भोपाल, मप्र -मुस्ताअली बोहराअधिवक्ता एवं लेखकदेश ही दुनिया के सबसे बड़े कारोबारियों में से एक रतन टाटा अब आसमान में सितारे बनकर चमक रहे हैं। उनकी विदाई से न सिर्फ उद्योग जगत बल्कि समूचे समाज में जो शून्य उभरा है उसकी पूर्ति कभी नहीं हो पाएगी। पूंजीवाद और प्रतिस्पर्धा के इस दौर में रतन टाटा सरीखा परोपकारी कारोबारी होना मायने रखता है। उन्होंने करीब दो दशक से अधिक वक्त तक देश के सबसे बड़े कारोबारी समूह का नेतृत्व किया। सन 1991 में जेआरडी टाटा से रतन टाटा को करीब तीन दर्जन कंपनियां विरासत में मिलीं थीं। इन कंपनियों में से टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, टाटा मोटर्स और टाटा स्टील से ही अन्य कंपनियों की तुलना में आय और लाभ का बड़ा हिस्सा आता था। रतन टाटा ने इस पूरे समूह को एकजुटता के साथ मजबूत बनाया। नमक से लेकर बस तक टाटा के प्रोडक्ट इतने है कि गिनते गिनते थक जाएं। आजादी के पहले से लेकर और अब तक टाटा परिवार का इस देश में खासा योगदान रहा है। रतन टाटा ने भी औद्योगिक तरक्की करते हुए ना कभी अपने समूह को निराश किया और ना कभी देश को। जिस मुकाम पर वो थे उसे हासिल करने के लिए रतन टाटा को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। नेल्कों में रहते हुए उन्हें समूह के भीतर ही विरोध का सामना करना पड़ा। उसी दौरान टाटा मोटर्स की पुणे इकाई में सबसे बड़ी हड़ताल हुई। लेकिन रतन टाटा ने अपनी उर्जा ज़ाया नहीं की बल्कि समूह के दूसरे कारोबारों को चमकाने में लगाई। सौंदर्य-प्रसाधन, पर्सनल केयर, औषधि, कंप्यूटर हार्डवेयर और सीमेंट जैसे कारोबारों मंे एनर्जी खर्च नहीं की। वर्ष 2007 में एंग्लो-डच कोरस स्टील और 2008 में वित्तीय संकट से पहले जगुआर-लैंड रोवर के अधिग्रहण ने समूह की वित्तीय स्थिति पर असर डाला। लेकिन इन बड़े अधिग्रहणों ने वैश्विक स्तर पर समूह को काफी उचांई पर पहुंचा दिया। प्रौद्योगिकी और दूरसंचार, विमानन और मोबाइल कलपुर्जा निर्माण पर जोर दिया अपनी दूरंदेशी साबित की। रतन टाटा ने प्रौद्योगिकी की क्षमता को बहुत पहले ही पहचान लिया था। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज ने भारत में एक मजबूत आइटी सेवा उद्योग स्थापित करने में सहायता की, जिससे देश को वैश्विक आइटी हब के रूप में पहचान मिली। उनके प्रयासों से टीसीएस साफ्टवेयर डेवलपमेंट और कंसल्टेंसी में एक प्रमुख नाम बनी, जिसने दुनिया भर में व्यवसायों के डिजिटल परिवर्तन में योगदान दिया। रतन टाटा के मार्गदर्शन में टाटा टेली सर्विसेज की शुरुआत भारत के दूरसंचार क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुई। इसने शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में कनेक्टिविटी बढ़ाने में मदद की। वो रतन टाटा ही थे जो एक समय में 1 लाख रूपये वाली कार बेच रहे थे और 1 करोड़ रूपये वाली कार भी। उन्होंने ही आम आदमी को कार मालिक बनने का सपने दिखाया और उस सपने को पूरा करने के लिए जददोजहद की। रतन टाटा ही टाटा ग्रुप का प्रतिष्ठित चेहरा रहे। करीब डेढ़ सौ साल से भी ज्यादा पुरानी विरासत को आगे ले जाने में उनकी महती भूमिका रही। अपनी परोपकारी प्रवृत्ति, विनम्रता, सरल-सहज स्वभाव और दूरदर्शी नेतृत्व के लिए पहचाने जाने वाले रतन टाटा ने भारतीय व्यापार परिदृश्य को नई दिशा प्रदान की। ये रतन टाटा ही थे जिनकी कंपनियां विश्वस्तरीय थीं और वो खुद बेहद साधारण और सरल। उन्होंने टाटा गु्रप को ग्लोबल या वैश्विक स्तर पर स्थापित किया। उन्होंने टाटा टी को टेटली, टाटा मोटर्स को जगुआर, लैंड रोवर तथा टाटा स्टील को कोरस का अधिग्रहण करने में मदद की, जिससे यह समूह भारत-केंद्रित समूह से वैश्विक व्यवसाय में परिवर्तित हो गया। इसी के चलते उनके दो दशकों के कार्यकाल में टाटा ग्रुप का राजस्व चालीस गुना से अधिक बढ़ गया और मुनाफा भी पचास फीसदी तक। रतन टाटा ने ओला और पेटीएम सहित विभिन्न स्टार्टअप कंपनियों में भी खासा निवेश किया। दुनिया भर के सबसे बड़े दानदाताओं की सूची में टाटा ग्रुप के संस्थापक जमशेदजी टाटा का नाम सबसे पहले लिया जाता रहा है। रतन टाटा भी दान के मामले में पीछे नहीं थे। टाटा समूह ने कोविड महामारी से लड़ने के लिए भारत सरकार को डेढ़ हजार करोड़ रुपये का दान किया था, जो भारतीय कारोबारी घरानों द्वारा किया गया सबसे बड़ा दान था। रतन टाटा के लिए कारोबार महत्वपूर्ण तो रहा लेकिन उनकी प्राथमिकताओं में देश सबसे उपर रहा। ये कभी नहीं भूला जा सकता कि जब देश भर में कोरोना फैला हुआ था और कई छोटे-बड़े कारोबारी सौ का सामान हजार में बेच रहे थे तब रतन टाटा ने प्रोडक्शन रोककर देश को आॅक्सीजन देने का बीड़ा उठाया था। इसी तरह जब आंतकियों ने मुंबई में निशाना बनाते हुए हमला किया था और ताज होटल में घुसकर अंधाधुंध गोलियां बरसाई तब रतन टाटा ने साफ कह दिया था चाहे तो होटल को उड़ा दो लेकिन एक भी आतंकी नहीं बचना चाहिए। कुल मिलाकर, रतन टाटा एक करिश्माई कारोबारी थे, देश की आर्थिक और सामाजिक प्रगति के संवाहक थे। उन्होंने अपनी मेहनत और काबलियत के बूते विशाल साम्राज्य खड़ा किया। वे सिखा गए कि कारोबार करते हुए देश के हितों के साथ कैसे संतुलन बनाते हैं, बादशाह जैसा रसूख होने के बावजूद सादगी भरा जीवन कैसे जीतें हैं। Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन अ.भा.स्व.संग्राम सेनानी, उत्तराधिकारी संगठन, नई दिल्ली ने भारत रत्न रतन टाटा को मौन रख कर अपने श्रद्धा सुमन अर्पित किए। सितलहा ग्राम पंचायत में शीतला माता मंदिर की पहुंच मार्ग कीचड़ में तब्दील, श्रद्धालु एवं ग्रामीण हो रहे परेशान।