भोपाल, मप्र-मुस्ताअली बोहरा, अधिवक्ता एवं लेखकविश्व प्रसिद्ध तिरूपति बालाजी मंदिर में भोग लगाने और भक्तों को बांटे जाने वाले लड्डु में पशुओं की चर्बी और मछली के तेल का इस्तेमाल किए जाने के आरोप सामने आने से लाखों लोगों की आस्था पर आघात लगा है। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के आरोपों और लैब रिपोर्ट को सहीं माना जाए तो इससे अधिक अनैतिक और अधार्मिक कुछ हो ही नहीं सकता। जिस लड्डू को भक्तों ने भगवान व्यंक्टेश्वर की कृपा और आशीर्वाद समझकर ग्रहण किया था उसमें सुअर और बीफ के मांस से निकाली गई चर्बी का इस्तेमाल हुआ है। इतना ही नहीं अयोध्या में 22 जनवरी को भव्य राम मंदिर के उद्घाटन के मौके पर तिरुपति मंदिर से एक लाख लड्डू अयोध्या पहुंचे थे। तिरूपति बालाजी मंदिर में दर्शन के लिए हर रोज करीब 85 हजार से ज्यादा भक्त पहुंचते हैं। यानि लाखों लोगों ने मिलावट वाला लड्डू प्रसादम ग्रहण किया, एक तरह से लड्डू जेहाद हो गया। इस लड्डू में जानवरों की चर्बी की मिलावट की खबर ने देश भर के सनातनियों को सकते में डाल दिया है। इतना ही इस खबर के बाद देश के अन्य विख्यात मंदिरों में प्रसाद बनाने की प्रक्रिया, उसमें इस्तेमाल होने वाली सामग्री से लेकर वितरण तक की निरीक्षण-परीक्षण किया गया। इधर, लड्डू प्रसादम में मिलावट से लेकर रिपोर्ट सार्वजनिक होने तक के मामले में भी कई सवाल खड़े हो रहे हैं। ये मामला आस्था के साथ राजनीतिक मसला बन गया है। एसएमएस लैब सर्विस की रिपोर्ट इसी साल जून महीने की है। मंदिर के प्रसाद में इस्तेमाल होने वाले घी में जानवर की चर्बी के सबूत वाली लैब रिपोर्ट जुलाई में आ गई थी लेकिन सीएम चंद्रबाबू नायडू ने इसका खुलासा एक माह बाद किया। आखिर इस लेट-लतीफी की क्या वजह थी ये भी अहम सवाल है। सीएम नायडू के गंभीर आरोपों के बाद पूर्व सीएम जगन मोहन रेड्डी ने भी मीडिया से कहा कि उनकी सरकार ने पिछले कई दशकों से मंदिर में होने वाली टेंडर की तय प्रक्रिया का पालन किया है। तिरुपति तिरुमाला मंदिर के प्रसाद में मिलावट की बात सामने आने के बाद अभी तक महज राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोपों, जबानी जमा खर्च ही हुआ है और कोर्ट में अदालती कार्रवाई शुरू हुई है, इसके अलावा मंदिर के शुद्धिकरण हुआ है बाकी धर्म ध्वजा उठाने वालों का बड़ा तबका फिलहाल खामोश ही है। दक्षिणी भारत में मौजूद भगवान तिरुपति बालाजी का चमत्कारिक मंदिर देश-दुनिया में मशहूर है। भगवान विष्णु को समर्पित इस मंदिर की वास्तुकला और शिल्पकला देखने लायक है। ये मंदिर आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले में तिरूपति के पास तिरुमला पर्वत पर स्थित है। भगवान तिरुपति बालाजी का मूल नाम श्री वेंकटेश्वर स्वामी है, जो खुद भगवान विष्णु हैं। इस मंदिर की ख्याति तिरुपति बालाजी के रूप में है और यहां भगवान विष्णु की पूजा होती है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक भगवान श्री वेंकटेश्वर अपनी पत्नी पद्मावती के साथ तिरुमला में रहते हैं। भगवान विष्णु के अवतार माने जाने वाले भगवान वेंकटेश्वर के कई नाम हैं। उन्हें भगवान कृष्ण का प्रतिरूप माना जाता है, इसलिए उन्हें गोविंद भी कहा जाता है। तिरुमाला पहाड़ी पर स्थित मंदिर के गर्भगृह के निर्माण और उसमें मूर्ति की स्थापना के समय को लेकर अलग अलग मत है। बुद्धिजीवी श्रद्धालु मंदिर के पांच हजार साल पुराना होने का दावा भी करते हैं, लेकिन 1100 साल पहले के पल्लव राजवंश के समय से मंदिर में पूजा-अर्चना होने का इतिहास में वर्णन है। माना जाता है कि जो भी भक्त सच्चे दिल से भगवान वेंकटेश्वर के सामने मनोकामना मानता है, उसकी हर इच्छा पूरी होती है। दुनिया भर में मशहूर और चमत्कारिक मंदिर के लड्डू में जो भगवान को भोग भी लगाया जाता था और फिर भक्तों को प्रसाद के तौर पर बांटा भी जाता था, ऐसे प्रसाद में जानवरों की चर्बी की मिलावट में न सिर्फ आस्था पर चोट की बल्कि कई संगीन सवाल खड़े कर दिए हैं। भले ही मिलावट की खबर फैलने के बाद मंदिर का शुद्धिकरण किया गया हो, शांति होमम और वास्तु पूजा की गई हो, पंचगव्य (गोबर, गौ मूत्र, दूध, घी, दही) से मंदिर को शुद्ध किया गया हो और महा शांति होमम किया गया हो लेकिन इससे अपराध कम नहीं हो जाता। आखिर जो लोग सात्विक जीवन जीते हुए मांसाहार से दूर रहते हैं, उन्हें अगर यह मालूम हो कि उन्होंने पशुओं और उसमें भी गाय-भैंस के मांस से बने घी के प्रयोग से बने प्रसाद का सेवन किया है, तो उनकी आस्था और विश्वास को कितनी ठेस पहुंची होगी। अब यह भी कहा जा रहा है कि जिन लड्डूओं को प्रसाद के रूप में बांटा जाता है, उनमें यह मिलावट नहीं थी बल्कि अन्य खाद्य पदार्थों में इसकी मिलावट की जाती थी। जानवरों के मांस से बने पदार्थों की चाहे किसी भी खाद्य सामग्री में की गई हो मामला तो संगीन है। आखिर तिरुपति बालाजी के मंदिर में मिलने वाले प्रसाद का सच क्या है। क्या हकीकत में मिलावट की जाती रही है या फिर इस सब के पीछे कोई राजनीतिक द्ववेश है। सच सामने आना चाहिए। मिलावट के आरोप भी किसी ऐरे गैरे नहीं बल्कि आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने लगाए हैं। और लैब रिपोर्ट भी गुजरात स्थित नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड की है। तिरुपति बालाजी मंदिर के मामले में सभी पक्षों से जांच होनी चाहिए और उन सभी लोगों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए जो इसके लिए दोषी हैं। यहां बात केवल तिरुपति मंदिर में मिलने वाले देसी घी से बने लड्डुओं की ही नहीं है, बल्कि ये मंदिर देश के सबसे ज्यादा धनवान मंदिरों में से हैं। यहां चढ़ावे के रूप में नगदी के अलावा सोने-चांदी के आभूषण, जमीन जायदाद के कागज तक आते हैं। तिरुमाला तिरूपति देवस्थानम ट्रस्ट के अंतर्गत श्रीवेंकटेश्वर स्वामी मंदिर का संचालन होता है, जो दुनिया का सबसे अमीर मंदिर ट्रस्ट भी है। लिहाजा, प्रसाद में मिलावट की बात सिर्फ यहीं तक सीमित नजर नहीं आती। तमाम पहलुओं की जांच और उनका सार्वजनिक होना निहायत जरूरी है। Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new 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