(न्यूज़ नेशनल वर्ल्ड डेस्क) मणिपुर में आखिरकार राष्ट्रपति शासन लागू हो ही गया। एन बीरेन सिंह के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे के बाद अब राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया है। साल 2022 में मणिपुर में भारतीय जनता पार्टी ने अपनी सरकार बनाई थी। 60 विधानसभा सीटों वाले राज्य की विधानसभा में बीजेपी ने 32, कांग्रेस ने 5 और अन्य ने 23 सीटों पर जीत दर्ज की थी। नतीजों के करीब पांच महीने बाद जनता दल यूनाइटेड के जीते हुए 6 में से 5 विधायकों ने बीजेपी ज्वाइन कर ली थी। मणिपुर में बीजेपी के पास अपने 37 विधायक हैं, पूर्ण बहुमत है। करीब तीन साल का कार्यकाल बचा है, बावजूद इसके राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाना पडा। मतलब साफ है कि यहां भाजपा की अंदरूनी लड़ाई खुलकर बाहर आ गई है। दूसरा ये कि भाजपा के डबल इंजन के सरकार वाले नारे की भी हवा निकलती दिख रही है। पीएम नरेन्द्र मोदी के अमेरिका प्रवास से ठीक पहले मणिपुर में एन वीरेन सिंह के इस्तीफे और राष्ट्रपति शासन लगाने के पीछे भी अमेरिका का कथित भय नज़र आ रहा है। सूबे में मई 2023 से राज्य में जातीय संघर्ष चल रहा है। इसमें ढाई सैकड़ा से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। हिंसा की वजह से मैतेई और कुकी, दोनों समुदाय के हजारों लोगों को विस्थापित होना पड़ा है। 9 फरवरी को बीरेन सिंह ने राज्यपाल अजय कुमार भल्ला से मुलाकात कर मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया था। इसके बाद से ही नए मुख्यमंत्री के नाम पर सहमति बनाने के लिए बीजेपी के पूर्वोत्तर प्रभारी संबित पात्रा विधायकों और राज्यपाल के साथ बैठकें कर रहे थे। ऐसा माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री को लेकर सहमति नहीं बनने के कारण राज्य में यह कदम उठाया गया है। 60 सदस्यों वाली विधानसभा में बीजेपी के पास 37 विधायक और सहयोगी दलों के 11 विधायक हैं। बावजूद इसके सीएम के नाम पर सहमति नहीं बन सकी और राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाया दिया गया है। मणिपुर में विधानसभा का अंतिम सत्र 12 अगस्त 2024 को पूरा हुआ था और अगला सत्र छह महीने के अंदर बुलाया जाना था, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। संविधान के अनुच्छेद 174(1) के मुताबिक विधानसभा के दो सत्रों के बीच छह महीने से ज्यादा का अंतर नहीं हो सकता है।मई 2023 से मणिपुर के अंदर हिंसा जारी है। कई विधायक अनेक बार दिल्ली आकर केंद्रीय नेतृत्व के सामने लगातार अपनी नाराजगी दर्ज करवा चुके हैं। समाधान ना निकलने की स्थिति में प्रदेश बीजेपी के अंदर ही कुर्सी की लड़ाई शुरू हो गई। सन 2014 में नरेंद्र मोदी के केंद्र की सत्ता संभालने के बाद यह पहला अवसर है जब उन्हें अपने ही शासन वाले राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने को मजबूर होना पड़ा है। यदि पहले ही सीएम बदल दिया जाता तो ये स्थिति नहीं बनती। मणिपुर के अंदर बीजेपी की लीडरशिप बंटी हुई है। पार्टी के अंदर ही बीरेन सिंह को लेकर गुटबाजी हो रही थी। जानकारों का कहना है कि कुकी लोग बीरेन और उनके लोगों को नहीं चाहते, वहीं मैतई किसी कुकी नेतृत्व को नहीं देखना चाहते। बीजेपी के भी कई कुकी विधायक चुनकर आए हैं। पार्टी के सामने चुनौती किसी ऐसे नेता को चुनने की थी, जो दोनों पक्षों को संभाल पाए, लेकिन किसी एक नेता पर सहमति नहीं बन पाई। View this post on Instagram मणिपुर में अगला विधानसभा चुनाव साल 2027 में है। अभी सरकार चलाने के लिए बीजेपी के पास राज्य में करीब तीन साल बचे हुए हैं। मणिपुर के राज्यपाल ने 10 फरवरी से शुरू होने वाले विधानसभा सत्र को पहले ही अमान्य घोषित कर दिया था। सूत्रों का कहना है कि 10 फरवरी से शुरू होने वाले सत्र में बीरेन सिंह के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लगाने की तैयारी हो रही थी। भाजपा नेतृत्व को डर था कि बीरेन सिंह की वजह से फ्लोर टेस्ट की स्थिति में उनके कई विधायक पार्टी व्हिप की अवहेलना कर सकते हैं। केंद्र में अपनी सरकार होते हुए ऐसा होना पार्टी के लिए छीछालेदर का कारण बन सकता था।अक्टूबर 2024 में भी सत्तारूढ़ बीजेपी के 19 विधायकों ने पीएम नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखकर बीरेन सिंह को मुख्यमंत्री पद से हटाने की मांग की थी। बीरेन सिंह ने मणिपुर विधानसभा में अविश्वास प्रस्ताव में हार के डर से इस्तीफा दिया है। हाल ही में उनका एक ऑडियो टेप लीक हुआ था, जिसका संज्ञान सुप्रीम कोर्ट ने लिया है। ऐसे में अब भाजपा के लिए भी उन्हें बचाना मुश्किल लग रहा था। कहा ये भी जा रहा है कि भाजपा ने अपनी साख बचाने के लिए बीरेन सिंह का इस्तीफा लिया। अगर विधानसभा का सत्र शुरू होता, तो सबसे पहले विपक्ष अविश्वास प्रस्ताव रखता और ऐसे में सरकार गिर जाती। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के अमेरिका प्रवास के दौरान अडानी और मणिपुर दोनों पर सवाल हो सकते थे। मणिपुर में चर्चों और ईसाइयों पर हुए हमलों को लेकर ईसाई बाहुल्य देशों में इसकी प्रतिक्रिया देखने को मिल सकती थी। हो सकता है कि इस वजह से भी अमेरिका यात्रा के पहले बीरेन सिंह का इस्तीफा लिया गया। साल 2022 में मणिपुर में भारतीय जनता पार्टी ने अपनी सरकार बनाई थी। 60 विधानसभा सीटों वाले राज्य की विधानसभा में बीजेपी ने 32, कांग्रेस ने 5 और अन्य ने 23 सीटों पर जीत दर्ज की थी। नतीजों के करीब पांच महीने बाद जनता दल यूनाइटेड के जीते हुए 6 में से 5 विधायकों ने बीजेपी ज्वाइन कर ली थी। मणिपुर में बीजेपी के पास अपने 37 विधायक हैं, पूर्ण बहुमत है। करीब तीन साल का कार्यकाल बचा है, बावजूद इसके राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाना पडा। नरेंद्र मोदी के 11 साल के शासन में यह पहली बार है जब पार्टी की अंदरूनी लड़ाई इस तरह से एक्सपोज हुई है। राष्ट्रपति शासन लगने के बाद पीएम मोदी की सख्त प्रशासक वाली छवि धूमिल हुई है। डबल इंजन की सरकार के नारे की हवा निकल गई है। कहा ये भी जा रहा है कि मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लगने के बाद ज्यादा कुछ बदलने वाला नहीं है, क्योंकि पहले भी मणिपुर में सरकार तो केंद्र से ही चल रही थी। इसके अलावा भाजपा पहले कांग्रेस पर अनुच्छेद 356 के दुरूपयोग का आरोप लगाती थी लेकिन अब उसे भी इसका जवाब देना पड़ सकता है। फरवरी 2023 में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब देते हुए पीएम मोदी ने कांग्रेस पर अनुच्छेद 356 (राष्ट्रपति शासन) के दुरुपयोग का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था, वो कौन लोग हैं, जिन्होंने अनुच्छेद 356 का दुरुपयोग किया? एक प्रधानमंत्री ने अनुच्छेद 356 का 50 बार दुरुपयोग किया और वो नाम है श्रीमती इंदिरा गांधी. विपक्षी और क्षेत्रीय दलों की सरकारों को गिरा दिया। विजेता कहती हैं, अब विपक्ष भी बीजेपी पर भी अनुच्छेद 356 के दुरुपयोग का आरोप लगाएगा। मालूम हो कि मणिपुर में 3 मई 2023 से कुकी-मैतेई समुदाय के बीच हिंसा जारी है। मैतेई-कुकी समुदाय के बीच भड़की हिंसा को 600 से ज्यादा दिन बीत चुके हैं। मणिपुर में मई 2023 से अक्टूबर 2023 तक गोलीबारी की 408 घटनाएं दर्ज की गईं। नवंबर 2023 से अप्रैल 2024 तक 345 घटनाएं हुईं। मई 2024 से अब तक 112 घटनाएं सामने आई हैं। 3 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर हिंसा पर सुनवाई की थी। कुकी ऑर्गेनाइजेशन फॉर ह्यूमन राइट्स ट्रस्ट की तरफ से कोर्ट में याचिका दाखिल करके कुछ ऑडियो क्लिप्स की जांच की मांग की थी। दावा किया गया था कि ऑडियो में सीएम कथित तौर पर कह रहे हैं कि उन्होंने मैतियों को हिंसा भड़काने की अनुमति दी और उन्हें बचाया। बहरहाल, मणिपुर में भले ही राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया हो लेकिन मोदी सरकार की पहली प्राथमिकता सूबे में अमनो-चैन की बहाली ही होना चाहिए। (न्यूज़ नेशनल वर्ल्ड डेस्क) Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन शिवाय गुप्ता मिल गया है, उसकी माता-पिता से बात भी करा दी गई है – मुख्यमंत्री डॉ. यादव शहर में नशे का कारोबार जोरों से फल फूल रहा है, पुलिस की मुहिम बे असर नजर आ रही…