चीन ने अमेरिका को निर्यात किए जाने वाले रेयर अर्थ मिनरल्स पर बैन लगा दिया है। अमेरिकी इंडस्ट्री के लिए बेहद जरूरी रेयर अर्थ मिनरल्स के लिए अमेरिका बहुत हद तक चीन पर निर्भर है। ऐसे में चीन के इस कदम से भड़के अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन पर 100 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ लगा दिया है। इससे दुनिया में नई ट्रेड वॉर छिड़ सकती है। 21वीं सदी की वैश्विक अर्थव्यवस्था में ताकत हमेशा मिसाइलों या माइक्रोचिप्स के रूप में नहीं मिलती। कभी-कभी यह सोयाबीन की तरह भी दिखती हैं। एक रणनीतिक प्रतिद्वंद्वी के हाथों में एक साधारण फसल भी कूटनीतिक हथियार बन सकती है। चीन भी यही काम कर रहा है। उसने रेयर अर्थ पर पाबंदी लगाने के बाद हजारों टन सोयाबीन उगाने वाले अमेरिका के जहाजों को अपनी ओर आने से पहले ही रोक दिया है। दरअसल, चीन ने इस साल अचानक अमेरिका से सोयाबीन खरीदना बंद कर दिया है। इससे अमेरिकी किसान खौफ में हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अपना सबकुछ मानने वाले किसान चीन के इस कदम से सड़क पर आ सकते हैं और पूरे अमेरिका में एक नए तरह का आंदोलन पनप सकता है। अमेरिका ने रेयर अर्थ मिनरल्स को बैन करने पर चीन पर 100 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ लगा दिया है। नोबेल पीस प्राइज नहीं मिलने से निराश ट्रंप ने चीन के रेयर अर्थ मिनरल्स बैन करने पर यह फैसला लिया है। इससे दोनों देशों के बीच तल्खी बढ़ती जा रही है। ट्रंप ने कहा कि 1 नवंबर 2025 से अमेरिका चीन से आयातित सभी उत्पादों पर 100 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ लगाएगा। यह टैरिफ पहले से लागू शुल्क के ऊपर होगा।अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा में इजरायल-हमास में शांति करा दी है, मगर चीन से अमेरिका के नए ट्रेड वॉर को शुरू कर दिया है। अब यह युद्ध कब खत्म होगा, इसका अंदाजा नहीं लग पा रहा है। अमेरिका और चीन ने 15 जनवरी, 2020 को पहले चरण के व्यापार समझौते पर एक ऐतिहासिक और लागू करने योग्य समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। मगर, ट्रंप के सत्ता में आने के बाद से चीन और भारत के साथ अमेरिका के रिश्ते लगातार खराब हो रहे हैं। माना जा रहा है कि ट्रंप के इस कदम से अब अमेरिका और चीन के बीच बड़ा ट्रेड वॉर छिड़ सकता है। ऐसे में APEC की बैठक में चीन के साथ इस मसले को सुलझाने को लेकर बात हो सकती है। चीन जानता है कि वह क्या कर रहा है। वह ट्रंप को उस स्थिति में दंडित कर रहा है, जहां वह राजनीतिक रूप से कमजोर, आर्थिक रूप से असुरक्षित और प्रतिक्रिया देने में धीमा है। वह यह कदम ऐसे समय में उठा रहा है जब अमेरिकी किसान पहले से कंगाली की हालत में हैं। सबकी निगाहें अब इसी महीने दक्षिण कोरिया में होने वाले एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग शिखर सम्मेलन पर है, जहां ट्रंप शिखर सम्मेलन में चीन के साथ सोयाबीन समझौता कर सकते हैं। ट्रंप इस बारे में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से बात कर सकते हैं। सोयाबीन अमेरिका का नंबर 1 फूड आइटम है। यह अमेरिका में 60 बिलियन डॉलर की इंडस्ट्री है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था के बड़े हिस्से का आधार है। इस साल, अमेरिका रिकॉर्ड फसल हुई है और इसे बेचने के लिए कोई जगह नहीं है। चीन दुनिया के कारोबार वाले सोयाबीन का लगभग 61 फीसदी खरीदता है, जिससे यह एक खरीदार के रूप में अपूरणीय बन जाता है। इस बार सोयाबीन नहीं खरीदना चीन का यह बदलाव एक व्यापक व्यापार शतरंज के खेल का हिस्सा है, क्योंकि बीजिंग ट्रंप के नए टैरिफ के जवाब में आर्थिक ताकत का प्रदर्शन कर रहा है। एक रिपोर्ट के अनुसार, नोमुरा होल्डिंग्स के मुख्य चीन अर्थशास्त्री लू टिंग ने लिखा-अब अमेरिकी सोयाबीन चीन के लिए उतना महत्वपूर्ण नहीं है। आयोवा सोयाबीन उत्पादक मोरे हिल ने वॉल स्ट्रीट जर्नल को बताया-अभी बेचने का कोई फायदा नहीं है। हिल ने कहा कि अगर चीन के साथ जल्द ही कोई समझौता नहीं हुआ, तो सोयाबीन बाजार में खून-खराबा मच सकता है। अमेरिका ने अपने खाद्य निर्यात को पूर्वानुमान के आधार पर बनाया था। चीन ने दक्षिण अमेरिका में भर-भरकर निवेश कर रखा है। ब्राजील, पेरू, अर्जेंटीना, चिली जैसे देशों के साथ संबंध बेहतर बनाए हैं। चीन ने अपने पत्ते अच्छी तरह से खेले हैं। इस साल के लिए ब्राजील की पूरी सोया आपूर्ति खरीद ली। अर्जेंटीना से भी खरीदा। ट्रंप पर दबाव बनाने के लिए समय रहते ही अमेरिकी सोयाबीन को रोक दिया। बीजिंग जानता है कि अमेरिकी किसान ट्रंप का आधार हैं। View this post on Instagram Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन इंदौर पुलिस की शक्ति मोबाइल ने करवा चौथ पर निभाया सुरक्षा और सेवा का दायित्व इंदौर में डकैती की साजिश रचने वाला कुख्यात बदमाश आशीष पाल पुलिस की गिरफ्त में