॉन-बायोलॉजीकल। कह रही हैं कि तीन साल पहले जो बच्चा पैदा हो चुका था, उसकी तीन साल बाद भ्रूण हत्या कैसे हो सकती है? जैसे उन्हें पता ही नहीं हो कि मोदी-शाह की पार्टी के पास वाशिंग मशीन ही नहीं है, डीप फ्रीजर भी है। जो अधिनियम 2023 में संसद के दोनों सदनों में लगभग एक राय से पास हुआ था, उसे मोदी-शाह की सरकार ने उसी डीप फ्रीजर में सुरक्षित रखा हुआ था और संसद में इस विशेष चर्चा के दौरान ही लागू करने के एलान के लिए बाहर निकाला था। तीन साल का हो गया तो क्या हुआ, डीप फ्रीजर में रहने से वह रहा तो भ्रूण का भ्रूण ही या ज्यादा तकनीकी ही होना है, तो नवजात कह लो। मोदी जी की नजरों में और करोड़ों माताओं-बहनों की नजरों में तो यह भ्रूण हत्या ही है।अब प्लीज कोई ये मत कहना कि अगर मोदी जी को नारी वंदन की इतनी ही चिंता है, तो मोदी जी तब क्यों नहीं बोले, जब उनकी डबल इंजन सरकार के आशीर्वाद से बिलकीस बानो के दोषियों को माफी दिलाने के बाद, फूल मालाएं पहनाकर गुजरात के विधानसभा चुनाव के दौरान स्वागत किया गया। या जब उनके अपने चुनाव क्षेत्र, वाराणसी में विश्वविद्यालय की छात्रा के भाजपायी-संघी बलात्कारियों का जमानत पर छूटने पर स्वागत किया गया? या हाथरस की बच्ची के मामले में। या सेंगर के मामले में। या महिला पहलवानों के मामले में। या राम-रहीम को बार-बार जेल से छोड़े जाने पर। या आसाराम की जमानत पर जमानत पर। या एप्सटीन फाइल पर। या जसोदा बेन के अधिकारों पर। सिंपल है, पहले नहीं बोलने से क्या हुआ? मोदी अब तो बोल रहे हैं। नारी शक्ति की उड़ान के लिए दरवाजे तोड़ रहे हैं! तमिलनाडु और बंगाल की माताएं और बहनें, मोदी जी की पहले की चुप्पी याद रखेंगी या अब उनके बोलने पर वोट देंगी? *(लेखक वरिष्ठ पत्रकार और ‘लोक लहर’ के संपादक हैं।)* View this post on Instagram Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन जिलाबदर बदमाश जुनैद पर पुलिस का शिकंजा, चाकू सहित दबोचा राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने BJP पर साधा निशाना, RSS प्रमुख को लिखा पत्र