प्रदीप चौधरी। इलाहाबाद हाई कोर्ट। कोर्ट ने एक जजमेंट में यह कहते हुए कहा कि, पीड़िता के स्तनों को पकड़ा और आकाश ने पीड़िता के पाजामे को नीचे करने की कोशिश की और इसके लिए उन्होंने उसके पाजामे का नाड़ा तोड़ दिया और उसे पुलिया के नीचे खींचने की कोशिश की, लेकिन गवाहों के हस्तक्षेप के कारण वे पीड़िता को छोड़कर घटनास्थल से भाग गए… सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस फैसले पर रोक लगा दी है, जिसमें कहा गया था कि नाबालिग लड़की के स्तनों को पकड़ना, उसके पायजामे का नाड़ा तोड़ना और उसे पुलिया के नीचे खींचने की कोशिश करना बलात्कार या बलात्कार के प्रयास के अपराध के अंतर्गत नहीं आएगा।न्यायमूर्ति BR गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि यह एक गंभीर मामला है और फैसला सुनाने वाले न्यायाधीश की ओर से पूरी तरह असंवेदनशीलता है।सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “हमें यह कहते हुए दुख हो रहा है कि यह निर्णय लिखने वाले की ओर से संवेदनशीलता की पूर्ण कमी को दर्शाता है।” इलाहाबाद हाई कोर्ट (Allahabad High Court) के जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्रा (Ram Manohar Narayan Mishra) ने अपने फैसले में कहा कि नाबालिग के स्तनों को पकड़ना और उसके पाजामे का नाड़ा तोड़ना बलात्कार के प्रयास के बराबर नहीं है. इस फैसले से लोगों में आक्रोश फैल गया और कई लोगों ने सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग की. ये मामला 2021 में उत्तरप्रदेश (Uttar Pradesh) के कासगंज (Kasganj) का है, जहां दो लोगों ने 11 साल की बच्ची के साथ मारपीट की, उसके स्तनों को पकड़ा, उसके पाजामे का नाड़ा फाड़ दिया और उसे पुलिया के नीचे खींचने की कोशिश की. यह तथ्य यह निष्कर्ष निकालने के लिए पर्याप्त नहीं है कि आरोपी व्यक्तियों ने पीड़िता के साथ रेप करने का निश्चय किया था. View this post on Instagram Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन खनन माफिया के हौसले बुलंद, प्रतिबंध के बावजूद कर रहे थे नलकूप खनन,,, पुलिस की तत्परता से गाड़ी जप्त. क्या अब हम ‘सच्चा इतिहास’ फ़िल्मों के ज़रिये पढ़ेंगे!