जब पुलिस ने ही पुलिस की पुलिस की हत्या: अश्विनी बिदरे हत्याकांड की पूरी कहानी

  1. “जब पुलिस ने तोड़ा कानून: ठाणे का सनसनीखेज मर्डर”
  2. “ASI की हत्या, सीनियर पर इल्ज़ाम: 2016 का अनसुलझा रहस्य”
  3. “वर्दी पर दाग: अश्विनी बिदरे की हत्या की खौफनाक कहानी”
  4. “प्यार, धोखा और हत्या: ठाणे पुलिस का काला सच”

2016: ठाणे, महाराष्ट्र

पृष्ठभूमि
सहायक पुलिस निरीक्षक (ASI) अश्विनी बिदरे, एक मेहनती और कर्तव्यनिष्ठ पुलिस अधिकारी थीं, जो ठाणे, महाराष्ट्र में तैनात थीं। लेकिन 11 अप्रैल 2016 को उनकी जिंदगी का एक दर्दनाक और रहस्यमयी अंत हुआ। उस दिन अश्विनी ड्यूटी के लिए घर से निकलीं, लेकिन फिर कभी लौटकर नहीं आईं। उनकी गुमशुदगी ने पुलिस महकमे से लेकर आम लोगों तक में सनसनी फैला दी। कोई चीख, कोई शव, कोई सुराग नहीं—बस एक खालीपन। लेकिन जल्द ही इस मामले ने एक चौंकाने वाला मोड़ लिया, जब शक की सुई उनके ही सीनियर, इंस्पेक्टर अभय कुरुंदकर पर ठहर गई।

गायब होने की शुरुआत
11 अप्रैल 2016 को अश्विनी अपने घर से ड्यूटी के लिए निकली थीं। जब वे देर रात तक नहीं लौटीं, तो उनके परिवार ने चिंता जताई। कई दिनों तक कोई जानकारी न मिलने पर उनके पति, राजू गोरे ने 14 जुलाई 2016 को पुलिस में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज की। लेकिन पुलिस की ओर से शुरुआती तौर पर इस मामले में गंभीरता नहीं दिखाई गई। नाराज होकर राजू ने बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और 4 अक्टूबर 2016 को याचिका दाखिल की। कोर्ट के दबाव के बाद जांच ने रफ्तार पकड़ी।

शक की सुई: अभय कुरुंदकर
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि अश्विनी और सीनियर इंस्पेक्टर अभय कुरुंदकर के बीच निजी संबंध थे। सूत्रों के मुताबिक, दोनों के बीच प्रेम संबंध थे, जो समय के साथ तनावपूर्ण हो गए थे। कहा जाता है कि अश्विनी ने अपने पति को तलाक दे दिया था और अभय पर शादी का दबाव बना रही थीं। लेकिन अभय, जो पहले से शादीशुदा था, इस रिश्ते को खत्म करना चाहता था। यही तनाव हत्या का कारण बना।

खुलासा: एक दोस्त की गवाही
2018 में इस केस में बड़ा खुलासा तब हुआ, जब अभय के करीबी दोस्त महेश फलनिकर को पुलिस ने हिरासत में लिया। महेश ने सनसनीखेज खुलासा किया कि अभय ने ही अश्विनी की हत्या की थी। उसने बताया कि 11 अप्रैल 2016 की रात को अभय ने अश्विनी की हत्या कर दी। इसके बाद, लकड़ी काटने वाली मशीन से उनके शव के टुकड़े किए गए। इन टुकड़ों को पहले भायंदर में अभय के फ्लैट में फ्रिज में रखा गया और फिर वसई खाड़ी में फेंक दिया गया। इस भयावह अपराध में अभय की मदद उसके ड्राइवर कुंदन भंडारी और अन्य सहयोगियों ने की थी।

जांच और सबूत
पुलिस ने वसई खाड़ी में बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन चलाया, जिसमें नवी मुंबई पुलिस, ठाणे ग्रामीण पुलिस और भारतीय नौसेना भी शामिल थी। लेकिन अश्विनी का शव या उसके अवशेष कभी नहीं मिले। इसके बावजूद, पुलिस ने अभय, महेश, कुंदन और अन्य संदिग्धों को गिरफ्तार कर लिया। जांच में अभय और कुंदन के मोबाइल लोकेशन डेटा ने भी अहम भूमिका निभाई, जो हत्या की रात को एक ही जगह पर थे। हालांकि, शव के न मिलने से यह केस लंबे समय तक सबूतों के अभाव में उलझा रहा।

कानूनी कार्रवाई और फैसला
लंबी कानूनी लड़ाई के बाद, 5 अप्रैल 2025 को पनवेल सत्र न्यायालय ने इस मामले में फैसला सुनाया। अभय कुरुंदकर को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) के तहत दोषी ठहराया गया। महेश फलनिकर और कुंदन भंडारी को धारा 201 (सबूत नष्ट करने) के तहत दोषी पाया गया। सजा का ऐलान 11 अप्रैल 2025 को होना तय हुआ। एक अन्य आरोपी, राजू पाटिल, को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया।

क्यों है यह मामला इतना चर्चित?

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निष्कर्ष
अश्विनी बिदरे हत्याकांड न केवल एक क्रूर अपराध की कहानी है, बल्कि यह भी दिखाता है कि कानून के रखवाले भी कानून तोड़ सकते हैं। यह मामला पुलिस महकमे की आंतरिक कार्यप्रणाली और निजी रिश्तों के जटिल पहलुओं पर सवाल उठाता है। 9 साल बाद आए इस फैसले ने अश्विनी के परिवार को कुछ हद तक न्याय दिलाया, लेकिन उनके गायब शव का रहस्य आज भी अनसुलझा है।

  • पुलिस के भीतर अपराध: यह मामला इसलिए चौंकाने वाला था क्योंकि इसमें एक पुलिस अधिकारी ने अपने ही सहयोगी की हत्या की।
  • क्रूरता की हद: शव के टुकड़े करने और उसे खाड़ी में फेंकने की बात ने पूरे देश को झकझोर दिया।
  • सबूतों का अभाव: शव न मिलने के बावजूद, परिस्थितिजन्य साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर दोष सिद्ध करना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती था।
  • निजी संबंधों का कोण: प्रेम संबंधों और टूटे रिश्तों ने इस मामले को और जटिल बना दिया।
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