भोपाल– मुस्ताअली बोहरा । । अभी हिंडनबर्ग के दिए जख्म सूखे भी नहीं थे कि एक के बाद एक नए जख्म दिग्गज कारोबारी गौतम अडानी को मिल गए। अमेरिका में अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी समेत 8 लोगों पर अरबों रुपए की धोखाधड़ी के आरोप लगे हैं। यूनाइटेड स्टेट्स अटॉर्नी ऑफिस ने अडानी पर भारत में सोलर एनर्जी से जुड़ा कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने के लिए भारतीय अधिकारियों को 265 मिलियन डॉलर (2200 करोड़ रुपए से ज्यादा) की रिश्वत देने का आरोप लगाया है। इसके बाद अडानी गु्रप की कंपनियों के शेयर करीब बीस फीसदी तक टूट गए। रिश्वत के आरोपों की खबर आने के बाद ही सिर्फ दो दिनों में ही अडानी गु्रप का मार्केट कैप करीब तीन लाख करोड़ रूपये कम हो गया। इतना ही नहीं अडानी की कंपनी बाॅन्ड के जरिए 60 करोड़ डाॅलर जुटाने की योजना बनाई थी लेकिन अमेरिका में लगे आरोपों के बाद गु्रप ने इस प्लान को कैंसिल कर दिया है। यहां ये भी बताना लाजमी होगा कि हिंडनबर्ग की रिपोर्ट आने के बाद भी अडानी समूह ने अपने एफपीओ के जरिए 20 हजार करोड़ रूपये जुटाने का प्लान कैंसिल कर दिया था। गौतम अडानी को रिश्वत मामला सामने आने के बाद केन्या से भी झटका लगा। केन्या ने इस समूह के साथ दो बड़ी डील कैंसिल कर दी है। पहली डील 700 मिलियन डाॅलर और दूसरी डील करीब पौने दो अरब डाॅलर की थी। इधर, एस एंड पी ग्लोबल रेटिंग्स ने भी अडानी गु्रप की तीन कंपनियों की रेटिंग को स्टेबल से घटाकर निगेटिव कर दिया है। अमेरिकी अटॉर्नी कार्यालय के अनुसार रिश्वतखोरी और धोखाधड़ी के मामले में जिन्हें आरोपी बनाया गया है उनमें गौतम एस. अडानी, सागर एस. अडानी, विनीत एस. जैन, रंजीत गुप्ता, सिरिल कैबनेस, सौरभ अग्रवाल, दीपक मल्होत्रा, रुपेश अग्रवाल शामिल हैं। ये भी हैरत की बात है कि रिश्वत के मामले में अमेरिका में अडानी के खिलाफ मामला चल रहा है और भारत में कोई कार्रवाई नहीं हो रही, जबकि ये रिश्वत दी थी भारत के ही अधिकारियों को। आरोप है कि अडानी ने अपनी कंपनी अडानी ग्रीन एनर्जी को सोलर एनर्जी से जुड़े प्रोजेक्ट्स और कॉन्ट्रैक्ट दिलाने के लिए भारतीय अधिकारियों को 2 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा की रिश्वत दी है। उन्होंने इस बात को उन अमेरिकी बैंकों और इंवेस्टर्स छिपाया, जिनसे अडानी ग्रुप ने इस प्रोजेक्ट के लिए अरबों डॉलर जुटाए थे। अमेरिकी प्रोसिक्यूटर्स का दावा है कि कंपनी के दूसरे सीनियर अधिकारियों ने कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने के लिए भारतीय अधिकारियों को पैसा देने पर सहमति जताई थी। सन 2021 में बॉन्ड ऑफर कर अमेरिका के अलावा दूसरे इंटरनैशनल इंवेस्टर्स और अमेरिका के बैंकों से फंड जुटाया। अमेरिकी प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग ने बयान में कहा कि कथित साजिश के तहत अडानी ग्रीन ने अमेरिकी निवेशकों से 17.5 करोड़ डॉलर से अधिक जुटाए और एज्यूर पावर का शेयर न्यूयॉर्क शेयर बाजार में लिस्टेड किया। साथ ही, न्यूयॉर्क के पूर्वी जिले के अमेरिकी अटॉर्नी कार्यालय ने अडानी, सागर अडानी, सिरिल कैबनेस और अडानी ग्रीन और एज्यूर पावर से जुड़े अन्य लोगों के खिलाफ आपराधिक आरोप लगाए हैं। अमेरिकी कानून अपने निवेशकों या बाजारों से जुड़े विदेशों में भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच को आगे बढ़ाने की अनुमति देता है। चूंकि, प्रोजेक्ट में अमेरिका के इन्वेस्टर्स का पैसा लगा था और अमेरिकी कानून के तहत उस पैसे को रिश्वत के रूप में देना अपराध है, इसलिए अमेरिका में मामला इसलिए दर्ज हुआ। अमेरिकी प्रोसिक्यूटर्स के अनुसार एनर्जी कंपनी के संस्थापक और अध्यक्ष गौतम अडानी हैं। अडानी ग्रीन एनर्जी के कार्यकारी निदेशक सागर अडानी हैं। इसके अलावा, एज्योर पावर के सीईओ रहे रंजीत गुप्ता, एज्योर पावर में सलाहकार रूपेश अग्रवाल अमेरिकी इश्यूअर हैं। अडानी ग्रीन एनर्जी और अमेरिकी इश्यूअर ने सरकारी स्वामित्व वाली सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया को 12 गीगावाट सोलर एनर्जी उपलब्ध कराने का कॉन्ट्रैक्ट हासिल किया था। हालांकि, एसईसीआई को सौर ऊर्जा खरीदने के लिए भारत में खरीदार नहीं मिल पाए। ऐसे में खरीदारों के बिना सौदा आगे नहीं बढ़ सकता था और दोनों कंपनियों के सामने बड़े नुकसान का जोखिम था। इस बीच, अडानी ग्रुप और एज्योर पावर ने भारतीय सरकारी अधिकारियों को रिश्वत देने की योजना बनाई। आरोप है कि इन लोगों ने तय किया कि सरकारी अधिकारियों की जिम्मेदारी होगी कि वो राज्य बिजली वितरण कंपनियों को एसईसीआई के साथ बिजली आपूर्ति समझौते में शामिल होने के लिए तैयार करेंगे। उन्होंने भारतीय अफसरों को करीब 265 मिलियन डॉलर की रिश्वत देने का वादा किया, जिसका एक बड़ा हिस्सा आंध्र प्रदेश के अधिकारियों को दिया गया। इसके बाद कुछ राज्य बिजली कंपनियां सहमत हुईं और दोनों कंपनियों से सौर ऊर्जा खरीदने के लिए एसईसीआई के साथ समझौता किया। भारतीय ऊर्जा कंपनी और अमेरिकी इश्यूअर ने मिलकर रिश्वत का भुगतान किया। इतना ही नहीं, अपनी संलिप्तता छिपाने के लिए कोड नामों का इस्तेमाल किया गया। दूसरी तरफ, अडानी गु्रप ने इन सभी आरोपों का खंडन किया है।गौतम अदानी पर अमेरिका में रिश्वत मामले का असर वैश्विक बैंकों पर भी पड़ेगा, जो कर्ज मुहैया कराते हैं। इसके अलावा भारत से जुड़ी जो कंपनियां विदेशों में काम करना चाहती हैं, उनकी साख पर भी नकारात्मक असर पड़ेगा। चूंकि गौतम अडानी का ज्यादातर कारोबार केन्द्र सरकार के लाइसेंस या एग्रीमेंट के तहत जुड़ा होता है लिहाजा सियासत में उबाल आना लाजमी है। अदानी समूह पोर्ट बनाता है खरीदता भी है. ऐसा अक्सर भारत सरकार के अनुबंधों या लाइसेंस के जरिए होता है। अदानी के पावर प्लांट्स हैं और एयरपोर्ट के संचालन की जिम्मेदारी भी है। अदानी के पास टीवी न्यूज चैनल का भी स्वामित्व है। अडानी का कारोबार मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद तेजी से फैला। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ विदेशी दौरे में गौतम अदानी भी जाते रहे हैं। मोदी के साथ दौरों में अदानी ग्रुप के कारोबारी समझौते भी हुए हैं। ये समझौते श्रीलंका से लेकर इसराइल तक में हुए हैं। पीएम मोदी की ऊर्जा और मैन्युफैक्चरिंग नीतियों को लेकर चलते हैं और इसका फायदा उन्हें पाॅलिटिकल रूप से भी मिलता है। अडानी और मोदी के रिश्तों, दोनों के साथ विदेशी दौरों को लेकर विपक्ष भी निशाना साधता रहता है। बहरहाल, भारत ही नहीं बल्कि दुनिया भर में अपनी पहचान रखने वाले अमीर कारोबारी गौतम अडाणी के लिए हिंडनबर्ग के बाद अमेरिका में रिश्वत मामला भारी पड़ सकता है। इतना ही नहीं इस मामले को भारत-अमेरिका के संबंधों के नजरिये से भी देखा जा रहा है क्योंकि अदानी को लेकर राजनीतिक विवाद और बढ़ सकता है। अमेरिका की सत्ता बाइडेन के हाथों से निकलकर डोनाल्ड ट्रंप के हाथों में जाने वाली है। ऐसे में डोनाल्ड ट्रंप प्रत्यर्पण को लेकर भारत के साथ डील कर सकते हैं। Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन एमपी के नए DGP को लेकर बड़ी ख़बर // मेहमानों का आगमन शुरू इंदौर कलेक्टर को ज्ञापन रहवासियों दिया