एंटी करप्शन ब्यूरो कोर्ट ने पूर्व सेबी प्रमुख माधबी पुरी बुच और अन्य प्रमुख लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। अब इस आदेश के आने के बाद मार्केट रेगुलेटर सेबी कानूनी कदम उठाने जा रहा है। मुंबई की एक विशेष एंटी करप्शन ब्यूरो अदालत ने मार्केट रेगुलेटर सेबी की पूर्व प्रमुख माधबी पुरी बुच के खिलाफ ये आदेश दिया है। ये मामला सन 1994 में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज में एक कंपनी को लिस्टिंग से जुड़ा है। इसकी अनुमति देने में कथित अनियमितताओं और रेगुलेटरी निगरानी में कथित नाकामी के आरोप हैं। अदालत ने कहा कि पहली नजर इसमें नियामक चूक और मिलीभगत के प्रथम दृष्टया सबूत हैं। विशेष न्यायाधीश शशिकांत एकनाथ बांगर ने 1 मार्च को अपने आदेश में कहा कि पहली नजर में इस मामले में रेगुलेटरी चूक और मिलीभगत के सबूत हैं जिसके लिए निष्पक्ष जांच की जरूरत है। अदालत ने कहा कि वह जांच की निगरानी करेगा। साथ ही 30 दिनों के भीतर मामले की स्थिति रिपोर्ट मांगी गई है। अदालत ने आदेश में यह भी कहा है कि आरोपों से अपराध का पता चलता है जिसके लिए जांच जरूरी है। आदेश में कहा गया है कि आरोपों से एक संज्ञेय अपराध का पता चलता है, जिसके लिए जांच की आवश्यकता है। यानी, आरोप ऐसे हैं कि पुलिस को जांच करनी ही होगी। न्यायाधीश ने कहा कि आरोपों की गंभीरता, लागू कानूनों और स्थापित कानूनी मिसालों को ध्यान में रखते हुए, यह अदालत धारा 156 (3) सीआरपीसी के तहत जांच का निर्देश देना उचित समझती है। हालांकि सेबी न जारी बयान में कहा कि वह इस आदेश को चुनौती देने के लिए उचित कानूनी कदम उठाएगा और सभी मामलों में उचित नियामक अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। बुच ने हाल में अपना 3 साल का कार्यकाल पूरा किया है। उनकी जगह अब तुहीन कांत पांडे को सेबी का नया चीफ बनाया गया है। विशेष अदालत का यह आदेश सपन श्रीवास्तव की निजी शिकायत पर आया है। श्रीवास्तव ने कहा कि उन्होंने बुच और अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की थी। अन्य लोगों में अश्विनी भाटिया, अनंत नारायण और कमलेश वार्ष्णेय सेबी के पूर्णकालिक सदस्य हैं। प्रमोद अग्रवाल बीएसई के प्रेजिडेंट और पब्लिक इंटरेस्ट डायरेक्टर तथा सुंदररामन राममूर्ति एमडी और सीईओ हैं। अदालत ने कहा कि वह खुद इस जांच की निगरानी करेगी। सेबी का कहना है कि जिन अधिकारियों पर आरोप हैं, वो उस समय इन पदों पर नहीं थे। फिर भी, अदालत ने सेबी की बात सुने बिना ही एफआईआर का आदेश दे दिया। श्रीवास्तव ने कहा कि इन लोगों के खिलाफ बड़े पैमाने पर वित्तीय धोखाधड़ी, नियमों का उल्लंघन करने और भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए जांच की मांग की थी। डोंबिवली के रहने वाले श्रीवास्तव ने कहा कि उन्होंने पुलिस और सेबी से कई बार शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसलिए उन्हें अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा। अदालत ने नोट किया कि आरोप सेबी अधिनियम, 1992 का पालन किए बिना अधिकारियों की मिलीभगत से स्टॉक एक्सचेंज पर एक कंपनी की लिस्टिंग से संबंधित हैं। आरोप है कि कंपनी को गलत तरीके से लिस्ट करवाया गया, जिसमें सेबी के अधिकारियों ने भी मदद की। सेबी के अधिकारियों ने अपना काम ठीक से नहीं किया और एक ऐसी कंपनी को लिस्ट होने दिया जो नियमों पर खरी नहीं उतरती थी। इधर बीएसई का कहना है कि कोर्ट पेपर्स में काल्स रिफाइनरीज का नाम सामने आया है। कंपनी की लिस्टिंग 1994 में हुई थी। एक्सचेंज ने अपने बयान मे कहा है कि जिन अधिकारियों का नाम है वो सभी कंपनी की लिस्टिंग के दौरान चिन्हित पद पर नहीं थे और कंपनियों के साथ भी नहीं जुड़े हुए थे। View this post on Instagram मुंबई की विशेष कोर्ट ने ACB (एंटी करप्शन ब्यूरो) को पूर्व SEBI प्रमुख माधबी पुरी बुच के खिलाफ मामला दर्ज करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने माधबी पुरी बुच के साथ SEBI के कई अन्य अधिकारियों के खिलाफ भी FIR के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि “शेयर बाजार में धोखाधड़ी, भ्रष्टाचार के मामले में गंभीर सबूत मौजूद हैं।”आरोप हैं कि SEBI ने एक ऐसी कंपनी को लिस्टिंग की इजाजत दी, जो मानकों को पूरा करने में नाकाम रही थी। SEBI के इस फैसले से बाजार में हेरफेर हुआ और निवेशकों को नुकसान हुआ। आरोप यह भी है कि SEBI और कई कॉर्पोरेट संस्थाओं के बीच मिलीभगत थी, जिसके कारण Insider trading हुई और पैसे का गबन किया गया।इससे पहले भी माधबी पुरी बुच पर आरोप लगे थे कि –• माधबी और उनके पति धवल बुच अडानी ग्रुप से जुड़े ऑफशोर फंड में इन्वेस्टर थे• बुच दंपत्ति के पास बरमूडा और मॉरीशस के उन ऑफशोर फंड्स में हिस्सेदारी थी, जो अडानी के भाई विनोद अडानी से जुड़े थे• SEBI में रहने के दौरान माधबी बुच की कंस्टल्टिंग फर्म ‘Agora Partners’ में हिस्सेदारी थी, लेकिन उन्होंने अपने इन निवेशों के बारे में खुलासा नहीं किया था साफ है कि SEBI प्रमुख रहते हुए माधबी पुरी बुच ने जमकर भ्रष्टाचार किया और इसमें मोदी सरकार भी शामिल है। इसीलिए, हमारी मांग है कि भ्रष्टाचार के इस मामले में निष्पक्षता के साथ जांच की जाए और जो भी दोषी हों, उन पर कड़ी कार्रवाई की जाए। कोर्ट के आदेश के बाद हमें उम्मीद है कि इस भ्रष्टाचार से जुड़े लोगों का चेहरा और सच्चाई पूरे देश के सामने आएगी। Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन विनाशकारी विकास की जनक हैं बीजेपी कांग्रेस-अमरेश पटेल 90 फीसदी गरीब …. ये कैसा विकसित भारत …?— अमीर हो रहे और अमीर
You must be logged in to post a comment.