मोहम्मद शहीद।9300837746। रमज़ान का पवित्र महीना शुरू होते ही मस्जिदों में तरावीह की नमाज़ अदा की जाती है, जिसमें कुरान-ए-पाक की तिलावत की जाती है। इस महीने में पांच ताक रातें होती हैं, जिनमें सबसे अफ़ज़ल रात “सबे कद्र” यानी 27वीं रात को माना जाता है। इस खास रात को तरावीह पढ़ाने वाले इमाम कुरान मजीद को मुकम्मल करते हैं, और इसी खुशी के मौके पर इमामों को उपहार और नज़राना पेश किया जाता है। खजराना की आले रसूल मस्जिद में भी इस परंपरा को निभाया गया। मस्जिद के सदर याह्या बाबा की अगुवाई में इमाम साहब इरफान अंसारी, मुअज्जिन और मस्जिद की खिदमत में लगे लोगों को नकद राशि, कपड़े और नज़राना दिया गया। इसके साथ ही उन्हें साफ़े बांधे गए और फूलों की माला पहनाकर उनका इस्तकबाल किया गया। कालोनी के सभी रहवासियों ने भी इमाम साहब और मुअज्जिन साहब को तोहफों के रूप में नज़राना भेंट किया। View this post on Instagram इसके अलावा, रमज़ान के आखिरी दस दिनों में ऐतिकाफ में बैठने वाले बुजुर्गों और बच्चों को भी उपहार देकर सम्मानित किया गया। इस मौके पर इमाम साहब ने इस्लाम की अहम शिक्षाओं को बयान किया और हजरत मोहम्मद साहब के सच्चे और नेक उद्देश्यों के बारे में बताया। उन्होंने यह भी समझाया कि रमज़ान में नेकियों में कैसे इजाफा होता है और पांच ताक रातें सभी रातों में सबसे अफ़ज़ल क्यों मानी जाती हैं। अंत में, मस्जिद से सार्वजनिक रूप से देश और देशवासियों के लिए अमन, शांति और तरक्की की दुआएं मांगी गईं। यह मौका न सिर्फ धार्मिक उत्साह का प्रतीक बना, बल्कि आपसी भाईचारे और सम्मान को भी बढ़ावा दिया। Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन सिरमौर विधानसभा क्षेत्र में निरंतर जारी है लोक कल्याणार्थ सामूहिक श्री हनुमान चालीसा का पाठ मच्छरों से मुक्ति: वार्ड 52 में नगर निगम की मुहिम, सफाई पर जोर