अमेरिका/भारत — अमेरिकी आयोग यूएस कमिशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम (USCIRF) ने अपनी 2026 एनुअल रिपोर्ट में भारत की धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति पर गंभीर चिंता जताई है। रिपोर्ट में ट्रंप प्रशासन को सिफारिश की गई है कि भारत को “कंट्री ऑफ पार्टिकुलर कंसर्न” (CPC) घोषित किया जाए, क्योंकि 2025 में धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ व्यवस्थित उल्लंघन जारी रहे। रिपोर्ट में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) जैसे संगठनों पर “टारगेटेड सैंक्शंस” लगाने की मांग की गई है। इसमें एसेट फ्रीज (संपत्ति जब्त करना) और अमेरिका में एंट्री बैन शामिल है। USCIRF का आरोप है कि RSS ने धार्मिक स्वतंत्रता के “गंभीर उल्लंघनों” को सहन किया और जिम्मेदारी ली। साथ ही, अमेरिका को भारत को हथियार बिक्री रोकने, सुरक्षा सहायता और व्यापार नीतियों को धार्मिक स्वतंत्रता में सुधार से जोड़ने की सलाह दी गई है। कांग्रेस ने भी इस रिपोर्ट का हवाला देकर RSS पर बैन की मांग की है, जबकि भारतीय सरकार और MEA ने ऐसी रिपोर्टों को पहले पक्षपाती (biased) बताकर खारिज किया है। अभी तक ट्रंप प्रशासन या स्टेट डिपार्टमेंट ने इस पर कोई आधिकारिक कार्रवाई नहीं की है। क्या सच है? USCIRF ने वाकई 2026 एनुअल रिपोर्ट (मार्च 2026 में जारी) में भारत को CPC बनाने की सिफारिश की है — यह लगातार सातवीं बार है। RSS और RAW पर स्पष्ट रूप से टारगेटेड सैंक्शंस (एसेट फ्रीज और एंट्री बैन) की सिफारिश की गई है, क्योंकि वे “severe violations of religious freedom” के लिए जिम्मेदार बताए गए हैं। रिपोर्ट में ट्रंप प्रशासन को ये सिफारिशें भेजी गई हैं (USCIRF स्वतंत्र बॉडी है जो प्रेसिडेंट, सेक्रेटरी ऑफ स्टेट और कांग्रेस को सलाह देती है)। अन्य सिफारिशें: हथियार बिक्री रोकना (Arms Export Control Act के तहत), Transnational Repression Reporting Act 2024 को पास करना, और भारत में USCIRF को एक्सेस देने का दबाव। रिपोर्ट USCIRF की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है और कई मीडिया आउटलेट्स (जैसे Scroll, Hindustan Times, Business Today) ने इसकी पुष्टि की है। क्या झूठ या अतिशयोक्ति है? “ट्रम्प प्रशासन से RSS को बैन करने की सिफारिश” — यह पूरी तरह सही नहीं। USCIRF ने RSS पर “टारगेटेड सैंक्शंस” (जैसे एसेट फ्रीज और एंट्री बैन) की बात की है, न कि पूर्ण “बैन” (ban) की। कुछ सोशल मीडिया पोस्ट और राजनीतिक बयानों में इसे “बैन” कहकर बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया है। USCIRF के पास खुद बैन लगाने का अधिकार नहीं; यह सिर्फ सिफारिश है। ट्रंप प्रशासन ने अभी कोई फैसला नहीं लिया है। पहले वर्षों में USCIRF की CPC सिफारिशों को भारत के लिए लागू नहीं किया गया था। रिपोर्ट “RSS ban” नहीं कहती, बल्कि “targeted sanctions on individuals and entities such as … RSS” कहती है। कुछ खबरों में “RAW ban” भी जोड़ा गया, लेकिन रिपोर्ट में RAW को भी इसी संदर्भ में शामिल किया गया है। यह रिपोर्ट धार्मिक स्वतंत्रता पर USCIRF की लगातार चिंता दर्शाती है, लेकिन यह बाइंडिंग नहीं है और अक्सर राजनीतिक बहस का विषय बन जाती है। भारत सरकार ने ऐसी रिपोर्टों को पक्षपाती (“biased”) बताकर खारिज करने की परंपरा रही है। View this post on Instagram View this post on Instagram Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन पुनर्वास का केरल मॉडल हिमाचल में कुदरत का खूबसूरत मंजर पर्यटकों के लिए बड़ी मुसीबत बन गया!