नई दिल्ली | देश की सर्वोच्च अदालत ने आज ‘रेवड़ी संस्कृति’ या मुफ्त सुविधाओं के बढ़ते चलन पर अब तक की सबसे सख्त टिप्पणी की है। तमिलनाडु पावर डिस्ट्रिब्यूशन कॉर्पोरेशन की याचिका पर सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने राजनीतिक दलों को करारा संदेश दिया कि चुनावी वादों में मुफ्त बिजली, खाना, साइकिल जैसी घोषणाएं आर्थिक विकास और कार्य-संस्कृति दोनों को कमजोर कर रही हैं।कोर्ट की मुख्य टिप्पणियां जो सुर्खियां बनीं – “अगर सुबह से शाम तक मुफ्त खाना, फिर मुफ्त साइकिल, फिर मुफ्त बिजली मिलती रहेगी, तो लोग काम क्यों करेंगे? कार्य-संस्कृति (Work Culture) का क्या होगा?” – “हम किस तरह की संस्कृति विकसित कर रहे हैं? सक्षम और असमर्थ में फर्क किए बिना सबको मुफ्त देना तुष्टिकरण की नीति नहीं तो क्या है?” – “राज्य घाटे में चल रहे हैं, फिर भी विकास छोड़कर फ्रीबीज बांट रहे हैं। राज्य कोई चैरिटी हाउस नहीं, वित्तीय अनुशासन जरूरी है।”तीन बड़े खतरे जो कोर्ट ने गिनाए 1. राजकोषीय संकट: कई राज्य कमाई से ज्यादा खर्च मुफ्त योजनाओं पर कर रहे हैं, जिससे कर्ज बढ़ रहा है और आने वाली पीढ़ियां बोझ उठाएंगी। 2. विकास पर रोक: बजट का बड़ा हिस्सा मुफ्त सुविधाओं में चला जाता है, तो अस्पताल, स्कूल, सड़कें और बुनियादी ढांचे के लिए फंड नहीं बचता। 3. टैक्सपेयर्स की अनदेखी: मध्यम वर्ग के टैक्स से वोट बैंक साधना लोकतंत्र के मूल्यों से खिलवाड़ है।कोर्ट ने साफ कहा कि कल्याणकारी राज्य में गरीबों की मदद जायज है, लेकिन बिना भेदभाव के सबको मुफ्त देना शॉर्टकट है, प्रगति का रास्ता नहीं। राज्यों को रोजगार के अवसर पैदा करने चाहिए, न कि लोगों को निर्भर बनाना चाहिए।यह टिप्पणी राजनीतिक हलकों में हलचल मचा रही है, क्योंकि कई राज्य चुनावों में ‘फ्री बिजली’, ‘मुफ्त यात्रा’ जैसी घोषणाएं कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट का यह ‘वेक-अप कॉल’ ‘रेवड़ी’ vs ‘रोजगार’ की बहस को नई दिशा देगा। क्या अब राजनीतिक दल विकास पर फोकस करेंगे या खैरात की राजनीति जारी रहेगी? समय बताएगा। View this post on Instagram Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन सोशल मीडिया पर बच्चा चोरी गैंग की अफवाह: मर्दानी 3 प्रमोशन से जुड़ी भ्रामक खबरें, मध्य प्रदेश में कोई सक्रिय गैंग नहीं शेयर बाजार में हाहाकार मचा: सेंसेक्स 1236 अंक लुढ़का, निवेशकों के 6.7 लाख करोड़ डूबे!