यह मामला राजस्थान के डीग जिले (या भरतपुर जिले के कुम्हेर क्षेत्र) का है। एक सरकारी अस्पताल से हाल ही में डिस्चार्ज हुई बुजुर्ग महिला को व्हीलचेयर न मिलने पर उनके पति ने साइकिल पर बैठाकर घर ले जाने का वीडियो वायरल हो रहा है।जब सरकारें “आयुष्मान भारत”, “मुफ्त इलाज” और “विश्व स्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं” के बड़े-बड़े नारे लगाती रहती हैं, तब आम जनता को अपनी बीमारी और दर्द के साथ-साथ सरकारी लापरवाही का भी इलाज खुद ढूंढना पड़ता है। राजस्थान के एक सरकारी अस्पताल में ठीक यही हुआ। एक बुजुर्ग महिला का इलाज पूरा होने के बाद डिस्चार्ज का समय आया। लेकिन अस्पताल में व्हीलचेयर कहाँ? एंबुलेंस? स्ट्रेचर? स्टाफ? सब गायब! चिंता मत कीजिए, पति जी तैयार थे। उन्होंने अपनी साइकिल सीधे वार्ड के अंदर घुसा दी, पत्नी को पीछे बिठाया और धीरे-धीरे घर की ओर रवाना हो गए। वीडियो में देखिए — महिला कमजोर हालत में साड़ी में साइकिल पर बैठी है, पति साइकिल चलाते हुए आगे बढ़ रहे हैं। प्यार तो है, लेकिन मजबूरी का ये रूप देखकर दिल पिघलने की बजाय गुस्सा आता है। सरकारों को जब सरोकार ना बचे, तो मजबूर जनता ऐसे ही अपनी मुश्किलों के हल खोज पाती है! लाखों-करोड़ों का हेल्थ बजट, हॉस्पिटलों में फीते काटने वाले नेता, और प्रेस कॉन्फ्रेंस में “सब कुछ मुफ्त” का दावा — सब कुछ ठीक है। बस मरीज को घर ले जाने के लिए साइकिल काफी है। ये वीडियो न सिर्फ एक जोड़े की मजबूरी और लगन दिखाता है, बल्कि पूरे सिस्टम की हकीकत भी उजागर करता है। जहां गरीब और बुजुर्ग मरीज को बिस्तर से उठकर साइकिल पर चढ़ना पड़ता है, वहां “सबका साथ, सबका विकास” का नारा कितना खोखला लगता है। अब इंतजार है — कोई नेता इस पर “भावुक” होने आएगा, कोई “जांच” का वादा करेगा, और फिर सब शांत। जनता meanwhile अपनी साइकिल सुधारती रहेगी। 🚲🏥 View this post on Instagram Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन 5 साल तक पाकिस्तानी जासूस को पनाह देने का मामला, नूंह के 3 युवक हिरासत में जहरीला पदार्थ पीकर युवक ने समाप्त की जीवन लीला, 3 पेज का नोट मिला