जिला सहकारिता विभाग और जिला महाप्रबंधक द्वारा केंद्र बनाए जाने की अनुसंशा।

रीवा/ रीवा जिले के सहकारिता विभाग में जमकर भ्रष्टाचार करने के आरोप लगते जा रहे है लेकिन जांच में न ही कोई कार्यवाही की जा रही है और न ही दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करायी जा रही है जबकि हर वर्ष धान/गेंहू खरीदी में शार्ट पाया जा रहा है परन्तु ये सब जांच के नाम पर भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाता है।
अभी हाल ही में धान खरीदी में 50 खरीदी केंद्रों से ज्यादा केंद्रों में हजारों कुंटल धान शार्ट पाई गई। जिला कलेक्टर द्वारा एफआईआर और शार्ट धान की राशियों को जमा करने का आदेश जारी किया गया लेकिन अभी तक मे कितनी राशि जमा हुई कोई बताने को तैयार नही है।

यदि सही ढंग से जांच किया जाए तो करोड़ो का भ्रष्टाचार सामने आ सकता है जिसमे कई खरीदी केंद्र के जिम्मेदार जेल भी जा सकते है परंतु जिला  सहकारिता विभाग के उच्च अधिकारियों और जिला महाप्रबंधक के मिलीभगत से  डिफाल्टर समिति और समित प्रबंधको को ज़िम्मेदारी दी जा रही है।
जिसके लिए कई बार जिला कलेक्टर और कमिश्नर को जांच हेतु आवेदन दिया गया लेकिन किसी के द्वारा कोई कार्यवाही नही की जा रही है जिस बजह से भ्रष्टाचारियों के हौशले बुलंद है।
और विभाग डिफाल्टर समितियो को खरीदी केंद्र की जिम्मेदारी देता जा रहा है।

इसी तरह का मामला सेवा सहकारी समिति मर्यादित चौखण्डी का है जहा पर वर्ष 2014 में धान उपार्जन में  13849342 रुपये एवं गेहूँ उपार्जन में 2342345 रुपये का भ्रष्टाचार करने सामने आया था जो कुल (एक करोड़ इकसठ लाख इक्यानबे हजार छः सौ सत्तासी रूपये) डिफाल्ट पाया गया है। जिसमे अनियमितता एवं खरीदी मात्रा के विरुद्ध 05 प्रतिशत से कम मात्रा भण्डारण हेतु प्रमुख सचिव खाद्य द्वारा पत्र क्र./5-31/29-1/ भोपाल दिनांक 27/12/2014 में निर्देश दिये गए है कि ब्लैक लिस्ट समितियों को केन्द्र नहीं बनाया जाये उन्हें बन्द करने की सहमति व्यक्त की गई।

इसके बाद कार्यालय कलेक्टर का पत्र क्र. 1886/खाद्य रीवा दिनांक 14/01/2015 से समिति चौखण्डी एवं अन्य समितियों को आपात्र डिफाल्टर घोषित किया गया है।
लेकिन सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जिला सहकारिता उपायुक्त और जिला सहकारी महाप्रबंधक रीवा के द्वारा डिफाल्टर समिति चौखंडी पर मेहरबानी करते हुए खरीदी केंद्र बनाए जाने की अनुसंशा की गई है। हकीकत क्या
है ये तो जांच उपरांत ही कहा जा सकता है यदि ऐसा किया गया है तो प्रमुख सचिव के आदेशों की अवहेलना है।


   
जिसके लिए शिकायतकर्ता शिवकुमार कुशवाहा ने प्रमुख सचिव और जिला कलेक्टर रीवा को विषयांन्तर्गत आवेदन दिया गया है कि गेहूँ/ धान उपार्जन वर्ष 2024-25 हेतु समिति चौखण्डी जो विगत कई वर्षों से आपात्र एवं डिफाल्टर है समिति को उपार्जन केन्द्र न बनाया जाय। यदि केन्द्र बनाया जाता है तो खरीदी केन्द्रों में अनियमितता होने की पूर्ण संभावना है।

साथ ही गेंहूँ /धान उपार्जन की सार्टेज राशि गेहूँ एवं धान में कितनी राशि रोकी गई है महाप्रबंधक जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक मर्यादित रीवा एवं उपायुक्त सहकारिता रीवा को जानकारी मगाई जाने हेतु को निर्देशित किया जाय।




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By kushmendra

Journlist- NNW News(News National World)

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