प्रदीप चौधरी। हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने हाल ही में मध्य प्रदेश के खंडवा में एक बिहार मूल के मौलाना पर अवैध रूप से धार्मिक स्थल पर रहने के आरोप में पुलिस कार्रवाई को लेकर भाजपा सरकार और खंडवा एसपी की कड़ी आलोचना की थी। ओवैसी ने मंच से कहा था कि यह कार्रवाई संविधान के अनुच्छेद 19 का उल्लंघन है, जो व्यक्ति को देश में कहीं भी रहने और घूमने की स्वतंत्रता प्रदान करता है। उन्होंने एसपी से सवाल किया था कि बिना किसी सूचना के मस्जिद में रहने पर कार्रवाई क्यों की गई। इस घटना का विवरण इस प्रकार है: 9 सितंबर 2025 को खंडवा की एक मस्जिद में बिहार से आए एक युवक (मौलाना) को 10-15 दिनों तक बिना स्थानीय पुलिस को सूचना दिए रहने के आरोप में मस्जिद के सदर और युवक के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। पुलिस का कहना था कि बाहरी व्यक्ति की सूचना न देने के कारण यह कार्रवाई आवश्यक थी, जो स्थानीय कानूनों के तहत अनिवार्य है। खंडवा एसपी ने स्पष्ट किया कि यह संविधान के दायरे में ही किया गया कदम है। ओवैसी की इस आलोचना के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई। भाजपा विधायक रमेश्वर शर्मा ने ओवैसी को नसीहत देते हुए कहा कि वे कानून को समझें, जबकि भाजपा सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल ने ओवैसी पर आग में घी डालकर सांप्रदायिक राजनीति करने का आरोप लगाया। विश्व हिंदू परिषद का मोर्चाअब इस मामले में विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) ने भी कूद पड़ है। इंदौर के वीएचपी प्रांत प्रशासनिक प्रमुख संतोष शर्मा ने ओवैसी के बयान पर तीखा प्रहार किया है। शर्मा ने कहा कि भारतीय संविधान किसी को भी देश में कहीं रहने की स्वतंत्रता तो देता है, लेकिन धार्मिक स्थल पर बिना सूचना के लंबे समय तक रहना और पुलिस को इसकी जानकारी न देना गैर-कानूनी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि संविधान में ही ऐसी स्थितियों में सूचना देने का प्रावधान है, और खंडवा एसपी ने ठीक यही संविधान का पालन किया है।संतोष शर्मा ने ओवैसी पर हमला बोलते हुए कहा कि ओवैसी अक्सर संविधान की दुहाई देकर कई कार्रवाइयों को गलत ठहराते हैं, लेकिन लगता है वे संविधान को ठीक से नहीं पढ़ते। इसी के जवाब में शर्मा ने घोषणा की है कि वे इंदौर से ओवैसी को एक भारतीय संविधान की पुस्तक भेज रहे हैं। उन्होंने मांग की है कि ओवैसी इस पुस्तक को ध्यान से पढ़ें और उसके बाद संविधान के नाम पर उठाए जाने वाले सवालों पर बोलें। शर्मा का यह बयान सोशल मीडिया और स्थानीय मीडिया में वायरल हो रहा है, जो इस विवाद को और तूल दे रहा है। यह विवाद खंडवा में मस्जिद से जुड़े एक छोटे से घटना से शुरू हुआ, लेकिन ओवैसी के बयान के बाद यह राष्ट्रीय स्तर पर सांप्रदायिक रंग ले चुका है। ओवैसी ने अपने भाषण में भाजपा पर अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने का आरोप लगाया, जबकि वीएचपी और भाजपा इसे कानून का पालन बता रही है। संतोष शर्मा, जो वीएचपी के प्रमुख नेता हैं, पहले भी सांप्रदायिक मुद्दों पर मुखर रहे हैं। हालांकि, इस विशेष घटना पर वीएचपी की प्रतिक्रिया हालिया है और यह ओवैसी के संविधान संबंधी बयानों पर केंद्रित है।यह मामला मध्य प्रदेश की राजनीति को गरमा सकता है, खासकर जहां भाजपा मजबूत है और ओवैसी जैसे नेता अल्पसंख्यक वोट बैंक को प्रभावित करने की कोशिश करते हैं। फिलहाल, कोई नई कार्रवाई की खबर नहीं है, लेकिन वीएचपी की यह पहल विवाद को लंबा खींच सकती है। View this post on Instagram Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन राज्यपाल ने रक्तदान और स्वास्थ्य शिविर का लिया जायज़ा इंदौर के ‘डांसिंग कॉप’ रणजीत सिंह पर विवादित आरोप: सोशल मीडिया पर तीखी बहस