बिहार में अंडरवर्ल्ड में ऐसे कई नाम हैं जो राजनीतिक ताल्लुकात रखते हैं…. आनंद मोहन आनंद मोहन, जिसकी वजह से नीतीश सरकार ने जेल नियमों में बदलाव कर दिए। एक समय था जब कोसी इलाके में आनंद मोहन का दबदबा था और उसकी सीधी टक्कर तत्कालीन पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव से थी. आनंद मोहन को डीएम जी कृष्णैया की हत्या के आरोप में दोषी ठहराया गया और एक लंबा समय जेल में बिताया. उस दौर में आनंद मोहन को बिहार के राजपूतों का नेता माना जाता था और वह अगड़ी जातियों का नेतृत्व करते थे. अनंत सिंह अनंत सिंह, उर्फ छोटे सरकार… एक समय के बाहुबली दिलीप सिंह के छोटे भाई हैं. दिलीप सिंह की मृत्यु के बाद अनंत सिंह ने उनकी गद्दी संभाली और बाद में मोकामा से विधायक बने. अनंत सिंह को एके-47 कांड में सजा हुई, जिसके बाद उनकी विधायकी चली गई. एक समय में अनंत सिंह नीतीश कुमार के करीबी सहयोगी माने जाते थे पप्पू यादव पप्पू यादव, जो 1990 के दशक में “रॉबिनहुड” के रूप में चर्चित हुए. मूलतः मधेपुरा के रहने वाले हैं. खासतौर पर आनंद मोहन के साथ अपने विवाद के कारण चर्चा में आए. जहां आनंद मोहन अगड़ी जातियों की राजनीति करते थे, वहीं पप्पू यादव पिछड़ी जातियों का नेतृत्व करते थे. एक समय था जब दोनों के समर्थकों के बीच गैंगवार आम बात हो गई थी. पप्पू यादव पर सीपीआई के विधायक अजित सरकार की हत्या का आरोप लगा था, जिसके लिए उन्हें उम्रभर की सजा सुनाई गई थी, लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया. प्रभुनाथ सिंह प्रभुनाथ सिंह, जो एक समय में लालू प्रसाद यादव के करीबी सहयोगी रहा, छपरा, सिवानगंज, सिवान और गोपालगंज में खासा दबदबा रखता था. मूल रूप से छपरा का रहने वाला है प्रभुनाथ सिंह. यह माना जाता है कि उसने छपरा की राजनीति की दिशा और दशा तय की. 1990 में विधायक बना और नीतीश कुमार और लालू प्रसाद यादव दोनों के साथ करीबी तौर पर काम किया. बाद में पूर्व विधायक अशोक सिंह हत्याकांड में सजा हुई और वर्तमान में हजारीबाग जेल में बंद हैं राजन तिवारी राजन तिवारी, जो एक समय में सूरजभान सिंह का करीबी सहयोगी रहा. उसका कारोबार रेलवे और स्क्रैप के धंधे में फैला हुआ था. उसका प्रभाव क्षेत्र केवल बिहार तक ही सीमित नहीं था, बल्कि उत्तर प्रदेश और नेपाल में भी था. 2005 में किडनैपिंग का आरोप लगा और वर्तमान में यूपी के फर्रुखाबाद जेल में बंद हैं. राजनीतिक विरासत अब भाई राजू तिवारी संभाल रहे हैं, जो चिराग पासवान की पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हैं. रमा सिंह बिहार के वैशाली के रमा सिंह इस इलाके के सबसे बड़े बाहुबलियों में माने जाते थे. वह कई बार महनार सीट से विधायक बने. 2014 में मोदी की लहर में भी उन्होंने आरजेडी के कद्दावर नेता रघुवंश प्रसाद सिंह को लोकसभा चुनाव में हराया था. रमा सिंह पर अपहरण के कई मामले दर्ज रहे हैं और हाल ही में वह छत्तीसगढ़ के एक बड़े कारोबारी के अपहरण कांड में जेल की सजा काटकर बाहर आए हैं. मोहम्मद शहाबुद्दीन मोहम्मद शहाबुद्दीन बिहार के बाहुबलियों में सबसे बड़े नामों में से एक था. सिवान के इस बाहुबली का इस पूरे इलाके में इतना दबदबा था कि उसके बिना कोई कारोबार नहीं होता था, न ही कोई ज़मीन की खरीद-फरोख्त, और न ही कोई राजनीति में कदम रखता था. शहाबुद्दीन अपने समय में लालू यादव का काफी करीबी और भरोसेमंद सहयोगी था. शहाबुद्दीन की मौत दिल्ली के दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल में कोरोना संक्रमण के कारण हुई थी सोनू-मोनू गैंग सोनू-मोनू 2009 से ही अपराध की दुनिया में सक्रिय हैं. पहले सोनू-मोनू गैंग मोकामा और आसपास के इलाकों से गुजरने वाली ट्रेनों में लूटपाट किया करता था. इसके बाद उन्होंने अपने क्षेत्र में अपना प्रभाव बढ़ाना शुरू किया. कहा जाता है कि धीरे-धीरे ये अपने गांव से निकलकर यूपी में मुख्तार अंसारी गैंग तक पहुंचे. बताया जाता है कि सोनू-मोनू ने अनंत सिंह के इलाके में अपनी धाक जमाने के लिए मुख्तार अंसारी के गिरोह से संपर्क किया था. सुनील पाण्डेय रोहतास का सुनील पाण्डेय… जो आज बिहार के बड़े बालू व्यवसायियों में से एक माने जाते हैं. कई हत्याकांडों के आरोपी रहे हैं और व्यापार में भी उनका खासा दबदबा रहा है. उनका प्रभाव क्षेत्र भोजपुर, रोहतास, कैमूर और का इलाका रहा है. पीरो से पहली बार विधायक के तौर पर राजनीति में कदम रखा और आज भी राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय हैं. अब उनकी राजनीतिक विरासत उनके बेटे ने संभाल ली है, जो वर्तमान में विधायक बने हैं. सूरजभान सिंह सूरजभान सिंह बिहार के प्रमुख बाहुबलियों में से एक रहे हैं. एक समय था जब बिहार, झारखंड और पूर्वाचल के इलाके में रेलवे और स्क्रैप के टेंडरों में उनकी मजबूत पकड़ थी. सूरजभान सिंह विधायक और फिर सांसद बने. अब वह अपने कारोबारी मामलों पर ध्यान दे रहे हैं और अपनी राजनीतिक विरासत अपनी पत्नी और भाई को सौंप चुके हैं. काली पांडेय काली पांडेय, जो मूलत गोपालगंज का रहने वाला है. बाहुबलियों का गुरु माना जाता था. व्यवसाय और राजनीति दोनों में मजबूत पकड़ थी. 1984 में काली पांडेय ने लोकसभा चुनाव में जीत हासिल की काली पांडेय पर कई गंभीर आरोप भी लगे, जिनमें जेल जाना पड़ा. Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन महाकुंभ का महाराजनीतिकरण: क्या होगा अंजाम? उज्जैन यातायात पुलिस द्वारा जिले में यातायात सड़क सुरक्षा माह…
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