पत्रकार यूनियन कभी अनैतिकता बर्दाश्त नहीं करेंगे, निलंबित या आंदोलन एक ही मुद्दा: प्रवीण कुमार पाण्डेय, यूनियन एडमिन। रीवा।सरकार आए दिन मीडिया के प्रति संवेदनशील होने की बातें करती है और पत्रकारों की सुरक्षा व उनके अधिकारों की रक्षा करने का दावा करती है। वहीं प्रशासन द्वारा इस हेतु आदेश निर्देश तो जारी किए जाते रहे हैं लेकिन ये सारे दावे व आदेश उस समय दरकिनार हो जाते हैं जब पुलिस के खिलाफ लिखी गई निगेटिव खबर की खुन्नस निकालने पुलिस विभाग के ही मातहत मीडिया को ही अपना निशाना बना डालते हैं। पत्रकार को फंसाने पुलिस ने रची भूमिका हालही में मध्यप्रदेश के रीवा जिले से एक ऐसा ही मामला सामने आया है जिसमें राष्ट्रीय स्तर के एक दैनिक समाचार पत्र के युवा पत्रकार को पुलिस के भ्रष्टाचार व लूट खसोट की खबर लिखना इतना मंहगा पड़ गया की उसे जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा दिया। बीते दिनों का बायका कुछ यूँ है की पिछले कई वर्षों से मीडिया में कार्य करने वाले ग्राम करहिया नंबर 2,थाना चोरहटा निवासी दैनिक समाचार पत्र में कार्यरत युवा पत्रकार रिषभ पाण्डेय प्रांशू के घर का पिछले काफी समय से पारिवारिक जमीनी विवाद बड़े पिता से चल रहा है। जिसकी कई बार थाने में शिकायत हो चुकी है लेकिन चोरहटा पुलिस कोई ठोस कार्रवाई करने की बजाय बड़ी घटना या बड़े षड्यंत्र का इंतजार कर रही थी। जानकारी के मुताबिक पत्रकार के पिता रावेन्द्र पाण्डेय एवं बड़े पिता का बाड़ी हटाने को लेकर आपसी कहासुनी व धक्का मुक्की हुई और मामला थाने तक जा पहुंचा। दोनों पक्षों से शिकायत के बाद पुलिस ने पत्रकार के पूरे परिवार के ऊपर मारपीट का प्रकरण दर्ज कर लिया,जबकि पारिवारिक या जमीनी विवाद से पत्रकार या पत्रकारिता का कोई लेना देना ही नहीं है। इस मामले ने उस वक्त एक नया मोड़ ले लिया जब दो दिन बाद अचानक बड़े पिता के घर की एक महिला संजय गाँधी अस्पताल में एडमिट हुई और आरोप लगाया मारपीट के दौरान पत्थरबाजी में उसका गर्भपात हो गया है। पुलिस ने महिला की एमएलसी के आधार पर धारा बढ़ाते हुए तत्काल पत्रकार रिषभ पाण्डेय को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। जबकि इस मामले पर गंभीरता से गौर किया जाए तो पुलिस को दी गई प्राथमिक शिकायत में महिला के साथ मारपीट का कोई जिक्र नहीं था एवं मेडिकल आफीसर से एमएलसी की क्योरी नहीं कराई गई की आखिर किस कारण से गर्भपात हुआ है। जबकि पुलिस के आला अधिकारियों से पत्रकार ने यह फरियाद की थी। अब शुरू हुआ पत्रकार को बदनाम करने की साजिश का सिलसिला पत्रकार ऋषभ पाण्डेय को बदनाम करने के दृष्टिकोण से सोशल मीडिया पर भ्रामक खबरें चलाई गईं और मनगढंत कहानी बनाकर उनके ऊपर कूटरचित मुकदमा दर्ज कराया गया। पत्रकारों के संबंध में जारी शासन के आदेशों की चोरहटा पुलिस ने की अनदेखी चोरहटा पुलिस द्वारा मामले की गंभीरता को दरकिनार करते हुए पत्रकार साथी पर द्वेषपूर्ण असंवैधानिक कार्यवाही की गई है,जबकि शासन के परिपत्र में पत्रकारों से संबंधित मामलों में स्पष्ट निर्देश हैं की किसी भी पत्रकार के विरुद्ध पुलिस के समक्ष आई शिकायत पर रेन्ज स्तर के किसी पुलिस अधिकारी से जाँच कराए जाने के उपरांत ही प्रकरण पंजीबद्ध किया जाना चाहिए एवं जानकारी के अभाव में की आरोपी एक पत्रकार है की स्थित में यदि कोई प्रकरण पंजीबद्ध हो गया हो तो रेन्ज स्तर के अधिकारी द्वारा मामले की जांच एवं विवेचना उपरांत ही गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए। इस शासनादेश के विपरीत कार्य करने वाले पुलिस अधिकारी के विरूद्ध कार्यवाई करने की बात उल्लेखित है। खबर से बौखलाई पुलिस ने की ज्यादती हालांकि इस पूरे मामले में चोरहटा थाना प्रभारी श्रृंगेश सिंह राजपूत ने अपने आपसी द्वेष व दुर्भावना के चलते पत्रकार रिषभ पाण्डेय पर झूँठा एवं नियम विरुद्ध आपराधिक प्रकरण दर्ज कर जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है। चोरहटा पुलिस द्वारा एक पत्रकार साथी पर की गई नियम विरुद्ध कार्रवाई को लेकर पत्रकारों में आक्रोश व्याप्त है। भारतीय राष्ट्रीय पत्रकार महासंघ की टी आई को निलंबित करने की मांग उक्त कार्यवाई को लेकर पत्रकार विकास परिषद,भारतीय राष्ट्रीय पत्रकार महासंघ व युवा पत्रकार संघ सहित जिले के पत्रकारों ने घटना की निंदा करते हुए चोरहटा थाना प्रभारी श्रृंगेश सिंह राजपूत के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित किया है एवं पुलिस अधीक्षक विवेक सिंह से युवा पत्रकार ऋषभ पाण्डेय के ऊपर लगाए गए मनगढंत आरोप की निष्पक्ष जांच कराए जाने की मांग की है। साथ ही चोरहटा थाना प्रभारी द्वारा एक पत्रकार की गरिमा को अनदेखा करते हुए शासनादेश की अवहेलना कर नियम विरुद्ध पत्रकार रिषभ पाण्डेय के विरुद्ध कार्रवाई करने पर अविलंब थाना प्रभारी को निलंबित करने की मांग की है। पूर्व में पत्रकरो के विरुद्ध दर्ज हो चुके हैं फर्जी मुकदमे रीवा जिले में ऐसे कई पत्रकार साथी हैं जिनमें वृद्ध पूर्व में भी रीवा पुलिस ने मनगढ़ंत फर्जी मुकदमा सिर्फ खबर की खुन्नस को लेकर दर्ज किया था आपको बता दे बिछिया थाने में कुछ पत्रकार साथी के खिलाफ षडयंत्र पूर्वक 2019 में फर्जी मुकदमा दर्ज किया गया था वही रीवा शहर के सिविल लाइन थाने में भी कुछ पत्रकार साथियों के ऊपर खबर की खुन्नस को लेकर पुलिस ने फर्जी मुकदमे दर्ज किए थे ।भारतीय राष्ट्रीय पत्रकार महासंघ ने रविवार को हुई आवश्यक बैठक में निर्णय लिया है की पत्रकारों का एक प्रतिनिधिमंडल सोमवार को आईजी महेंद्र सिंह सिकरवार से मुलाकात कर झूंठे मामले की निष्पक्ष जांच व न्यायोचित कार्रवाई हेतु आवश्यक मांग पत्र सौंपकर घटना से अवगत कराएगा।अपराधिक गतिविधियों में संलिप्त कई पुलिसकर्मी कर चुके हैं पूर्व में षड्यंत्र रीवा जिले के चोराहता थाना क्षेत्र में चरोहटा थाने के कई पुलिस कर्मी पूर्व में भी पत्रकार ऋषभ पांडे के खिलाफ फर्जी मुकदमे में फसाने का षड्यंत्र रच चुके थे मगर उन्हें कामयाबी हाथ नहीं लगी थी मगर इस बार पुलिस ने ऐसा संयंत्र रचा की पत्रकार ऋषभ पांडे को भनक नहीं लगी और उसके खिलाफ दर्ज कर दिया गया बिना किसी ठोस जांच के फर्जी मुकदमा । Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन भारत में आज से तीन नए कानून लागू… जाने क्या है तीन कानून में न्याय व्यवस्था… नगरपरिषद सिरमौर के सीएमओ डाक्टर एसबी सिद्दीकी को दी गई भावभीनी विदाई