नई दिल्ली। केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार के 11 साल पूरे होने पर जहां सत्ता पक्ष इसे ‘विकसित भारत’ का स्वर्णिम काल बता रहा है, वहीं विपक्ष ने स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और बुनियादी ढांचे की बदहाली को लेकर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि इन 11 सालों में झूठे वादे, प्रोपेगंडा और विभाजन की राजनीति ही हुई, जबकि जनता की बुनियादी जरूरतें उपेक्षित रहीं। आंकड़े खुद सरकार की नाकामी बयां कर रहे हैं—अस्पतालों में बेड की कमी, स्कूलों में ड्रॉपआउट, बेरोजगारी का उतार-चढ़ाव और सड़कों की गुणवत्ता पर सवाल। जनता पूछ रही है: मंदिर-मस्जिद के अलावा स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार पर जवाब कौन देगा? व्यंग्य।। स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार सब बातें बेकार!सड़क, यातायात, अस्पताल, स्कूल, रोजगार की बात सब बदहाल…कौन है ज़िम्मेदार, किससे करें सवाल?जनता मांगे मंदिर-मस्जिद, फिर कौन करे सवाल? चुनाव आते ही भक्ति का दौर शुरू हो जाता है,नेता जी मंदिर की ईंटें गिनते, मस्जिद की दीवारें नापते हैं।अस्पताल में बेड नहीं, ऑक्सीजन की किल्लत,पर प्रचार में कहते— “राम राज आ गया, सब ठीक है भाई!” स्कूलों में बच्चे ज़मीन पर बैठे किताबें ताकते,शिक्षक नहीं, ब्लैकबोर्ड टूटा, छत से पानी टपकते।पर टीवी पर बहस गरम— “यहाँ मंदिर था या मस्जिद?”रोजगार? वो तो भूल जाओ, भक्ति में लग जाओ जी! सड़कें गड्ढों से भरी, ट्रैफिक जाम में जनता पिसती,ट्रेनें लेट, बसें खटारा, सपनों की रफ्तार थमती।फिर भी वोट मांगने आते, हाथ जोड़कर कहते—“हिंदू-मुस्लिम एकता से देश आगे बढ़ेगा!”(पर एकता सिर्फ़ वोट बैंक की, बाकी सब डिवाइड एंड रूल!) जनता चिल्लाती— “रोजी-रोटी दो, इलाज दो, पढ़ाई दो!”नेता मुस्कुराते— “अरे, पहले तो मंदिर पूरा कर लो!”बदहाली की यह कहानी सदियों से चल रही,व्यंग्य यह कि हम ही वोट देकर उन्हें सत्ता सौंपते,फिर खुद ही पूछते— “कौन है ज़िम्मेदार?” अबकी बार सोचो, वोट डालते वक़्त याद रखो:मंदिर-मस्जिद तो बनते-बिगड़ते रहेंगे,पर भूखा पेट, बीमार शरीर, बेरोजगार नौजवान—ये अगर ठीक नहीं हुए, तो कोई भगवान नहीं आएगा बचाने! स्वास्थ्य: खर्च बढ़ा, लेकिन कमी बरकरार सरकार का दावा है कि स्वास्थ्य क्षेत्र में क्रांति आई—मेडिकल कॉलेज 387 से बढ़कर 780 हो गए, स्वास्थ्य खर्च जीडीपी का 1.9% तक पहुंचा। आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं से करोड़ों को कवरेज मिला। लेकिन हकीकत अलग है। प्रति 1000 लोगों पर सिर्फ 1.3 अस्पताल बेड हैं, जबकि WHO मानक 3.5 है—करीब 24 लाख बेड की कमी। डॉक्टरों का अनुपात 1:811 है, जो WHO के 1:1000 से बेहतर तो है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में विशेषज्ञों की भारी कमी। आउट-ऑफ-पॉकेट खर्च अभी भी ऊंचा, कई राज्यों में सरकारी अस्पतालों की हालत खराब। कांग्रेस का कहना है, “11 साल में स्वास्थ्य को प्राथमिकता नहीं दी गई।” शिक्षा: नामांकन गिरा, इंफ्रा की कमी स्कूलों की संख्या 14.72 लाख, छात्र 24.8 करोड़। ड्रॉपआउट रेट घटा—प्राइमरी में 1.9%, अपर प्राइमरी में 5.2%, सेकेंडरी में 14.1%। लेकिन 2024-25 में नामांकन 25 लाख घटा। कई स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं नहीं—केवल 65% स्कूलों में कंप्यूटर, 63% में इंटरनेट। ग्रामीण स्कूलों में बिजली, शौचालय और शिक्षकों की कमी। साक्षरता दर में सुधार नगण्य। विपक्ष बोला, “शिक्षा को प्रोपेगंडा का शिकार बनाया गया, क्वालिटी पर ध्यान नहीं।” रोजगार: आंकड़ों में उतार-चढ़ाव बेरोजगारी दर 2025 में 5.1-5.6% के बीच रही, जो पहले से कम। लेकिन युवा बेरोजगारी ऊंची, ग्रामीण-शहरी अंतर। PLFS के अनुसार सुधार, लेकिन CMIE जैसे स्वतंत्र आंकड़े ज्यादा चिंता जताते हैं। पेपर लीक, सरकारी नौकरियों की कमी से युवा हताश। विपक्ष का आरोप: “11 साल में नौकरियां कहां? सिर्फ जुमले।” सड़कें: लंबाई बढ़ी, गुणवत्ता पर सवाल राष्ट्रीय राजमार्ग 2014 के 91,287 किमी से बढ़कर 2024 में 146,195 किमी—60% वृद्धि। हाई-स्पीड कॉरिडोर भी बढ़े। लेकिन ग्रामीण सड़कों का रखरखाव, जाम और दुर्घटनाएं जारी। कई जगह गुणवत्ता संदिग्ध। सरकार इसे बड़ी उपलब्धि बताती है, विपक्ष कहता है—”केवल रिबन काटे गए, पुरानी योजनाओं के।” कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, “11 साल में लोकतंत्र, अर्थव्यवस्था और सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुंचाया।” राहुल गांधी बोले, “कोई जवाबदेही नहीं, सिर्फ प्रोपेगंडा।” सरकार का जवाब: गरीब कल्याण, इंफ्रा और डिजिटल क्रांति पर फोकस। लेकिन जनता मंदिर-मस्जिद से आगे स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार मांग रही है। आंकड़े चीख रहे हैं—बदलाव कब? View this post on Instagram Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन इंदौर : जोन-2 में पुलिस का विशेष अभियान, होटलों-ढाबों में सघन सर्चिंग, ड्रोन से निगरानी बढ़ी सावरकर की प्रतिमा का अनावरण या हिन्दू राष्ट्र के एजेंडे का निरावरण