मोहम्मद शाहिद। चिंगारी पुनर्वास केंद्र निरंतर 18 वर्षों से यूनियन कार्बाइड / डाव कैमीकल के जहरो से पीड़ित परिवारों कि दुसरी और तीसरी पीढ़ी में जन्मे जन्मजात विकलांग बच्चों के पुनर्वास का कार्य कर रहा है। यह बच्चे विभिन्न प्रकार की विकलांगताओं से ग्रसित हैं जैसे की सेरेब्रल पाल्सी, बौद्धिक विकलांगता, आटिज्म, श्रवण बाधित, डाउन सिन्ड्रोम, सीज़र डिसआर्डर आदि।चिंगारी ट्रस्ट में 1300 से भी अधिक बच्चे पंजिकृत है। वर्त्तमान में उपलब्ध सीमित स्त्रोतों से हम इनमे से केवल 300 बच्चों को ही अपनी नियमित सेवा दे पा रहे हैं। लगभग 200 बच्चे रोज़ाना चिंगारी ट्रस्ट में आते हैं, जिन्हें घर से लाने ले जाने के लिए वैन सुविधा, फिजियोथैरेपी, ऑक्यूपेशनल थैरेपी, स्पीच थेरेपी, विशेष शिक्षा, संगीत गायन, खेल कूद, आहार, दवाइयां आदि सुविधायें निशुल्क प्रदान की जाती है।चिंगारी के पिछले तीन सालों के आंकड़ों पे नज़र डाली जाये तो केवल इन तीन सालों में ही 197 नए बच्चों का पंजीयन हुआ है। जिनमें आधे से ज्यादा बच्चे पंजीयन के समय तीन साल से भी कम उम्र के थे, जो की सेरेब्रल पाल्सी डाउन सिन्ड्रोम, सीज़र डिसऑर्डर और अन्य गंभीर विकलांगताओ से ग्रसित है।विकलांग बच्चे को यदि आवश्यकता अनुसार सही समय पर इलाज, थेरेपियाँ नहीं मिले तो बच्चे में परेशानियां और बढ़ जाती है, और उसका रहन-सहन, रोज़मर्रा के काम बातचीत, चलना फिरना, समझना, समाज में रहना आदि नहीं कर पायेगा। यदि समय रहते विकलांग बच्चे को फिजियोथेरेपी, ऑक्यूपेशनल थेरेपी, स्पीच थेरेपी, विशेष शिक्षा दी जाएँ, तो उसे समाज में जीने लायक बनाया जा सकता है। वे किसी पर बोझ न बनते हुए एक आम इन्सान की तरह अपना जीवन जी सकते है और चिंगारी ने सरकार के सामने यह संभव कर एक उदाहरण पेश किया है।नौशीन खान (स्पीच थेरेपिस्ट) ने कहा कि ‘हमारे विभाग मे रोज़ाना 7 स्पीच थेरापिस्ट, लगभग 120 बच्चों को स्पीचथैरेपी देते हैं। इन बच्चों में मुख्यता लार बहने, खाना चबाने और निगलने, सुनने एवं सही से या कुछ भी न बोल पाने की समस्याएँ होती हैं। स्पीच थेरेपी से इन बच्चों के जीवन में आये बदलाव की बात की जाये तो, पिछले तीन सालों में 26 बच्चों की लार बहना बंद हो गयी है। 42 बच्चे खाना चबाने – निगलने में सक्षम हो गये है। 42 बच्चे जो पहले कभी एक शब्द नहीं बोल पाते थे अब वे बच्चे बातचीत करने योग्य हो गये है। विशेष शिक्षक सूर्यप्रकाश सिंह ने जानकारी दी हमारे विभाग में रोज़ाना 6 विशेष शिक्षक लगभग 130 बच्चों को विशेष शिक्षा दे रहे है। चिंगारी में नीप्मेड (NIEPMD) द्वारा बनायी गयी एफ ए सी पी चेकलिस्ट के अनुसार इन बच्चों को विशेष शिक्षा दी जाती है। हमारा प्रयास रहता है की इन बच्चों की रोजमर्रा की ज़िन्दगी में किये जाने वाले काम जैसे की कपडे पहनना, टॉयलेट ट्रेनिंग, ब्रश करना आदि स्वयं से करना एवं सामान्य स्कूल जाने योग्य बना सके। पिछले तीन वर्षों का आकलन किया जाये तो 20 बच्चे नार्मल स्कूल जाने लगे है | 16 बच्चे सामाजिक कौशल में पहले से बेहतर हो गये है। 14 बच्चे जो पहले पेंसिल नहीं पकड़ पाते थे जोकि अब पकड़ने लगे है।अपने कार्य के बारे में बताते हुए फिजियो थैरेपिस्ट ऋषि शुक्ला कहते है- रोज़ाना लगभग 115 बच्चों को फिजियों थैरेपी दी जा रही रही है। अगर पिछले तीन सालों की बात की जाये तो नियमित फिजियोथेरेपी मिलने से 71 बच्चे जो कभी गर्दन भी नहीं संभाल पाते थे, अब बैठने लगे है। 68 बच्चे पहले के अपेक्षा काफी बेहतर तरीके से चलने लगे है, और 44 बच्चे जो पहले उठने बैठने, चलने-फिरने में दुसरो पर निर्भर थे, अब वे शारीरिक रूप से आत्मनिर्भर हो गये है।अपने कार्य के बारे में बताते हुए ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट कंचन साहू ने कहा- ऑक्यूपेशनल थैरेपी में रोज़ाना लगभग 85 बच्चे आते है। हमारे विभाग में मुख्यतः सेंसरी इंटीग्रेशन से जुडी समस्यों पे काम किया जाता है। जैसे की 29 बच्चे ऐसे हैं जो पहले केवल 2 से 3 घंटे के लिए सोते थे, वो आज 7-8 घंटे आराम से सोने लगे हैं। 26 बच्चे जो की अति उत्तेजित व्यव्हार करते थे, जैसे की एक सेकंड के लिए भी स्थिर बेठते नहीं थे, उनके व्यव्हार में अब ठेराव आया है। 9 बच्चों की की समझ पहले से बेहतर हुई है।स्पोर्ट्स के लिए 45 से 50 बच्चे ट्रेनिंग ले रहे हे, जिसमे से दिशा तिवारी (बौद्धिक विकलांग) भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए 2023 में जर्मनी बर्लिन स्पेशल ओलिंपिक वर्ल्ड समर गेम बास्केटबॉल में सिल्वर मैडल एवं 2022/2023 में नेशनल में भी सिल्वर और गोल्ड मैडल जीते है, 11 विकलांग बच्चे नेशनल गेम में गोल्ड मैडल और सिल्वर मैडल ला चुके है।सामुदायक स्वास्थ्य कार्यकर्ता शंकर रैकवार के द्वारा बताया गया” सामुदायिक स्तर पर बच्चों का स्वास्थ्य परिक्षण, सामाजिक सरुक्षा पेंशन, विकलांग प्रमाण पत्र, रेल्वे पास, आधार कार्ड एवं अन्य शासकीय योजनाओं का लाभ दिलाने का प्रयास किया जाता है। सामुदायिक स्तर पर शनिवार को विकलांगता एवं मातृत्व शिशु देखभाल के विषय में जागरूकता बैठक का आयोजन गैस पीडित एवं पानी पीड़ित बस्तियों में किया जाता है। Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन रूपांतरण नेचर एंड हेल्थ आर्गेनाइजेशन द्वारा सुई धागा सिलाई सेंटर में कमर्शियल सिलाई प्रशिक्षण प्रमाण पत्र वितरण किया गया हे पिता, क्यों हो गए मुझसे जुदा!