इंदौर। आमिर खान।। —————— फर्जी एजाइल सिक्युरिटी फोर्स एंड सिस्टम प्रा.लिमिटेड कंपनी को सरकारी PUS- HLL इंफ्रा टेक सर्विसेज लिमिटेड से हॉस्पिटल मैनेजमेंट ठेका अवैध तरीके से सबलेट कराकर करोड़ों का भ्रष्टाचार डीन और अधीक्षक सहित अनेक स्वास्थ्य कर्मचारियों ने मिलकर षड्यंत्र रचकर किया ———————— एजाइल कंपनी के ऑफिस पते पर किरायेदार मिले, ऑफिस का पता फर्जी निकलामकान मालिक जामनगर का निकला फिर गुजरात कनेक्शन ———————— कांग्रेस के पूर्व महासचिव ने डीजीपी को नामजद हत्या की बीएनएस की धाराओं में एफ़आईआर दर्ज करने की शिकायत —————— जस्टिस जुनाइल एक्ट की धारा 75 (बच्चे पर अत्याचार का दंड) के अंतर्गत भी एफ़आईआर दर्ज की जाये———————- म.प्र. कांग्रेस कमेटी के पूर्व महासचिव राकेश सिंह यादव इंदौर, 6 सितंबर 2025एमवाय हॉस्पिटल में करोड़ों के भ्रष्टाचार के षड्यंत्र का खुलासा हो गया है। दो नवजात शिशुओं की बलि लेने के बाद सरकारी भ्रष्टाचारियों के काले कारनामों से पर्दा उठ गया है। म.प्र. कांग्रेस कमेटी के पूर्व महासचिव राकेश सिंह यादव ने एमवाय कांड में बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि एमवाय में पेस्ट कंट्रोल का कार्य करने वाली एजाइल सिक्युरिटी फोर्स एंड सिस्टम प्रा.लिमिटेड फर्जी कंपनी है। एजाइल का ऑफिस विजय नगर स्थित स्कीम नंबर 54 में एक रहवासी घर में दर्शाया गया है। इस फर्जी कंपनी के पास ट्रेंड टेक्नीशियन के साथ ही पेस्ट कंट्रोल करने का पूर्व अनुभव भी नहीं है। डीन और अधीक्षक अघोषित रूप से कंपनी के पार्टनर हैं। भ्रष्टाचार की लूट में अनेक एमवाय के अधिकारी और कर्मचारी शामिल हैं। 2017 में सरकारी उपक्रम PUC- HLL से एमवाय हॉस्पिटल का अनुबंध शासन के निर्देश अनुसार डीन ने किया था। इसके बाद भ्रष्टाचारी डीन और अधीक्षक ने मिलकर एजाइल कंपनी से एग्रीमेंट करके पेस्ट कंट्रोल का काम दे दिया। जबकि यह कार्य HLL को ही करना था। लेकिन HLL से सबलेट एजाइल को करने का जिक्र किया जा रहा है। लेकिन यह संदेहास्पद है। ऐसा प्रतीत होता है कि अवैध तरीके से डीन और अधीक्षक ने एजाइल कंपनी से एग्रीमेंट किया है। यह गंभीर जांच का विषय है। आश्चर्यजनक तथ्य यह है कि डीन और अधीक्षक ने लगातार एजाइल कंपनी के दस्तावेज छिपाने की भरपूर कोशिश करना ही अपराध को सिद्ध कर रहा है। एजाइल कंपनी ने ठेका लेते ही पेस्ट कंट्रोल के कुशल कर्मचारियों को दरकिनार कर दिया। एजाइल कंपनी ने स्वीकार किया कि कंपनी के पास तकनीकी पद नहीं हैं। इसलिए एजाइल ने सारे पेस्ट कंट्रोल कर्मचारियों को मल्टीपरपज वर्कर में ढाल दिया। जब HLL पेस्ट कंट्रोल कुशल आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को प्रति कर्मचारी 25,375/- वेतन प्रतिमाह देता था। लेकिन एजाइल कंपनी का अनुबंध होते ही वेतन मात्र 10,500/- रुपये कर दिया गया था। इसके खिलाफ अनेक कर्मचारियों ने लेबर कोर्ट में केस दायर किया। इसके पूर्व मई 2025 में कंपनी ने आदेश निकालकर सारे कर्मचारियों को मल्टीपरपज वर्कर की श्रेणी में डाल दिया। जब विरोध होने के बाद 31 मई तक कर्मचारियों राजी नहीं हुए तो 14 जून को कंपनी ने सभी कर्मचारियों को कार्य मुक्त करने का आदेश जारी कर दिया। तब कर्मचारियों ने हड़ताल कर दी थी। लेकिन अधीक्षक डॉ. अशोक यादव एवं डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया ने आश्वासन देकर मामला संभाल लिया। फर्जी एजाइल कंपनी के मैनेजर प्रदीप रघुवंशी ने स्वीकार किया कि कंपनी के पास ट्रेंड पेस्ट कंट्रोलर नहीं हैं। फर्जी एजाइल कंपनी के ऑफिस का पता भी फर्जी निकला है। मतलब साफ है कि बिना ट्रेंड कर्मचारियों से पेस्ट कंट्रोल की नौटंकी तीन सालों से जारी है। पेस्ट कंट्रोल के नाम पर सारा बजट डीन, अधीक्षक एवं प्रदीप रघुवंशी ने मिलकर हड़प लिया है। दोनों नवजात बच्चों की मौत नहीं हत्या के लिए तीनों जिम्मेदार हैं। महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि बिना ट्रेंड टेक्नीशियन एवं बिना डिग्री और डिप्लोमा धारी सामान्य कर्मचारियों द्वारा पेस्ट कंट्रोल का खतरनाक कार्य प्रदेश के सबसे बड़े हॉस्पिटल में किया जा रहा है। जिससे कभी भी बड़ा हादसा होने से अनेक मरीजों की मौत एक साथ हो सकती थी। पेस्ट कंट्रोल तकनीक में बिना ट्रेंड मजदूरों से कार्य कराने पर मजदूरों सहित मरीजों पर मौत का साया लगातार मंडरा रहा है। भ्रष्टाचार के कुबेरों ने सैकड़ों जिंदगियों को दांव पर लगा दिया है। सरकार जांच कमेटी की नौटंकी कर रही है जबकि अब सब साफ हो गया है। मध्यप्रदेश में SGSITS या RRM पैरामेडिकल कॉलेज नीमच जैसे संस्थानों में पेस्ट कंट्रोल पाठ्यक्रम हैं। यह भी सीधे तौर पर पेस्ट कंट्रोल टेक्नीशियन कोर्स नहीं हैं। दिल्ली यूनिवर्सिटी, NIPHM हैदराबाद में ही डिग्री कोर्स हैं। IPCA और SSRT व्यवहारिक ट्रेनिंग देता है। इसके पश्चात कार्य स्थल पर पेस्ट कंट्रोल करने के लिए लायसेंस प्राप्त करने के लिए परीक्षा उत्तीर्ण करना आवश्यक है। लेकिन एमवाय में मजदूरों से पेस्ट कंट्रोल कराया जाना गंभीर श्रेणी का अपराध है। एजाइल कंपनी ऑडिट रिपोर्ट नहीं है। कंपनी में ट्रेंड टेक्नीशियन नहीं हैं। कंपनी का ऑफिस नहीं है। सब कागज पर हैं। सारा बजट लूट लिया है। डीन, अधीक्षक और प्रदीप रघुवंशी ने मिलकर करोड़ों का भ्रष्टाचार करके घोटाला करने के साथ दो नवजात शिशुओं की हत्या के लिए जवाबदेह हैं। डीन और अधीक्षक ने खुद को बचाने के लिए बेक डेट में नोटिस तैयार करके एजाइल कंपनी को देने के फर्जी दस्तावेज भी पिछले तीन दिनों में तैयार किए हैं। बिना कंपनी का पुलिस वेरिफिकेशन करें ही फर्जी कंपनी के साथ अनुबंध करके करोड़ों का घोटाला किया है। यह आर्थिक घोटाला 200 करोड़ से ज्यादा का होने की संभावना है। मामला सिर्फ एमवाय तक नहीं है। अनेक सरकारी हॉस्पिटल में ऐसी फर्जी कंपनियों ने करोड़ों की लूट की है। संपूर्ण मामले में मुख्यमंत्री, डीजीपी, आर्थिक अपराध शाखा और लोकायुक्त को शिकायत की गई है। मुख्यमंत्री से मांग की गई है कि डीन, अधीक्षक एवं प्रदीप रघुवंशी के खिलाफ तत्काल हत्या की एफ़आईआर दर्ज करके जस्टिस जुनाइल एक्ट में धारा 75 में कार्यवाही की जाना चाहिए। View this post on Instagram Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन ध्वनि प्रदूषण करने वाले वाहनों से स्पीकर के कनेक्शन काटे गए कलेक्टर आशीष सिंह के निर्देशन में कड़ी कार्रवाई लाल किले के सामने हो रहे धार्मिक समारोह से एक करोड़ का सोने का कलश चोरी, CCTV में संदिग्ध ‘कैद’