अदानी समझौतों पर बहस में बिगड़ा माहौल, स्पीकर नरेंद्र सिंह तोमर को याद आए पटवा जी; सियासी गलियारों में फिर शुरू हुईं चर्चाएं भोपाल (म.प्र.): हमेशा सुर्खियों में रहने वाले कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गए। विधानसभा के बजट सत्र के चौथे दिन तीखी बहस के दौरान उन्होंने नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार से कह डाला- “औकात में रहो…”। इस बयान पर सदन में हंगामा मच गया और विपक्ष विजयवर्गीय पर बरस पड़ा। बाद में मामला संभालते हुए विजयवर्गीय ने दुख जताया और कहा कि “मेरे सब्र का बांध अब टूट चुका है…”। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को आगे आकर माफी मांगनी पड़ी, जबकि स्पीकर नरेंद्र सिंह तोमर ने पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा की बात याद कर असहज स्थिति पर अफसोस जताया। View this post on Instagram बहस की शुरुआत और हंगामाविवाद की जड़ अदानी समूह और राज्य सरकार के बीच हुए समझौतों को लेकर थी। उमंग सिंघार ने आरोप लगाते हुए कहा कि उनके पास दस्तावेज हैं और वे सदन में पेश कर देंगे। विजयवर्गीय ने प्रमाण पेश करने की चुनौती दी, लेकिन बात बिगड़ गई। गुस्से में विजयवर्गीय ने सिंघार से “औकात में रहो” कह दिया। विपक्ष ने इसे असंसदीय बताते हुए जोरदार विरोध किया। विजयवर्गीय का खेद और सफाईमामला बिगड़ता देख विजयवर्गीय ने सफाई दी। उन्होंने कहा, “आज मैं अपने आप से ही संतुष्ट नहीं हूं… मेरे सब्र का बांध भी टूट चुका है… हम इस विधानसभा में पांच-दस सदस्य होंगे जो वरिष्ठ होंगे, लेकिन आज का दुख है… मुझे पहली बार सदन में गुस्सा आया है… आज पता नहीं कैसे यह हो गया… उमंग की बॉडी लैंग्वेज सही नहीं थी, लेकिन उन्होंने ऐसा किया कि मुझे गुस्सा आ गया…”। मुख्यमंत्री की माफी और सिंघार का जवाबमुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सदन की गरिमा बनाए रखने के लिए आगे आकर कहा, “मैं सभी की तरफ से माफी मांगता हूं…”। इस पर उमंग सिंघार के सुर नरम पड़े और उन्होंने कहा, “हम आपके साथ हैं… विकास के लिए हम हमेशा तत्पर रहेंगे…”। स्पीकर की टिप्पणीविधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने स्थिति पर अफसोस जताते हुए कहा, “आज दुर्भाग्य से असहज स्थिति बन गई… दोनों पक्षों ने सदा अच्छा प्रदर्शन किया है, लेकिन आज मुझे पटवा जी की वो बात याद आती है कि गुस्सा दिखे, लेकिन गुस्सा शब्दों में दिखाई ना दे…”। सियासी चर्चाएं तेजइस घटना से इंदौर सहित पूरे मध्य प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई। विजयवर्गीय के “सब्र का बांध टूटना”, मुख्यमंत्री की माफी और स्पीकर की पटवा जी वाली बात ने सियासी बहस को हवा दे दी। दबे स्वरों में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर विजयवर्गीय के मन में ऐसी कौन-सी कसक है, जो बार-बार शब्दों के जरिए उभर रही है? यह घटना भाजपा के अंदरूनी कलह की ओर भी इशारा कर रही है। View this post on Instagram Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन रतलाम हत्याकांड में सनसनीखेज़ फैसला: पत्नी का गला घोंटकर कत्ल करने वाले पति को उम्रकैद, गूगल सर्च हिस्ट्री बनी ‘खतरनाक’ सबूत! रिश्वतकांड में बड़ा फैसला: जावरा नगरपालिका की पूर्व सीएमओ नीता जैन को 4 साल की सश्रम कारावास, लिपिक विजय सिंह शक्तावत भी दोषी