प्रदीप चौधरी। केरल की 38 वर्षीय नर्स निमिषा प्रिया को यमन में 2017 में अपने यमनी बिजनेस पार्टनर तलाल अब्दो महदी की हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया था। यमन की अदालत ने उन्हें 2020 में फांसी की सजा सुनाई, जिसे 2023 में अंतिम अपील खारिज होने के बाद 16 जुलाई 2025 को लागू किया जाना था। हालांकि, भारत सरकार के कूटनीतिक प्रयासों और केरल के प्रभावशाली सुन्नी मुस्लिम नेता कंथापुरम एपी अबूबकर मुसलियार की मध्यस्थता से यमन के अधिकारियों ने फांसी को फिलहाल स्थगित कर दिया है। भारत सरकार ने यमनी अधिकारियों, जेल प्रशासन और मृतक के परिवार के साथ बातचीत के जरिए समय हासिल करने की कोशिश की। ‘सेव निमिषा प्रिया इंटरनेशनल एक्शन काउंसिल’ और निमिषा के परिवार ने मृतक के परिजनों को 10 लाख डॉलर (लगभग 8.6 करोड़ रुपये) की ‘ब्लड मनी’ की पेशकश की, ताकि शरिया कानून के तहत माफी मिल सके। हालांकि, मृतक का परिवार अभी तक इस प्रस्ताव पर सहमत नहीं हुआ है। सुप्रीम कोर्ट में 14 जुलाई 2025 को सुनवाई के दौरान भारत सरकार ने बताया कि वह यमन के प्रभावशाली नेताओं और धार्मिक गुरुओं के साथ संपर्क में है, लेकिन यमन की जटिल राजनीतिक स्थिति और हूती विद्रोहियों के साथ सीमित राजनयिक संबंध चुनौतियां पेश कर रहे हैं। निमिषा की मां प्रेमा कुमारी और सामाजिक कार्यकर्ता सैमुअल जेरोम यमन में मृतक के परिवार से माफी की गुहार लगा रहे हैं। फिलहाल, निमिषा सना की जेल में बंद हैं, जहां वह अन्य कैदियों की मेडिकल मदद कर रही हैं। उनकी फांसी टलने से परिवार और समर्थकों में उम्मीद जगी है, लेकिन ‘ब्लड मनी’ पर सहमति और कूटनीतिक प्रयासों का परिणाम उनकी जान बचाने में निर्णायक होगा। View this post on Instagram Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन पुष्प वर्षा से कावड़ यात्रा का भव्य स्वागत मध्यप्रदेश पुलिस का “नशे से दूरी, है जरूरी” अभियान: इंदौर में युवाओं ने निकाली नशा मुक्ति जागरूकता रैली