हे पिता, इतनी जल्दी क्यों हो गए मुझसे जुदा,मैं भी तो आपकी बहुत-सी बातों पर था फिदा।मैंने सीखा था आपसे उंगली पकड़कर चलना,आपका गोद में उठाकर मुझे ऊपर उछालना!फिर माँ का धक्क रहकर घबराकर चिल्लाना। हे पिता, इतनी जल्दी क्यों हो गए मुझसे जुदा,मैं भी तो आपकी बहुत-सी बातों पर था फिदा।मेरा बीमार होना, माँ के साथ “रतजगा” करना,मेरी गलती होने पर मारने का अभिनय करना!किसी से विवाद होने पे मेरे साथ खड़े हो जाना। हे पिता, इतनी जल्दी क्यों हो गए मुझसे जुदा,मैं भी तो आपकी बहुत-सी बातों पर था फिदा।याद आता है विद्यालय आकर टिफिन दे जाना,नौकरी से छुट्टी लेकर मुझे घर पर छोड़ आना!शाम होते आपका आना और मेरा लिपट जाना। हे पिता, इतनी जल्दी क्यों हो गए मुझसे जुदा,मैं भी तो आपकी बहुत-सी बातों पर था फिदा।वह दाढ़ी करना, साबुन से मेरे गाल पर लगाना,साइकिल के डंडे पे छोटी सीट लगाकर बिठाना!मेरे थक जाने पर गोद में उठा, कंधे पर ले लेना। हे पिता, इतनी जल्दी क्यों हो गए मुझसे जुदा,मैं भी तो आपकी बहुत-सी बातों पर था फिदा।याद आती है अब भी आपकी एक-एक अदा,हे ईश्वर एक बार फिर कर दे मिलाने का वादा!मैं ज़ब कभी जन्म लूं, मेरे पिता वहीं रहें सदा। “संजय एम. तराणेकर”(कवि, लेखक व समीक्षाक)इन्दौर-452011 (मध्यप्रदेश)मो. 98260-25986 Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन विभिन्न प्रकार की थेरेपियो द्वारा यूनियन कार्बाइड / डाव कैमीकल के ज़हरो से पीड़ित परिवारों में जन्मे जन्मजात विकलांग बच्चों का पुनर्वास संभव : चिंगारी ट्रस्ट केंद्रीय मंत्री सिंधिया व उनके समर्थकों, पुलिस पर मधुमक्खी ने किया हमला…