भोपाल/इंदौर/उज्जैन/रीवा।नशे के बढ़ते दायरे को रोकने के लिए शुरू हुई मुहिम अब एक व्यापक अभियान का रूप ले चुकी है। मध्य प्रदेश के जिलों से शुरू हुई यह पहल अब पूरे प्रदेश में सक्रिय है और अन्य राज्यों में भी असर दिखा रही है। पुलिस और प्रशासन जागरूकता से लेकर सख्त कार्रवाई तक लगातार मोर्चा संभाले हुए हैं।मध्य प्रदेश में भोपाल, इंदौर, उज्जैन और रीवा जैसे जिलों में पुलिस द्वारा लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं। स्कूल-कॉलेजों में नशा मुक्ति जागरूकता कार्यक्रम, रैलियां और विशेष अभियान संचालित किए जा रहे हैं, वहीं अवैध मादक पदार्थों के खिलाफ सख्त कार्रवाई भी जारी है।आंकड़े बताते हैं सख्ती का असरपुलिस विभाग के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025-26 में प्रदेशभर में नशे से जुड़े करीब 18,000 से अधिक मामले दर्ज किए गए, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 20-25% अधिक कार्रवाई को दर्शाते हैं। इस दौरान 22,000 से अधिक आरोपियों की गिरफ्तारी की गई है।इसके अलावा पुलिस ने कार्रवाई करते हुए बड़ी मात्रा में मादक पदार्थ जब्त किए हैं, जिनमें लगभग:1,200 किलो गांजा250 किलो अफीम/डोडा चूरा50 किलो स्मैक/हेरोइन10 लाख से अधिक नशीली गोलियां/इंजेक्शनजप्त किए गए इन मादक पदार्थों की अनुमानित बाजार कीमत 50 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है।अन्य राज्यों में भी तेज हुई कार्रवाईयह मुहिम अब मध्य प्रदेश से बाहर निकलकर अन्य राज्यों तक पहुंच चुकी है। राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले में भी पुलिस द्वारा बड़े स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है, जहां नशे के खिलाफ लगातार छापेमारी और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।जागरूकता के साथ जड़ पर प्रहारपुलिस का कहना है कि केवल कार्रवाई ही नहीं, बल्कि नशे की जड़ तक पहुंचकर उसे खत्म करना इस अभियान का मुख्य उद्देश्य है। इसके लिए स्कूलों, कॉलेजों और ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं, ताकि युवाओं को नशे से दूर रखा जा सके।विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की मुहिम देश के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए बेहद जरूरी है। यदि प्रशासन की सख्ती और समाज का सहयोग इसी तरह बना रहा, तो आने वाले समय में नशे के खिलाफ यह लड़ाई और मजबूत होगी। View this post on Instagram Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading... Related पोस्ट नेविगेशन सत्य को बयां करने के रास्ते की मुश्किलें : समाज को रोशनी की सख्त जरूरत है! शीर्षक: समस्या नहीं, इच्छाशक्ति की कमी—प्रशासन चाहे तो हर मुश्किल का समाधान संभव है.