सम्बंधित थाना प्रभारियों के सह पर लगातार कई दिनों से कई गांवों में किया गया बोर।

जिम्मेदार अधिकारियों के द्वारा कलेक्टर रीवा के आदेशों की उड़ाई जा धज्जियां।

एसडीएम, तहसीलदार और पटवारी और थाना प्रभारियों को मैसेज करने के बाद नही पहुचे जिम्मेदार अधिकारी।

जवा/  रीवा कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल के द्वारा गर्मी में जल स्त्रोत का स्तर नीचे चले जाने के कारण बोरिंग व  नलकूप खनन पर प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी किया और सम्बंधित तहसील के एसडीएम और तहसीलदार को आदेशित किया गया कि विकट समस्या होने पर बोरिंग कराने की अनुमति दे।

लेकिन क्षेत्र में ज्यादातर बोरिंग बिना अनुमति के कराए जा रहे है जिसकी जानकारी एसडीएम, तहसीलदार और पटवारी आरआई और थाना प्रभारियों को भी है और सभी को मैसेज के माध्यम से जानकारी दी गयी लेकिन कोई भी जिम्मेदार स्थल पर नही पहुचा।
जो खुले आम जिला कलेक्टर के आदेशों की धज्जियां उड़ा रहे है।


और क्षेत्र में लगातार बोरिंग की जा रही है जबकि रीवा जिला जल अभावग्रस्त है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जो बोरिंग का कार्य तराई क्षेत्र में करा रहे है वो सम्बंधित थाना प्रभारियों और राजस्व विभाग के सेटिंग से करा रहे है।

इस संबंध में जब बोर कराने वालों से बात की गई कि प्रतिबंध है इसके बावजूद बोर कैसे हो जाता है तो उनका कहना है इसीलिए 20 रुपये प्रति फिट ज्यादा लेते है जिससे थाना प्रभारी, राजस्व विभाग सहित अन्य लोगो को मैनेज किया जाता है।
   मिली जानकारी के अनुसार पूरे जवा तहसील में एक माह से ज्यादा समय से बोरिंग की जा रही है जिनमे रीवा शहर सहित नीवा, चौर और देवरी पिपरहा टोला सहित कई गांव सम्मिलित है जहा पर धरल्ले से बोर किया गया और देवरी में आज भी बोरिंग चालू है जहा पर कल से आज तक मे 5 बोर हुए है जिसकी जानकारी मिली है।

सवाल यही की जो भी आदेश जारी होता है उस पर अमल क्यो नही?
क्या जारी आदेश सिर्फ दिखाबे के लिए या गरीबो के लिए है।

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By kushmendra

Journlist- NNW News(News National World)

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