प्रदीप चौधरी। सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि शादी का हर वादा टूटना झूठा वादा नहीं माना जा सकता, और इसे रेप का आधार बनाकर मुकदमा चलाना गलत है। कोर्ट ने कहा, “सहमति से बने रिश्ते में खटास या पार्टनर का दूरी बनाना आपराधिक कार्रवाई का आधार नहीं हो सकता।”

इस तरह के मामले न केवल न्यायिक प्रणाली पर बोझ डालते हैं, बल्कि आरोपी की सामाजिक प्रतिष्ठा को भी नुकसान पहुंचाते हैं। कोर्ट ने कानून के दुरुपयोग के खिलाफ चेतावनी दी और कहा कि ऐसी शिकायतें प्रावधानों का गलत इस्तेमाल दर्शाती हैं।

सुप्रीम कोर्ट की विशेष टिप्पणी: सहमति से बने रिश्तों में खटास को रेप का आधार नहीं बनाया जा सकता

नई दिल्ली, 28 मई 2025: सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई के दौरान रेप कानूनों के दुरुपयोग पर कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि शादी का हर टूटा वादा झूठा वादा नहीं माना जा सकता, और इसे रेप के आरोपों का आधार बनाकर किसी पर मुकदमा चलाना न केवल मूर्खतापूर्ण है, बल्कि गलत भी है। कोर्ट ने कहा कि सहमति से बने रिश्तों में खटास या पार्टनर का दूरी बनाना आपराधिक कार्रवाई का आधार नहीं हो सकता।

कोर्ट का सख्त संदेश
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई करते हुए कहा, “ऐसे मामले न केवल अदालतों पर अनावश्यक बोझ डालते हैं, बल्कि आरोपी की सामाजिक प्रतिष्ठा और पहचान को भी धूमिल करते हैं।” कोर्ट ने बार-बार रेप कानूनों के दुरुपयोग के खिलाफ चेतावनी दी और इस तरह की शिकायतों को प्रावधानों का गलत इस्तेमाल बताया।

कानून के दुरुपयोग पर चिंता
कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि सहमति के आधार पर बने रिश्तों में व्यक्तिगत मतभेद या रिश्ते का टूटना आपराधिक कृत्य नहीं है। जस्टिस ने कहा, “हर रिश्ते में असफलता या वादे का पूरा न होना रेप के समान नहीं हो सकता। इस तरह के मामलों में कानून का दुरुपयोग न केवल न्यायिक प्रक्रिया को कमजोर करता है, बल्कि समाज में गलत संदेश भी देता है।”

न्यायिक प्रणाली पर बोझ
सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर भी चिंता जताई कि इस तरह के मामले अदालतों के समय और संसाधनों का दुरुपयोग करते हैं। कोर्ट ने निचली अदालतों से आग्रह किया कि वे ऐसे मामलों की गहन जांच करें और बिना ठोस सबूतों के आपराधिक कार्रवाई से बचें।

सामाजिक प्रभाव
कोर्ट ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि झूठे आरोप न केवल आरोपी के जीवन को प्रभावित करते हैं, बल्कि समाज में कानून के प्रति विश्वास को भी कम करते हैं। यह टिप्पणी उन मामलों में विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जहां सहमति से बने रिश्तों को बाद में रेप के आरोपों में बदल दिया जाता है।

निष्कर्ष
सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी रेप कानूनों के दुरुपयोग को रोकने और सहमति के आधार पर बने रिश्तों की प्रकृति को समझने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कानून का उद्देश्य पीड़ितों की रक्षा करना है, न कि व्यक्तिगत विवादों को आपराधिक मामलों में बदलना।

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