यह कलम भी बहुत बोलती है,शब्दों से सभी को टटोलती है।ये राज दिलों के खोल देती है,अंतस मन को भी टटोलती है!सबके हृदय को झकझोरती है। यह कलम भी बहुत बोलती है,शब्दों से सभी को टटोलती है।नहीं होता इसका कोई भी कद,लिखने में ही रहती हरदम रत!ना होती कोई हद ये है अनहद। यह कलम भी बहुत बोलती है,शब्दों से सभी को टटोलती है।अब कागज की जरूरत नहीं,*स्वरदूत हो गया सबका स्वामी!बस यही है इसकी बड़ी खामी। यह कलम भी बहुत बोलती है,शब्दों से सभी को टटोलती है।कलम की टंकार गूँज लगातार,यूँ जब कभी पकड़ती रफ्तार !झनझनाती सबके दिलों के तार।(*स्वरदूत यानि मोबाइल) संजय एम. तराणेकर(कवि, लेखक व समीक्षक)इन्दौर-452011 (मध्यप्रदेश)मो. 98260-25986 Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन धान खरीदी केंद्रों में अधिकारियों का आंख मिचौली का खेल जारी भाजपा सरकार ने समर्पित रूप से किया कामः रीती