प्रदीप चौधरी। राजनीतिक विश्लेषण:मध्य प्रदेश के कैबिनेट मंत्री विजय शाह का कर्नल सोफिया कुरैशी पर दिया गया आपत्तिजनक बयान, जिसमें उन्होंने भारतीय सेना की इस वीरांगना को “आतंकियों की बहन” कहा, ने एक बार फिर सियासी तूफान खड़ा कर दिया है। यह कोई नई बात नहीं है; शाह का इतिहास विवादित बयानों से भरा पड़ा है। शिवराज सिंह चौहान की सरकार में भी उनकी ऐसी ही हरकतों ने कुर्सी गंवाने की नौबत ला दी थी। लेकिन क्या इस बार भी माफी का ड्रामा और बीजेपी की डैमेज कंट्रोल रणनीति काम आएगी, या यह मामला पार्टी के लिए बड़ा सिरदर्द बनने वाला है? आतंकियों की बहन ने कर दिया ऐसी की तैसी बयान की पृष्ठभूमि और विवाद:विजय शाह ने महू में एक जल संरक्षण कार्यक्रम के दौरान कर्नल सोफिया कुरैशी, जो ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की प्रमुख प्रवक्ता रही हैं, पर न केवल आपत्तिजनक बल्कि सांप्रदायिक रंग लिए हुए कमेंट किए। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद जनता का गुस्सा फूट पड़ा। कांग्रेस ने इसे सेना, नारी शक्ति और देश की एकता पर हमला करार देते हुए शाह की बर्खास्तगी की मांग उठाई। मंत्री विजय शाह का सेना के आला अधिकारी पर दिया गया बयान न केवल शर्मनाक है, बल्कि यह सेना और महिलाओं दोनों का अपमान है। मैं विजय शाह के इस बयान की घोर निंदा करता हूं।: उमंग सिंघार जी, नेता प्रतिपक्ष. बीजेपी की प्रतिक्रिया:बीजेपी नेतृत्व इस बयान से खासा नाराज है। पार्टी अध्यक्ष बीडी शर्मा ने शाह को तलब किया, और संगठन ने उन्हें फटकार लगाई। शाह ने तुरंत माफी मांगते हुए कहा, “मैं सपने में भी कर्नल सोफिया के बारे में गलत नहीं सोच सकता। वे मेरी बहन जैसी हैं।” लेकिन उनकी यह सफाई भी आलोचनाओं को शांत करने में नाकाम रही। कुछ का मानना है कि बीजेपी इस मामले को जल्दी दबाने की कोशिश में है, क्योंकि लोकसभा चुनाव करीब हैं, और सेना व नारी सम्मान जैसे मुद्दे पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचा सकते हैं। कांग्रेस का आक्रामक रुख:कांग्रेस ने इस मुद्दे को लपकते हुए बीजेपी को घेरने की पूरी रणनीति बना ली है। पीसीसी अध्यक्ष जीतू पटवारी ने शाह को “बड़बोला” करार देते हुए उनकी तत्काल बर्खास्तगी की मांग की। कांग्रेस प्रवक्ता अब्बास हफीज ने इसे सेना और नारी शक्ति का अपमान बताया, जबकि पार्टी ने पीएम मोदी और सीएम मोहन यादव से माफी की मांग की। इंदौर में शाह के बंगले पर काली स्याही पोतने की घटना ने इस विवाद को और हवा दी। मानसिकता पर सवाल:विजय शाह का यह बयान बीजेपी नेताओं की उस प्रवृत्ति को उजागर करता है, जहां बिना सोचे-समझे दिए गए बयान बाद में पार्टी के लिए संकट बन जाते हैं। शाह का यह दावा कि “मैंने अनजाने में गलत शब्दों का इस्तेमाल किया” कई सवाल खड़े करता है। क्या यह महज लापरवाही थी, या सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की कोशिश? सोशल मीडिया पर लोगों ने उनकी शिक्षा और समझ पर तंज कसते हुए कहा, “थोड़ा पढ़े होते तो भारत की बेटी को आतंकियों की बहन न कहते।” View this post on Instagram पहले भी विवादों में रहे शाह:शाह का यह पहला विवाद नहीं है। शिवराज सरकार में भी उनके बयानों ने हंगामा मचाया था, जिसके चलते उन्हें मंत्री मंडल से हटना पड़ा था। उनकी यह आदत न केवल उनकी व्यक्तिगत छवि को नुकसान पहुंचाती है, बल्कि बीजेपी को भी बैकफुट पर ला देती है।निष्कर्ष:यह विवाद बीजेपी के लिए एक टेस्ट केस है। यदि शाह के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो कांग्रेस इसे “नारी विरोधी” और “सेना विरोधी” छवि के तौर पर भुनाने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी। दूसरी ओर, बीजेपी की चुप्पी या हल्की कार्रवाई पार्टी के “देशभक्ति” और “नारी सम्मान” के दावों पर सवाल उठाएगी। शाह की माफी और बीजेपी की डैमेज कंट्रोल रणनीति कितनी कारगर होगी, यह आने वाले दिनों में साफ होगा। लेकिन एक बात तय है—विजय शाह का यह बयान लंबे समय तक सियासी गलियारों में गूंजेगा।सवाल जनता के लिए:क्या विजय शाह की माफी पर्याप्त है, या उनकी बर्खास्तगी जरूरी है? मन्त्री विजय शाह को फटकार लगाने के बाद,बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा का संदेश लेकर सोफिया कुरैशी के घर पहुंचे बीजेपी नेता।भाजपा प्रदेश अध्यक्ष श्री शर्मा के निर्देश के बाद पूर्व विधायक मानवेंद्र सिंह समेत बीजेपी नेताओ ने सोफिया कुरैशी के नौगांव छतरपुर घर पहुंचकर की परिजनों से मुलाकात और उन्हें देश की बेटी बताया। Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन बस्तर में युद्ध विराम और शांति वार्ता की अपील, माकपा के विजू कृष्णन ने कहा : राज्य प्रायोजित हत्याएं शर्मनाक अनुभव पटेल ने सीबीएसई कक्षा 10वीं में हासिल किए 92% अंक
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