इंदौर/ सभी परमेश्वर के स्वरूप है, अत: उपकार नही, सेवा करना हमारा धर्म है। हमारे यहाँ चैरिटी नही, अपितु सेवा है। जीवन में सेवा के जो भी अवसर मिलें, सेवा करना चाहिए। सेवा से हमारी शुद्धि होती हैं। जिसके पास जो हो, वो देना चाहिए। उक्त विचार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूजनीय सरसंघचालक डॉ श्री मोहनजी भागवत ने कसरावद के लेपा स्थित श्री रामकृष्ण विश्व सद्भावना निकेतन में आयोजित विचार प्रेरक-कार्यक्रम में व्यक्त किए।। पूजनीय सर संघचालकजी ने अपने उद्बोधन कहा कि मनुष्य देखकर ही सीखता है, सुनकर या बोलकर नही। भारत की यात्रा में यह सत्य सिद्ध हुआ कि सुख बाहर नही, अपितु मनुष्य के अंदर ही है। भारत में मनुष्य के अंदर की खोज की यात्रा प्रारंभ हुई। मनुष्य के अंदर की यात्रा से हमें शाश्वत सुख प्राप्त होता है। हमारे पूर्वजों ने अनुभव के आधार पर बताया कि माया का आधार अध्यात्म ही होना चाहिe। ईश्वर ने मनुष्य को संवेदना दी है। मनुष्य की संवेदना दूसरे के सुख-दु:ख को जानती है। किसी की उपेक्षा करके सुख भोगना, मनुष्य की संवेदना में नहीं है। जीवन मूल्यों के लिए जीवन में शिक्षा और शुचिता का आवश्यक है। मनुष्य को शिक्षा इसीलिए चाहिए कि मुझे स्वयं का दुख दूर तो करना ही है, किन्तु समाज और देश का भी दुख दूर करना है, यह स्वभाव भारत का स्वभाव है। ऐसा धर्म जब हमने दुनिया को दिया, तब भारत बना। परतंत्रता में भी हमारा स्वाभाव नहीं बदला। भारतीय संदर्भों में शिक्षा के बारे में आपने कहा कि जन्मांतर का ज्ञान मनुष्य के मस्तिष्क में है, इसीलिए जो ज्ञान अंदर है, उसे बाहर निकालना चाहिए । टंट्या मामा और गाडगे महाराज जैसे महापुरुषों में कोई औपचारिक शिक्षा ली थी, किंतु आज भी उनका सम्मान है। हमारे अंदर दैवीय गुण निहित है, उन्हें बाहर निकालना होगा उसका ज्ञान प्राप्त करना होगा। मनुष्य को विश्व मानवता का ज्ञान दिलाने वाली शिक्षा, आत्मनिर्भर बनाने वाली शिक्षा, श्रम की प्रतिष्ठा वाली शिक्षा ही वास्तविक शिक्षा है। व्यक्ति की बजाय कर्म की मान्यता और परिणाम की बजाय प्रामाणिक और उत्कृष्ट कार्य करना, भारत का स्वभाव है। भारत का अर्थ केवल भूगोल नही, अपितु स्वभाव है। भारत की उन्नति का मतलब जल, जंगल, नदी, पहाड़, जानवर और मनुष्य सभी की उन्नति है। निमाड़ अभ्युदय रूरल मैनेजमेंट एंड डेवलेपमेंट एसोसिएशन एवं श्री रामकृष्ण विश्व सद्भावना निकेतन द्वारा आयोजित विचार-प्रेरक में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूजनीय सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत का ‘मनुष्य निर्माण से राष्ट्र निर्माण’ विषय पर उद्बोधन हुआ। कार्यक्रम में गोष्ट-नर्मदालयाची ऑडियो बुक का विमोचन भी हुआ। यह संस्थान पिछले 15 वर्षों से शिक्षा एवं कौशल विकास के क्षेत्र में कार्यरत है। श्री रामकृष्ण विश्व सद्भावना निकेतन में प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव 17-20 जनवरी को संपन्न हुआ, तत्पश्चात निकेतन और प्रकल्प के दर्शनार्थ पूजनीय सर संघचालकजी का प्रवास लेपा में हो रहा है। संस्थान वनवासी क्षेत्रों के कुपोषित बच्चों को शिक्षा एवं कौशल विकास के कार्य करती है। संस्थान वनवासी बच्चों के लिये कक्षा दसवीं तक एवं बेसिक रूरल टेक्नोलॉजी में डिप्लोमा शिक्षा का प्रबंध कर रहा है। निमाड अभ्युदय के विद्यालयों में लगभग आठ सौं बच्चे अध्ययनरत है। अपनी नर्मदा परिक्रमा में वनवासी बच्चों का शिक्षा का संकल्प करने पर सुश्री भारती ठाकुर दीदी ने यह संस्थान प्रारंभ किया। रक्षा मंत्रालय की नौकरी छोड़ कर सुश्री भारती ठाकुर दीदी ने यह प्रकल्प प्रारंभ किया। दीदी को नागा साधु को पुनर्वास में मिला आश्रम में दान प्राप्त हुआ, जहाँ गौशाला सहित ये प्रकल्प चल रहा है। View this post on Instagram Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन मुनव्वर राणा की बेटी को दिया तीन तलाक, मांग रहे थे 20 लाख रुपये और प्लॉट… न मिलने पर की मारपीट दहेज की मांग, मारपीट और धमकी का आरोप, सआदतगंज थाने में केस दर्ज विश्व कैंसर दिवस पर इन्दौर में स्वच्छ हवा और कैंसर जागरूकता के लिए भव्य वॉकथॉन आयोजित