इंदौर, : मध्यप्रदेश पुलिस ने तकनीकी सशक्तिकरण की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम उठाते हुए ई-एचआरएम (इलेक्ट्रॉनिक ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट) प्रणाली की शुरुआत की है। यह प्रणाली पुलिस विभाग के मानव संसाधन प्रबंधन को डिजिटल, पारदर्शी और केंद्रीकृत बनाएगी। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का पायलट प्रोजेक्ट जीआरपी इंदौर से शुरू किया गया है, जिसका शुभारंभ 10 जुलाई 2025 को पुलिस अधीक्षक रेल इंदौर संतोष कोरी के मार्गदर्शन में हुआ। जीआरपी इंदौर को इस प्रोजेक्ट के लिए उसकी कार्यक्षमता, नवाचार के प्रति तत्परता और सूचना प्रौद्योगिकी में दक्षता के आधार पर चुना गया। इस पहल को पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना, विशेष पुलिस महानिदेशक (प्रशासन) आदर्श कटियार, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक रवि कुमार गुप्ता, पुलिस महानिरीक्षक रुचि वर्धन मिश्र और पुलिस उपमहानिरीक्षक मोनिका शुक्ला के निर्देशों के तहत लागू किया गया है। प्रशिक्षण और तकनीकी संचालन:पुलिस अधीक्षक रेल कार्यालय परिसर, इंदौर में आयोजित प्रशिक्षण सत्र में विनीत तिवारी, प्रमुख तकनीकी सलाहकार, गृह विभाग, म.प्र. शासन ने प्रणाली के उपयोग और लाभों की विस्तृत जानकारी दी। इस अवसर पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मनीषा पाठक सोनी, एडिशनल डिप्टी कमिश्नर सीमा अलावा, उप पुलिस अधीक्षक ज्योति शर्मा सहित जीआरपी इंदौर के कई अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे। ई-एचआरएम के लाभ: सर्विस बुक एक क्लिक पर: पुलिसकर्मियों की सेवा पुस्तिका, प्रशिक्षण, पदोन्नति, स्थानांतरण, वेतन और अवकाश संबंधी जानकारी डिजिटल रूप में एक स्थान पर उपलब्ध होगी। पारदर्शिता और जवाबदेही: ऑनलाइन डाटा सुरक्षित, नियमित अद्यतन और केंद्रीकृत प्रणाली द्वारा संरक्षित रहेगा। दक्षता और तीव्रता: यह प्रणाली प्रशासनिक प्रक्रियाओं में सटीकता और गति लाएगी, जिससे कागजी बोझ और देरी कम होगी। ई-एचआरएम क्या है?ई-एचआरएम एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जो भर्ती से सेवानिवृत्ति तक कर्मचारियों के सेवा विवरण का प्रबंधन करता है। इसमें डिजिटल सेवा पुस्तिका, वेतन प्रबंधन, छुट्टी आवेदन, स्थानांतरण, पदोन्नति और वार्षिक मूल्यांकन जैसे मॉड्यूल शामिल हैं। यह प्रणाली डुप्लिकेशन और अनावश्यक दस्तावेजों को समाप्त कर कार्यप्रणाली को सुगम बनाती है। आगे की राह:पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के बाद, ई-एचआरएम को मध्यप्रदेश पुलिस की सभी इकाइयों में लागू किया जाएगा। यह परियोजना मध्यप्रदेश पुलिस को आधुनिक, पारदर्शी और जनोन्मुखी प्रशासनिक मॉडल की दिशा में ले जाएगी। जीआरपी इंदौर का यह चयन न केवल गौरव का विषय है, बल्कि उसकी तकनीकी तत्परता और कुशल प्रबंधन का प्रमाण भी है। यह पहल मध्यप्रदेश पुलिस को डिजिटल युग की अग्रणी पुलिस व्यवस्था में बदलने का मील का पत्थर साबित होगी। Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन बरखेड़ा पठानी इलाके में युवक की हत्या: रिजवान पर आरोप, लव जिहाद का दावा राऊ विधायक मधु वर्मा ने दिखाई मानवता, 35 मिनट में जुटाए 40 लाख रुपये