बालाघाट। यह बयान हिन्दु सम्मेलन के बाद गांव में दिया गया। जिसका वीडियो, अब सामने आया है। दरअसल, बीते जनवरी में लांजी थाना क्षेत्र के घोटी नंदोरा में हुए हिंदू सम्मेलन के समापन के बाद, सम्मेलन में मुस्लिम विरोधी दिए गए बयान को लेकर मुस्लिम समाज के लोगों ने आपत्ति ली थी। जिसके बाद मुस्मि समाज के 10 परिवारों के बहिष्कार का मामला गर्माने लगा है। जिससे गांव का माहौल तनावपूर्ण है, गलियां सुनी पड़ी हैं। मुस्लिम समाज के बहिष्कार के बाद जहां बस चालक आसिफ हुसैन को स्कूल बस चलने से बंद करा दिया गया है वहीं, इलेक्ट्रिशियन सादिक हुसैन पिछले 7 दिनों से बेरोजगार है इनको काम नहीं दिया जा रहा है। जिससे इन्हें लॉक डाउन जैसा महसूस हो रहा है। मुस्लिम परिवारों को बहिष्कार किए जाने के मामले में पूर्व विधायक किशोर समरिते ने आपत्ति ली है। साथ ही उन्होंने घोटी-नंदोरा में 10 मुस्लिम परिवारों के कथित सामाजिक बहिष्कार के मामले को गंभीर बताते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय से जांच कराने और दोनों गांवों में पुलिस फ्लैग मार्च कराने की मांग की है। श्री समरीते ने अपने जारी बयान में कहा कि ग्राम घोटी और नंदोरा विगत दो वर्षों से गौहत्या और गोमांस से जुड़े मामलों को लेकर चर्चा में रहे हैं, लेकिन वर्तमान में यहां 10 मुस्लिम परिवारों के सामाजिक बहिष्कार का मामला सामने आना अत्यंत चिंताजनक है। उन्होंने आरोप लगाया कि इतनी गंभीर घटना के बावजूद थाना लांजी, पुलिस मुख्यालय और राज्य स्तर के अधिकारी मामले को दबाने का प्रयास कर रहे हैं, जबकि खुफिया एजेंसियां भी इस पर मौन साधे हुए हैं। पूर्व विधायक ने कहा कि गांवों में कथित रूप से मुस्लिम समुदाय के लोगों को किराने का सामान देने से मना किया जा रहा है, नाई द्वारा दाढ़ी या बाल कटवाने से इनकार किया जा रहा है और कोटवार के माध्यम से गांव में मुनादी कर सामाजिक बहिष्कार की घोषणा कराई गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि गांव के सरपंच, सचिव, जनपद सदस्य और जिला पंचायत सदस्य भी इस बहिष्कार के समर्थन में खड़े नजर आ रहे हैं। समरीते ने यह भी आरोप लगाया कि गांव के मंदिरों और चौराहों पर धार्मिक झंडे लगाकर हेट स्पीच दी जा रही है। जिससे गांव का सामाजिक माहौल तनावपूर्ण होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि बहिष्कृत परिवारों के छोटे बच्चे स्कूल जाने से डर रहे हैं और महिलाएं भय के वातावरण में जीवन जीने को मजबूर हैं। पूर्व विधायक ने पूरे मामले की न्यायिक जांच कराने, बहिष्कृत परिवारों को संविधान द्वारा प्रदत्त नागरिक अधिकार तत्काल बहाल कराने तथा दंगा भड़काने वाले असामाजिक तत्वों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने समय रहते निष्पक्ष और सख्त कदम नहीं उठाए, तो यह मामला कानून-व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।महिला खैरून निशा ने बताया कि उस दिन, पहली बार मुस्लिम समाज को लेकर दिए गए वक्तव्य को लेकर हम, चर्चा करने गए थे। आज तक गांव का माहौल कभी ऐसा नहीं रहा। हम साथ मिलकर, रहे है लेकिन उस घटना के बाद, हमारा बहिष्कार कर दिए जाने से परेशानी हो रही है। जबकि दूसरी ओर हिन्दु सम्मेलन में कथित तौर से मुस्लिम समुदाय के विरोध में खड़े होने से मुस्लिम समाज के बहिष्कार करने वाले नेतराम तिड़के ने बहिष्कार की बात से किनारा करते हुए बताया कि गांव में किसी मुस्लिम समाज के लोगों का बहिष्कार नहीं किया गया। इस मामले में स्थानीय प्रशासन से चर्चा करने का प्रयास किया गया लेकिन चर्चा नहीं हो सकी। View this post on Instagram Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन सिरोंज विधायक उमाकांत शर्मा ने रात 2:30 बजे थाने का औचक निरीक्षण किया, पाया- पूरा थाना सो रहा था! सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा में मुस्लिम मौलवी पर हमले के मामले में पुलिस को लगाई फटकार