आलेख। डॉ. हनीश अजमेरा जनवरी में चाइना मांझे का , एक दिवसीय देशभक्ति काफरवरी में लव जिहाद, प्रेम दिवस कामार्च में पानी बचाओ, और होली मिलन भोज गिफ्ट काअप्रैल में बाबा साहेब और संविधान का , नव वर्ष कामई में पानी के मटके , और गर्मी से बचाव काजून में नालों की सफाई , पानी निकासी पर वो ही ढाक के तीन पातजुलाई में नार्मलअगस्त में आजादी पर देशभक्ति कासितंबर में वाहन फिटनेस, हेलमेट काअक्टूबर में चाइना के फटाके,प्रतिबंध का और एक नेता किराने की दुकान से सामान देंगे उसकानवंबर में यातायात सुरक्षा सप्ताह, और दूसरे अन्नकूट भोज कादिसंबर में यात्री बसों की फिटनेस। ट्रैवल की बसों से मरने वालों काये सालाना प्रोटोकॉल रहता है पत्रकारों का जनवरी आते ही चाइना मांझा काटने लगता है,फरवरी में अचानक “लव जिहाद” ट्रेंड करने लगता है,मार्च में होलिका दहन के साथ पानी बचाओ अभियान जलता है,अप्रैल में बाबा साहब की जयंती पर संविधान की दुहाई दी जाती है (बाकी 364 दिन कहाँ गायब रहता है संविधान, कोई नहीं पूछता),मई-जून में मटका, कुलर, नाला – सबकी खबर एक साथ आती है,जुलाई में थोड़ा सन्नाटा (क्योंकि मानसून आ गया, काम बंद),अगस्त में तिरंगा यात्रा, सेल्फी विद तिरंगा,सितंबर में हेलमेट पहन लो भाई, वरना चालान,अक्टूबर में पटाखे बंद करो (पर चाइना वाले ही बिकते हैं दुकानों पर),नवंबर में “यातायात सुरक्षा सप्ताह” – हेलमेट, सीट बेल्ट, शराब नहीं पीनी… और शाम को अन्नकूट भोज में नेता जी खुद ड्रिंक करते दिखते हैं,दिसंबर में बसें चेक करो, क्योंकि पिछले साल इसी महीने 40 लोग मरे थे। फिर नया साल… और वही चक्र शुरू। नेता-प्रशासन का “वार्षिक धार्मिक कार्य” पूरा,अखबार का “सीजनल कंटेंट” पूरा,पत्रकार का दबाव-खबर-फोटो का कोटा पूरा,और जनता?जनता का नंबर कभी नहीं आता। साहब, आपने सच कहा –“जब पत्रकार उंगली उठाता है तो मेहरबानी इतनी होती है कि बस…”बस एक दिन की खबर, एक दिन का शोर, एक दिन का प्रोटोकॉल।फिर सब भूल जाते हैं।अगले साल, अगले मौसम में फिर मिलेंगे। ये नहीं है पत्रकारिता,ये है “ऋतु-चक्र आधारित सरकारी पूजा-पाठ”।और हम सब मिलकर हर साल वही पूजा करते हैं। कभी तो कोई पूछे –अरे भाई, साल भर क्या करते हो?क्यों हर समस्या सिर्फ “मौसम” में आती है? लेकिन कौन पूछेगा?हम तो खुद कैलेंडर देखकर खबर लिखने बैठते हैं न! 😔 View this post on Instagram Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन फैशन, फूड और फेस्टिव फन: टुक टुक बाज़ार वेडिंग एडिशन का पहला दिन रहा धूमधाम से सफल आरटीओ में रिपोर्टर से मारपीट : पत्रकारिता के आईने में खुद को देखने का वक्त