इस दुनिया में ऐसे ज़ालिम लोग भी पड़े हैं,हमसे करवा ही लेते हैं ऐसे बहुत सारे काम!वे मेहनताना भी नहीं देते और नोचने खड़े हैं। क्या बात करें इनकी सर पे ही आ के खड़े हैं,हमको दिखा देते हैं बिना यात्रा के चारों धाम!हम जा रहे घर, रास्ता है जाम वे रोकने खड़े हैं। चित भी मेरी पट भी मेरी की तर्ज पर ये अड़े हैं,हमको ही दिखाते आँख, ऊंची करते हैं नाक!हमारी हस्ती मिटाने पूरी ताकत झोंकने चले हैं। धन की माया में गठरी लेकर आकंठ डूब चले हैं,अब पूरे देश में हो गया है इनका जबरदस्त नाम!द्रोहियों के आगे सिर झुका तलवे चाटने चले हैं। संजय एम. तराणेकर(कवि, लेखक व समीक्षक)इन्दौर-452011 (मध्यप्रदेश)मो. 98260-25986 Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन जनता को अधिकारहीन करने का खेल : अधिकार-आधारित मनरेगा और उसके प्रति शत्रु भाव क्राईम ब्रांच इंदौर पुलिस की कार्यवाही में अवैध मादक पदार्थ MD drugs के साथ 02 आरोपी गिरफ़्तार।