नई दिल्ली/इंदौर , प्रदीप चौधरी:Supreme Court of India ने मार्च 2026 में एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि “वंदे मातरम” गाना किसी भी आधिकारिक कार्यक्रम या स्कूलों में अनिवार्य नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि राष्ट्रीय गीत का सम्मान जरूरी है, लेकिन इसके गायन को बाध्य करना नागरिकों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता के विरुद्ध होगा।कोर्ट ने इस संबंध में दायर याचिकाओं को खारिज करते हुए उन्हें ‘प्री-मैच्योर’ (समय से पहले) करार दिया। अदालत का कहना था कि इस तरह के मुद्दों पर अनावश्यक न्यायिक हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है, क्योंकि यह विषय व्यक्तिगत इच्छा और संवैधानिक स्वतंत्रता से जुड़ा हुआ है।अदालत ने अपने रुख में साफ किया कि “वंदे मातरम” भारत का राष्ट्रीय गीत है और इसका सम्मान हर नागरिक का कर्तव्य है, लेकिन इसे गाने के लिए किसी को मजबूर नहीं किया जा सकता। यह पूरी तरह से स्वैच्छिक है और व्यक्ति की पसंद पर निर्भर करता है।हाल ही में Indore Municipal Corporation की बैठक में “वंदे मातरम” को लेकर पार्षदों के बीच विवाद और हंगामे के बाद यह मुद्दा चर्चा में आया था। इस घटनाक्रम ने राष्ट्रीय स्तर पर बहस को जन्म दिया, जिसके बीच सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी अहम मानी जा रही है।कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और व्यक्तिगत अधिकारों की रक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है। वहीं, इस निर्णय के बाद सरकारी संस्थानों में “वंदे मातरम” के अनिवार्य गायन को लेकर चल रही बहस पर विराम लगने की उम्मीद है। View this post on Instagram Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन 2014 से 2026 तक महंगाई, रोजगार और आम आदमी की जेब: आंकड़ों में पूरी तस्वीर तेज आवाज वाली बुलेट पर पुलिस की कार्रवाई, चालान कर सायलेंसर निकाला