नई दिल्ली | 18 अप्रैल 2026 | संविधान (एक सौ इकतीसवां संशोधन) विधेयक, 2026 लोकसभा में पारित नहीं हो सका। आवश्यक दो-तिहाई बहुमत नहीं मिलने के कारण विधेयक गिर गया, जिसके बाद संसद से लेकर सियासी गलियारों तक बहस तेज हो गई है। कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने विधेयक के गिरने को “लोकतंत्र की बड़ी जीत” करार दिया। उन्होंने कहा कि “यह महिला आरक्षण का नहीं, बल्कि लोकतंत्र की रक्षा का मुद्दा था। हम महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ने के पक्ष में नहीं थे, इसलिए यह बिल पास होना संभव नहीं था।”उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर उसकी नीयत पर भी सवाल उठाए। वहीं नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया के जरिए प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “संशोधन विधेयक गिर गया। महिलाओं के नाम पर संविधान को बदलने की कोशिश की गई, जिसे देश ने देख लिया और विपक्ष ने रोक दिया।” उन्होंने 2023 के मूल महिला आरक्षण कानून को तुरंत लागू करने की मांग दोहराई। View this post on Instagram क्या है मामला?2023 में पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया था। हालांकि, इसे लागू करने के लिए जनगणना और परिसीमन प्रक्रिया पूरी होना आवश्यक है।सरकार द्वारा लाया गया 2026 का संशोधन विधेयक इसी परिसीमन प्रक्रिया से जोड़कर आरक्षण लागू करने का प्रयास था। विपक्षी दलों ने इसका विरोध करते हुए आरोप लगाया कि इससे कुछ राज्यों को अनुचित लाभ मिल सकता है और संसद में प्रतिनिधित्व का संतुलन बिगड़ सकता है।विधेयक के गिरने के बाद संसद में तीखी नोक झोंक देखने को मिली। सरकार जहां इसे महिला सशक्तिकरण से जोड़कर देख रही है, वहीं विपक्ष इसे संवैधानिक ढांचे पर असर डालने वाला कदम बता रहा है।राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह घटना केंद्र सरकार के लिए एक बड़ा झटका मानी जा रही है। अब नजर इस बात पर है कि सरकार इस मुद्दे पर आगे क्या रणनीति अपनाती है। View this post on Instagram Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading... Related पोस्ट नेविगेशन उज्जैन में देर रात बदमाशों का आतंक: कार-बाइक में तोड़फोड़, पुलिस ने निकाला जुलूस सिंगरौली बैंक डकैती: आरोपियों की आंशिक पहचान, पुलिस ने जनता से मांगी मदद