1. बढ़ता ब्याज बोझ: कर्ज का ब्याज चुकाने में सरकार की आय का बड़ा हिस्सा लग सकता है, जिससे विकास कार्यों के लिए कम पैसा बचता है।2. क्रेडिट रेटिंग में गिरावट: अगर सरकार कर्ज चुकाने में असमर्थ होती है, तो क्रेडिट रेटिंग गिर सकती है, जिससे भविष्य में कर्ज लेना महंगा हो जाएगा।3.विकास कार्यों में कमी: कर्ज चुकाने के लिए सरकार को विकास कार्यों में कटौती करनी पड़ सकती है, जिससे राज्य की प्रगति प्रभावित हो सकती है।4. आर्थिक अस्थिरता: ज्यादा कर्ज से आर्थिक अस्थिरता बढ़ सकती है, जिससे निवेश और रोजगार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।5. निवेशकों का भरोसा कम होना: अगर सरकार कर्ज को संभाल नहीं पाती, तो निवेशक राज्य में निवेश करने से हिचक सकते हैं। View this post on Instagram Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन ‘इच्छाधारी नागिन’ का खुलासा! युवती ने प्रेमी संग शादी के लिए रचा ड्रामा, बिस्तर पर केंचुल रखकर खुद को बताया था नागिन लोकसभा में लापता महिलाओं और बच्चों को लेकर सांसद श्रीमती भारती पारधी ने उठाया सवाल तारांकित प्रश्न का महिला एवं बाल विकास मंत्री ने दिया विस्तृत उत्तर